लुधियाना में 2 चार्टर्ड अकाउंटेंट पर मामला दर्ज, 175 करोड़ अवैध तरीके से विदेश भेजने के आरोप, फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए
Aug24,2026
| Enews Team | Ludhiana
लुधियाना। लुधियाना में आयकर विभाग की शिकायत पर सराभा नगर थाना पुलिस ने दो चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) ऋषभ गुप्ता और लवप्रीत सिंह के खिलाफ करीब 175.53 करोड़ रुपए के संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस मामले में केस दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने खातों और दस्तावेजों की जांच किए बिना फर्जी फॉर्म 15CB सर्टिफिकेट जारी किए। इन्होंने एक शेल कंपनी के जरिए रकम विदेश भेजने में मदद की। यह कार्रवाई आयकर विभाग (जांच), लुधियाना की ओर से 18 अगस्त 2026 को ‘ऋषभ गुप्ता एंड एसोसिएट्स’ के कार्यालय में किए गए सर्वे के बाद की गई है। आयकर अधिकारियों ने जब कंपनी के रजिस्टर्ड पते पर जांच की, तो वहां एक छोटा-सा केबिन मिला, जिस पर ताला लगा हुआ था। पड़ोसियों ने बताया कि पिछले छह महीने से यहां कोई कामकाज नहीं हुआ था। इसके बाद कंपनी के निदेशक गौरव जैन ने अपने बयान में कथित तौर पर स्वीकार किया कि कंपनी का इस्तेमाल कमीशन लेकर शेल एंटिटी के जरिए विदेशों में रकम भेजने के लिए किया जा रहा था।
फर्जी कंपनियों का जाल बिछाया
पुलिस को दी शिकायत में कहा गया कि इस घोटाले की शुरुआत फर्जी और सिर्फ कागजों पर चलने वाली (शेल) कंपनियों को बनाकर हुई। मैसर्स कर्मण्यु इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड जैसी फर्जी कंपनियां बनाई गईं। इनका कोई असली काम-धंधा नहीं था। जब पुलिस और अफसरों ने इन पतों पर जाकर देखा, तो वहां सिर्फ छोटे-मोटे केबिन मिले जो महीनों से बंद पड़े थे। शिकायत में कहा है कि इन फर्जी कंपनियों के खातों में भारतीय कंपनियों से भारी रकम जमा कराई गई। फिर इस पैसे को विदेश भेजने के लिए यह झूठा बहाना बनाया गया कि कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर सेवाओं के बदले भुगतान किया जा रहा है, ताकि किसी को शक न हो।
नियमों और जांच को पूरी तरह अनदेखा किया
कानून के मुताबिक विदेश पैसे भेजने से पहले सीए को कंपनी के खातों, कागजात और लेन-देन की पूरी जांच करनी होती है। लेकिन दोनों सीए रिशव गुप्ता और लवप्रीत सिंह ने बिना कोई कागजात या बैंक खाता देखे ही आंखें बंद करके मंजूरी दे दी। शिकायत के मुताबिक विदेशों में रकम भेजने के लिए 'फॉर्म 15CB' नाम का सरकारी कागज सबसे जरूरी होता है। सीए रिशव गुप्ता के डिजिटल दस्तखत (कंप्यूटर वाले दस्तखत) का इस्तेमाल उनके साथी सीए लवप्रीत सिंह ने किया। दोनों ने मिलकर फर्जी फॉर्म तैयार किए, उन पर दस्तखत किए और बैंकों में जमा करने के लिए दे दिए।
बैंकों के जरिए तीन साल में गई पेमेंट
इस फर्जी मंजूरी के दम पर बैंकों के जरिए तीन सालों (2023 से 2026) में कुल 175 करोड़ रुपए से ज्यादा की भारी-भरकम रकम भारत से बाहर फर्जी खातों में भेज दी गई। साल 2023-24 में 55.14 करोड़, साल 2024-25 में 47.50 करोड़, साल 2025-26 में 72.88 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। पूछताछ में सामने आया कि दोनों सीए और फर्जी कंपनी के मालिकों ने इस अवैध काम के बदले मोटा कमीशन (अवैध कमाई) खाया। इस हेराफेरी से आरोपियों की जेब तो भरी, लेकिन देश के विदेशी मुद्रा कोष को भारी नुकसान पहुंचा।
Case-Registered-Against-Two-Chartered-Accountants-In-Ludhiana-Accused-Of-Illegally-Sending-175-Crore-Abroad-And-Issuing-Fake-Certificates