January 20, 2026 09:39:19

इंडस्ट्री के डिस्वार्ज आउटपुट मीटरों पर उठे सवाल, अगर मीटर पर आने वाले मानक सही तो आखिर क्यों हो रहा पानी पॉल्यूटिड

Jan19,2026 | Yashpal Sharma | Ludhiana


यशपाल शर्मा, लुधियाना 

एक बार फिर से पंजाब पॉल्यूशन कंट्राेल बोर्ड की कारगुजारी सवालों के घेरे में आती दिखाई देने लगी है। पंजाब भर में डाइंग सहित कईं अन्य इंडस्ट्री जहां आउटलेट पर लगे ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) या कहे आउटलेट मीटरों की कारगुजारी सवालों के घेरे में आ गई है। बड़ी बात है कि इन सभी इंडस्ट्री के मीटरों की रीड़िंग तयशुदा मानकों के लिहाज से आ रही है। यानि की इसमें सीओड़ी व बीओडी लेवल सब सही आता है, तो सवाल ये खड़ा हो रहा है कि अगर इन इंडस्ट्री के आउटलेट से डिस्चार्ज तय शुदा मानकों में आ रहा है तो पानी पाल्यूटेड कैसे हो रहा है। इसका मतलब इन मीटरों को तयशुदा मानकों के लिहाज से सैट किया हुआ है और यही कारण है कि जब इन इंडस्ट्री के सैंपल लिए जाते हैं तो वे फेल हो जाते हैं। इतना ही नहीं बुडढा दरिया में भी पीपीसीबी के सैंपल मुताबिक बडे़ स्तर पर पाल्यूशन है। इससे संबंधित एक शिकायत लुधियाना की सच्चा सौदा नाम की एक एनजीओ ने पीपसीबी की चेयरपर्सन को की है। आपको बता दें कि पंजाब भर की डाइंग सहित अन्य बडे़ डिस्चार्ज वाली इंडस्ट्री के ये मीटर (OCEMS) सीपीसीबी व पीपीसीबी के साइटस के साथ सीधे अटैच हैं और इनकी पल पल की आनलाइन रीडिंग डिपार्टमेंट अफसरों तक पहुंचती है। 

सच्चा सौदा ने अपनी शिकायत में सवाल खडे़ करते कहा है कि अगर OCEMS आउटपुट "परफेक्ट" परिणाम दिखा रहे हैं तो लगातार जल प्रदूषण क्यों बढ़ रहा है। OCEMS डैशबोर्ड पर दिखाए जा रहे डेटा के अनुसार, अधिकांश इंडस्ट्रीज़ निर्धारित एफ्लुएंट मानकों के भीतर सख्ती से काम कर रही हैं। हालांकि, ज़मीनी हकीकत एक बहुत अलग तस्वीर दिखाती है, क्योंकि पंजाब में जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। अगर OCEMS के परिणाम लगातार परफेक्ट हैं, तो जल प्रदूषण कम क्यों नहीं हो रहा है।

 अपनी शिकायत में उक्त एनजीओ ने साफ किया है कि उनके मैंबरों की ओर से कुछ जगह अचानक दौरे के दौरान ये देखा कि आउटलेट पर एफ्लुएंट प्रवाह नहीं हो रहा था, फिर भी OCEMS स्क्रीन पर सामान्य रीडिंग दिखाई दे रही थी। डेटा पैटर्न असामान्य रूप से स्थिर रहते हैं, जो वैज्ञानिक रूप से असंभव है क्योंकि एफ्लुएंट की विशेषताएं हर मिनट बदलती रहती हैं। इससे एक बात साफ है कि इंडस्ट्री मालिक या ये मीटर लगाने वाले वेंडरों की ओर से संभावित मैनुअल हेरफेर के जरिए इस रीडिंग को सामान्य दिखाया जाता है। उक्त एनजीओ ने इस पूरी धांधली को खत्म करने के लिए इन OCEMS थर्ड पार्टी जांच और पीपीसीबी के अफसरों को तकनीकी तौर पर बेहतर बनाने की मांग की है। 

OCEMS की रीडिंग फिक्स या हो रहा बाइपास 

एनजीओ ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि एफ्लुएंट के गुण हर मिनट 20-30% तक स्वाभाविक रूप से बदलते रहते हैं। यदि रीडिंग पूरे दिन केवल 1-2 पॉइंट के बदलाव के साथ स्थिर रहती है, तो OCEMS शायद फिक्स किया गया है या बाईपास किया गया है। यह बेसिक विश्लेषण संदिग्ध इंस्टॉलेशन की तुरंत पहचान कर सकता है। उन्होंने इसके लिए OCEMS डेटा के मल्टी-एजेंसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए सिफारिश की है। इसके साथ साथ इंडस्ट्रीज़ से रैंडम एफ्लुएंट सैंपल लेने और उन्हें एक साथ भेजने का अनुरोध करते हैं।

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