यशपाल शर्मा लुधियाना/गुरुग्राम, 17 जून 2026।
पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा झटका लगा है, लेकिन यह झटका क्यों लगा इसके पीछे भी एक अहम कारण सामने आया है । गुरुग्राम स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि इस स्तर पर उन्हें राहत दी जाती है तो जांच प्रभावित हो सकती है और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका बनी हुई है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि एक गवाह को कथित रूप से 35 हजार रुपये देकर अपना बयान वापस लेने के लिए कहा गया था और इन रुपयों की अदायगी Gpay के जरिए करने की बातें सामने आ रही है। अदालत ने माना कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह अन्य गवाहों को भी प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है।
ईडी का दावा: 100 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध लेन-देन की जांच
ईडी के अनुसार मामला फर्जी जीएसटी बिलों और शेल कंपनियों के जरिए किए गए कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि मोबाइल फोन कारोबार से संबंधित कई कंपनियों के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध रकम को इधर-उधर किया गया। ईडी का कहना है कि संजीव अरोड़ा से जुड़ी कुछ फर्मों के दिल्ली स्थित कथित फर्जी संस्थाओं के साथ संदिग्ध लेन-देन के संबंध सामने आए हैं।
बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया राजनीतिक
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अरोड़ा के वकीलों ने अदालत को बताया कि ईडी को अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है जो उन्हें कथित अपराध से सीधे तौर पर जोड़ता हो। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया और गिरफ्तारी दुर्भावनापूर्ण मंशा के तहत की गई।
ईडी ने किया विरोध
ईडी की ओर से अदालत में कहा गया कि गिरफ्तारी कानून के अनुसार की गई है और जांच एजेंसी को गिरफ्तारी के बाद निर्धारित अवधि तक रिमांड मांगने का अधिकार है। एजेंसी ने तर्क दिया कि इस चरण में जमानत मिलने से जांच पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से यह आशंका बनती है कि आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है।
अदालत की टिप्पणी
विशेष अदालत के न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि आरोपी कंपनी और उससे जुड़े लोगों के कामकाज तथा लेन-देन की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों से परिचित है। ऐसे में गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में नियमित जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
फिलहाल संजीव अरोड़ा को इस मामले में राहत नहीं मिली है और जांच एजेंसियां मामले की आगे जांच कर रही हैं। वहीं, बचाव पक्ष के पास उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला है।