August 25, 2026 00:44:54

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: कचरा नियम तोड़ने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर का पानी-बिजली कनेक्शन काटने का स्थानीय निकाय को दिए अधिकार

-छह सप्ताह में करनी होगी सभी बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान

-मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

Aug24,2026 | Yashpal Sharma | New Delhi


यशपाल शर्मा, नई दिल्ली

देशभर के शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन की गंभीर समस्या के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों को महत्वपूर्ण अधिकार दिए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि Solid Waste Management Rules का उल्लंघन करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) के पानी और बिजली के कनेक्शन को अस्थायी रूप से काटा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि समाज में यह सोच दुर्भाग्यपूर्ण है कि व्यक्ति को कचरा पैदा करने का अधिकार है, लेकिन उसके प्रबंधन और उसके प्रभाव को नियंत्रित करने में सहयोग करने की जिम्मेदारी नहीं है।

जिला कलेक्टर की विशेष सेल करेगी कार्रवाई
कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रत्येक स्थानीय निकाय अपने क्षेत्र में आने वाले सभी बल्क वेस्ट जनरेटर को लिखित रूप से उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी देगा। इनमें मुख्य रूप से—
कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण (Segregation) करना।
कचरे को उचित तरीके से स्टोर करना।
ठोस कचरे को निर्धारित व्यवस्था के तहत सौंपना।
नियमों का पालन नहीं करने पर पानी और बिजली की अस्थायी सप्लाई काटे जाने की जानकारी देना।
पानी और बिजली काटने का आदेश जिला कलेक्टर की विशेष सेल द्वारा दिया जाएगा। कनेक्शन तभी बहाल होगा जब संबंधित बल्क वेस्ट जनरेटर नियमों का पालन करने संबंधी Compliance Certificate जमा करेगा।

स्कूलों में पढ़ाया जाएगा ठोस कचरा प्रबंधन
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों को निर्देश दिया कि ठोस कचरा प्रबंधन पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक पाठ्यक्रम को तुरंत शिक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने परिवार के सदस्यों को कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए, जबकि शिक्षकों को इसके लिए ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाए।
प्रशिक्षित विद्यार्थियों को कोर्ट ने “घरेलू स्तर के पर्यवेक्षक” (Household-level Supervisors) की भूमिका देने की बात कही।

कचरा केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं
पीठ ने कहा कि यह धारणा कि ठोस कचरा केवल सफाई कर्मचारियों की समस्या है और बाकी लोग सिर्फ कचरा पैदा करने वाले हैं, कानूनी और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से गलत है।
कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है। कानून नियम और उनके उल्लंघन पर परिणाम तय कर सकता है, लेकिन केवल कानून के जरिए नागरिक व्यवहार पैदा नहीं किया जा सकता। नियमों का वास्तविक पालन तभी संभव है जब व्यक्ति और संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी को समझें और उसे व्यवहार में लागू करें।

जिला स्तर पर होंगे नियमित ऑडिट
सुप्रीम कोर्ट ने जिला शिक्षा विभागों को समय-समय पर ऑडिट करने और उसकी रिपोर्ट संबंधित जिला कलेक्टर को सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत ने अधिकारियों को मौजूदा ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल करने पर भी विचार करने को कहा, जहां—
जमा हुए कचरे की जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड की जा सकें।
मासिक अनुपालन रिपोर्ट दर्ज की जा सके।
रिपोर्ट जिला कलेक्टर से लेकर राज्य सचिवों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों तक भेजी जा सके।

छह सप्ताह में सभी बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान
सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करने के लिए एक विशेष प्रवर्तन व्यवस्था भी तय की है।
इसके तहत Supreme Court Monitoring Committee (SCMC) राज्य के मुख्य सचिवों के माध्यम से जिला कलेक्टरों को निर्देश देगी कि वे स्थानीय निकायों के साथ मिलकर अपने-अपने जिलों में सभी Bulk Waste Generators की पहचान करें।

यह प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।
इसके बाद जिला कलेक्टर सभी बल्क वेस्ट जनरेटर को नियमों के पालन और नियम तोड़ने पर होने वाली कार्रवाई की जानकारी देंगे।

पहले दिया जाएगा अनुपालन का मौका
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बल्क वेस्ट जनरेटर को पहले अपनी आवश्यक सुविधाएं स्थापित करने और नियमों का पालन करने का अवसर दिया जाएगा।
संबंधित संस्थाएं ऑनलाइन अपने अनुपालन की जानकारी स्थानीय निकायों को देंगी। स्थानीय निकाय इन सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे और अपनी रिपोर्ट जिला कलेक्टर को भेजेंगे।
स्थानीय निकायों को यह भी बताना होगा कि कितना कचरा पैदा हुआ, उसमें से कितना कचरा दर्ज/प्रबंधित किया गया और कितना अनaccounted यानी बिना हिसाब का रहा। इसके साथ ही सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी देनी होगी।
नदियों में जा रहे कचरे से होने वाले प्रदूषण पर भी फोकस
सुप्रीम कोर्ट ने SCMC को निर्देश दिया कि वह नगरपालिका ठोस कचरे से नदियों में होने वाले जल प्रदूषण पर विशेष ध्यान दे और इस संबंध में आंकड़े अदालत के सामने पेश करे।

यह आदेश भोपाल नगर निगम की उन अपीलों की सुनवाई के दौरान आया, जिनमें नगर निगम ने Solid Waste Management Rules, 2016 के अनुपालन से जुड़े राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों को चुनौती दी थी।
SCMC की अंतरिम रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यापक प्रवर्तन तंत्र निर्धारित किया।

140 करोड़ से अधिक आबादी के लिए पूरी व्यवस्था को अपग्रेड करने की जरूरत
पीठ ने कहा कि भारत की आबादी 1.4 अरब से अधिक है और देश में साक्षरता, शिक्षा तथा नागरिक सुविधाओं का स्तर अलग-अलग है। हर व्यक्ति, परिवार और संस्था किसी न किसी रूप में ठोस कचरा पैदा करती है।

अदालत ने कहा कि जैविक, गैर-जैविक, खतरनाक, इलेक्ट्रॉनिक और निर्माण संबंधी कचरे की मात्रा और जटिलता इतनी बढ़ चुकी है कि किसी एक वर्ग के सफाई कर्मचारियों से इसके प्रबंधन की उम्मीद नहीं की जा सकती।
इसलिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का व्यापक ऑडिट और अपग्रेडेशन जरूरी है, ताकि ठोस कचरा प्रबंधन के मौजूदा मानकों को पूरा किया जा सके।

मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

Major-Supreme-Court-Order-Local-Bodies-Authorized-To-Disconnect-Water-And-Electricity-Supplies-Of-Bulk-Waste-Generators-Violating-Waste-Management-Rules




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