यशपाल शर्मा, लुधियाना
जहां एक ओर पंजाब के इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की चेयरपर्सन व अन्य उच्च अधिकारियों से मीटिंग कर सिस्टम को सरल करने के प्रयास में हैं, वहीं दूसरी ओर लुधियाना पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से पंजाब भर में इंडस्ट्री पर छापामारी अभियान छेड़ दिया गया हैं। इस छापामारी में इंडस्ट्री से वॉटर व एयर के धड़ाधड़ सैंपल लिए जा रहे हैं। ये छापामारी अभियान पिछले एक सप्ताह से जारी है और इसके लिए पटियाला से टीमें गठित कर चेकिंग की जा रही है। बताया जाता है कि बीते एक सप्ताह में लुधियाना में भी दिल्ली रोड़, चंडीगढ़ रोड़, फोकल प्वाइंट सहित कईं अन्य हिस्सों में रीजनल टीमों की बजाय बाहरी टीमें इंडस्ट्री के सैंपल लेने में जुटी हुई हैं। ये पूरी कार्रवई पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता को दिल्ली से आए इशारे पर की जा रही हैं और संबंधित अफसरों की हिदायतें भी की गई है कि अगर वे इस जांच में किसी तरह की सेटिंग करते पकड़ में आते हैं तो सस्पेंशन की बजाय सीधे ट्रमिनेशन की जाएगी।
बताया जाता है कि सेटिंग न हो, इसके चलते ही इस छापामारी में बाहरी टीमें लगाई गई हैं। ऐसे में इस छापामारी से इंडस्ट्री की दिक्कतें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। इंडस्ट्री में ये भी चर्चा हो रही है कि अगर जांच में उनके सैंपल पास नहीं होते तो उन पर मोटी इंवायरमेंट कंपंसेशन ठोकने की तैयारी कर ली गई है। इंडस्ट्री के स्केल के लिहाज से ये इंवायरमेंट कंपंसेशन दस लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक लगाने की बातें सामनें आ रही हैं। बोर्ड की टीमों ने इतने बडे़ स्तर पर सैंपल एकत्र कर लिए हैं कि इनकी सैंपलिंग में भी दिक्कत आ रही है।
इतने बड़े स्तर पर हो रही इस चेकिंग से ये भी कयास लगने लगे हैं कि इस जांच के जरिए बोर्ड करोड़ों रुपए इंडस्ट्री से एकत्र करने के मूड में है और ये फंड आगे आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकारी विज्ञापन खर्च में इस्तेमाल कर सकती है। सुनने में ये भी आ रही है कि चेयरपर्सन रीना गुप्ता का पंजाब में अधिक टच नहीं है और वे लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति में एक्टिव रही हैं। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं इंडस्ट्री को इस चेकिंग से राहत हासिल करने को अब दिल्ली के भी चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
सवालों के घेरे में आ सकती है पीपीसीबी अफसरों की कारगुजारी
आपको बता दें बडे़ स्तर पर पीपीसीबी की ओर से छेडे़ गए इस छापामारी अभियान में पीपीसीबी अफसरों की कारगुजारी सवालों के घेरे में आने वाली है। इसका कारण है कि जिस इंडस्ट्री के पहले एयर वॉटर के सैंपल अक्सर पास होते रहे हैं और अब रातों रात उनके सैंपल के फेल होने का कारण क्या हो सकता है। ऐसे में इस बात के ये कयास लगाए जा रहे हैं कि पीपीसीबी अफसरों की ओर से अब तक मोटी रिश्वत (जो की एक लाख रुपए से दो लाख रुपए तक रहती है) के दम पर ये सैंपल पास करते आए हैं। लेकिन अब अगर इन सैंपलों को पास करवाने में कोई झोल नहीं चला तो इंडस्ट्री के साथ साथ पीपीसीबी अफसरों की कारगुजारी पर सवाल खडे़ होने लाजिमी हैं। इंडस्ट्री को अपने सैंपल तक में रीजनल आफिस इंडस्ट्री को किसी भी तरह की राहत देने की बजाय इसे बंद करने के कागार पर लाने में किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ रहा। बोर्ड अफसरों की इस छापामारी ने लुधियाना सहित पंजाब के कारोबारियों की नींद उड़ा कर रख दी है।
एयर के तयशुदा मानकाें में बदलाव, इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ी
पीपीसीबी की इस व्यापक स्तर पर की जा रही चेकिंग में ये बात भी निकल कर सामने आ रही है कि इंडस्ट्री को पानी के सैंपल के साथ साथ एयर सैंपलिंग ने भी मुसीबतें बढ़ा दी हैं। पीपीसीबी की ओर से एयर यानि इंडस्ट्री से निकलने वाले धुंए के तयशुदा मापदंड़ों में बदलाव कर दिया गया है। जिसकी जानकारी अधिकतर इंडस्ट्री को नहीं हैं। जिसके चलते लुधियाना की इंडस्ट्री को धड़ाधड़ पीपीसीबी के नोटिसों की मार झेलनी पड़ रही है। बताया जाता है कि पहले एयर में इसकी मात्रा 250 रखी गई थी जो अब कम करके 150 कर दी गई हैं। लुधियाना की अधिकतर इंडस्ट्री में एयर पाल्यूशन कम करने को साइकलोन का इस्तेमाल करते हैं कि लेकिन ये मात्रा कम करने को स्क्रबर को इस्तेमाल में लाया जाना चाहिए,जिसकी जानकारी इंडस्ट्री को नहीं है और न ही पीपीसीबी की ओर से भी इस तरह की कोई गाइडलाइन इंडस्ट्री को जारी की गई हैं। आपको बता दें लुधियाना में पहले से सैकर्टर्ड डाइंग इंडस्ट्री पीपीसीबी के सख्त नोटिसों के दम तोड़ने के कागार पर हैं। सख्त नोटिसों के चलते इसमें से दो दर्जन के करीब इंडस्ट्री बंद भी की जा चुकी है। लेकिन अब एयर के नोटिसों के जरिए भी इंडस्ट्री को बिजली कनेक्शन काटने व पनैल्टी लगाने जैसे कठोर नोटिसों का सामना करना पड़ रहा है। आपको बता दें लुधियाना की कमान इस समय चीफ इंजीनियर राजकुमार रत्तड़ा के पास है और इस समय उनके पास लुधियाना के अलावा कईं अन्य जिलों का भी चार्ज हैं।
इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा की बढ़ने वाली हैं मुश्किलें
आपको बता दें कि पंजाब के इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा लगातार पंजाब की इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकारी मापदंड़ों को लगातार हल्का करने के प्रयास में हैं और बाहरी देशों की कंपनियों को भी पंजाब में इंवेस्टमेंट करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। लेकिन पीपीसीबी की पूरे पंजाब भर में इस छापामारी से इंडस्ट्री में अंदरखाते हाहाकार मचना शुरु हो गया है और जल्द इसकी गूंज इंडस्ट्री मिनिस्टर के आफिस तक भी पहुंचने वाली है। अगर पंजाब सरकार इन सैंपल्स फेल के जरिए इंडस्ट्री से फंड जुटाने की तरकीब में है तो ये कदम सरकार के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है। पीपीसीबी पैनेल्टी के साथ साथ इंडस्ट्री के बिजली कनेक्शन तक काटने के आदेश जारी कर रही है और कारोबारियों के लिए दोबारा से बिजली कनेक्शन जुड़वा पाना कोई कम हरासमेंट का काम नहीं रहता।
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इंडस्ट्री पूरी मेहनत से सीईटीपी प्लांट चला रही हैं और हर महीने इस प्लांट को चलाने में 5 करोड़ रुपए तक का खर्च आता है। पीपीसीबी आगे भी रुटिन चेकिंग करती रहती है। प्लांट के सैंपल में जांच की विभिन्न कैटेगरी रहती है और कईं बार उन्नीस इक्कीस का फर्क रह जाता है और हर बार इसमें सुधार के प्रयास जारी है।
बॉवी जिंदल, जरनल सेक्रेटरी पंजाब डायर्स एसोसिएशन
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पीपीसीबी की ओर से रुटिन सैंपलिंग की जा रही है और ये हर साल होती है। ये सैंपलिंग पिछली बार की सैंपलिंग से अलग है, ऐसा कुछ नहीं है और अगर लुधियाना में अधिक सैंपलिंग करवाई जा रही है तो इस बारे में लुधियाना के चीफ इंजीनयर आरके रत्तड़ा अधिक बता सकते हैं। जब इस बारे में आरके रत्तड़ा के मोबाइल नंबर 9878950529 पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने मोबाइल पिक नहीं किया।
डा. लवनीत दुबे, मेंबर सेक्रेटरी पीपीसीबी
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Yashpal Sharma (Editor)