यशपाल शर्मा, लुधियाना
भले ही आगामी विधानसभा चुनाव में अभी करीब डेढ़ साल का समय बाकी है, लेकिन लुधियाना की वेस्ट विधानसभा में अभी से राजनीतिक माहौल गरमाता दिखाई दे रहा है। बीते दिनों पुलिस कमिश्नरेट की ओर से पूर्व मंत्री आशु खेमे के बेहद नजदीकी और पार्षद पति इंद्रजीत सिंह इंदी को गिरफ्तार किया गया और लंबे समय के लिए उसे सलाखों के पीछे भेजा जाए, इसके लिए उस पर धारा 307 के तहत केस भी फाइल किया गया। आम आदमी पार्टी सरकार की कोशिश भी यही थी कि इंदी को जेल भेजा जाए लेकिन इंदी की गिरफ्तारी और केस फाइल करने की टाइमिंग गड़बड़ाने के चलते यह मामला डयूटी मैजिस्टेट के समक्ष ठहर नहीं पाया और जज व पुलिस के बीच लंबी बहस के बाद फाइल किए गए केस को खारिज कर दिया गया। इंदी को जेल भेजा जा सके इसके लिए पुलिस की ओर से तमाम कोशिशें की गई और सरकारी कागजों में भी कई बदलाव किए गए लेकिन इसके बावजूद कामयाबी नहीं मिल पाई और इंदी सरकार के ट्रैप से बच निकले। इस पूरे प्रकरण में आम आदमी पार्टी सरकार को मुंह की खानी पड़ी। अब वेस्ट हल्के के पूर्व मंत्री व उनके साथी नेता इस पूरे मामले को भूनाने की भी कोई कमी नहीं छोड़ रहे। पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू की ओर से भी इस मामले को लेकर जहां पंजाब सरकार की कारगुजारी पर सवाल खड़े किए गए हैं तो वही वह अपनी ही पार्टी के प्रदेश प्रधान को भी खूब आडे़ हाथों ले रहे है। आशु ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि प्रदेश प्रधान अपने कार्यकर्ताओं की लड़ाई में शामिल नहीं हो रहे और यहां तक की आशू ने वर्कर की लड़ाई मामले में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को बेहतर बता उनकी तारीफ कर दी।
आपको बता दें कि यहां से आम आदमी पार्टी के विधायक और मौजूदा मंत्री संजीव अरोड़ा विदेशी दौरे और पंजाब में विदेशी इन्वेस्टमेंट लाने में व्यस्त है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी कहीं ना कहीं अपने पुराने गढ़ में पैर जमाने के लिए सेंधमारी करती दिखाई दे रही है। बात करें सरकार के दिग्गज मंत्री संजीव अरोड़ा की तो वह विधायक चुनाव से पहले लुधियाना की जनता के जितने नजदीक थे, अब वे उतने ही दूर होते दिखाई दे रहे हैं । यही कारण है कि वे लुधियाना की पब्लिक से ना तो अधिक मिल पा रहे हैं और ना ही शहर की डेवलपमेंट पर अधिक फोकस कर पा रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि वे पंजाब में अधिक से अधिक विदेशी इन्वेस्टमेंट और देश के बड़े कारोबारियों को पंजाब में लाना चाह रहे हैं लेकिन इस दौड़ में कहीं ना कहीं उनका अपनी विधानसभा से जमीनी जुड़ाव बिखरता दिखाई दे रहा है ।
वहीं दूसरी ओर वेस्ट विधानसभा से दो बार बड़े मार्जिन से चुनाव जीतने वाले भारत भूषण आशू कहीं ना कहीं फिर से अपने पैर जमाने की कोशिशें में आगे बढ़ते दिखाई दिए हैं। हालांकि पिछले 15 सालों में उनकी इस सीट से किसी कांग्रेसी कार्यकर्ता की ओर से विधायक टिकट का दावा नहीं किया गया, लेकिन इस बार पवन दीवान इस विधानसभा से टिकट पाने के लिए एक्टिव होते दिखाई दिए हैं। हालांकि पिछले 15 साल से वे एक्टिव राजनीति से काफी हद तक आउट रहे हैं। लेकिन उनके समर्थन में चंडीगढ़ के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी है इसलिए वह भी इस बार टिकट की जोर आजमाइश करने की कोशिश में है। इसका बड़ा कारण भारत भूषण आशू का लगातार दो बार इस सीट से चुनाव हारना है जिसमें एक चुनाव बाय इलेक्शन का भी है।
बात करें पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू की तो उनके लिए दोबारा से वेस्ट विधानसभा की टिकट हासिल करना कोई बड़ा काम नहीं है लेकिन वे इसके साथ-साथ पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में अपना वर्चस्व कायम करने में फोकस किए हुए हैं। यही कारण है कि अपने बॉय इलेक्शन में उनकी ओर से लुधियाना से सांसद व पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग से लगातार 36 का आंकड़ा बनाए रखा। तरनतारण उपचुनाव में करारी हार व पंचायत चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए लुधियाना के सांसद होने के साथ साथ अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के लिए प्रदेश प्रधानगी बचाना बेहद कठिन दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत भूषण आशू भी इसी जोर अजमाईश में हैं कि पंजाब कांग्रेस की कमान उनके खेमे में रहने वाले किसी नेता के हाथ में आए, तांकि उनका कद पार्टी में बना रहे।
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Yashpal Sharma (Editor)