October 13, 2026 14:57:52

सांसद रंधावा का बड़ा बयान, बोले- कांग्रेस में नाराजगी लीडरशिप का सबसे बड़ा फॉल्ट, फैसला पहले से तय था तो बैठकों का क्या मतलब; शाह से मुलाकात पर दी सफाई

Jul4,2026 | Enews Team | Punjab

पंजाब। पंजाब कांग्रेस में प्रधान पद को लेकर मचे विवाद के बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पहली बार खुलकर पार्टी हाईकमान पर सवाल उठाए हैं। रंधावा ने कहा कि कई दौर की बैठकों, लंबी मशक्कत और नेताओं से अलग-अलग बातचीत के बावजूद आखिर वही फैसला लागू किया गया, जो चार महीने पहले तय हो चुका था। ऐसे में पूरी कवायद का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर यही निर्णय लेना था तो हाईकमान को पहले दिन ही साफ शब्दों में एक लाइन का आदेश जारी कर देना चाहिए था कि यही अंतिम फैसला है, जिसे मंजूर हो वह पार्टी में रहे और जिसे मंजूर न हो, वह अपना रास्ता चुन सकता है। गृहमंत्री अमित शाह से अपनी मुलाकात को लेकर कहा कि कहा कि इस मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं थी। उनका गुरदासपुर-पठानकोट का निर्वाचन क्षेत्र सीधे पाकिस्तान बॉर्डर से सटा हुआ है, जहां सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं। अगर मुझे कोई राजनीतिक सेटिंग करनी होती, तो मैं सीधे उनके ऑफिस में जाता या फिर काले शीशे वाली गाड़ी में छिपकर जाता।

पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद रंधावा ने कही अहम बातें...

हाईकमान को देना चाहिए था वन-लाइन ऑर्डर

हालिया सूची पर मचे बवाल और अपनी नाराजगी पर खुलकर बात करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जब तीन-चार दौर की लंबी बैठकें हो चुकी थीं, तो उसके बाद भी ऐसी नाराजगी सामने आना लीडरशिप का सबसे बड़ा फॉल्ट है। उन्होंने कहा- इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात हुई, राहुल गांधी ने सभी को अलग-अलग बुलाकर चर्चा की और केसी वेणुगोपाल ने भी कई बार संवाद स्थापित किया। इसके बाद मुझे और चरणजीत सिंह चन्नी को बुलाया गया था। जब इतनी लंबी कवायद के बाद भी वही फैसला करना था, जो चार महीने पहले ही तय हो चुका था और जिस पर सभी ने हस्ताक्षर कर दिए थे, तो इस पूरी एक्सरसाइज की क्या जरूरत थी? हाईकमान को पहले दिन ही कड़ा रुख अपनाते हुए एक लाइन का आदेश जारी करना चाहिए था कि यह हमारा आखिरी फैसला है, जिसे मंजूर है वह रहे, जिसे नहीं मंजूर वह जा सकता है।

इंदिरा-राजीव की कांग्रेस को याद कर रहे लोग

रंधावा ने कहा कि आज पार्टी के भीतर जो वफादार और सच्चे कांग्रेसी हैं, उन्हें जानबूझकर इग्नोर किया जा रहा है। यही वजह है कि आज लोग इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय की कांग्रेस को याद करते हैं, जब मात्र तीन जनरल सेक्रेटरी पूरी पार्टी को संभाल लेते थे, जबकि आज पदाधिकारियों की फौज होने के बावजूद दिल्ली में बैठे लोग डैमेज कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा- मुझे चन्नी, राजा वडिंग या ए, बी, सी, डी किसी के भी अध्यक्ष बनने से कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत इस बात से है कि इतनी कंट्रोवर्सी के बाद यह निर्णय लिया गया।

Mp-Randhawa-Makes-A-Significant-Statement-Calling-Internal-Resentment-The-Congress-Leaderships-Biggest-Failing-He-Questions-The-Point-Of-Meetings-If-The-Decision-Was-Already-Predetermined-And-Clarifies-His-Meeting-With-Shah




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