यशपाल शर्मा, लुधियाना
पूरे पंजाब में प्रख्यात दंडी स्वामी मंदिर के नजदीक स्थित दयानंद मेडिकल कालेज बिना पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से कंसेंट लिए चलाया जा रहा था, ये पूरी धांधली पीपीसीबी के पहली हियरिंग में साफ हो गई है। डीएमसी मैनेजमेंट के पास उक्त मेडिकल कालेज की वॉटर, एयर, बायो मेडिकल वेस्ट और हेजार्ड वेस्ट में से किसी की भी कोई कंसेंट नहीं हैं और सालों से सरेआम पर्यावरण की धज्जियां उड़ाते हुए इस मेडिकल कालेज को चलाया जा रहा है। गौर हो कि ई न्यूज पंजाब वेब चैनल की ओर से इस पूरे स्कैम को पिटारे से बाहर निकालते हुए इसका खुलासा किया गया था। जिसके बाद पीपीसीबी ने हरकत में आते हुए कालेज पर एक्शन लेने की शुरुआत कर दी है। लेकिन अब भी पीपीसीबी की कार्रवाई से ये सवाल खडे़ हो रहे हैं कि आखिर कब तक बोर्ड अधिकारी डीएमसी प्रबंधन के साथ दोस्ताना संबंध निभा पर्यावरण की धज्जियां उड़ाते रहेंगे। आपको बता दे इसी मेडिकल कालेज में बिना बायो मेडिकल वेस्ट की कंसेंट के मानव व जानवरों की मृत बॉडी के चीरफाड भी होती है और इनकी बॉडी से कई अहम पार्ट भी निकाल कर रिसर्च को रखे जाते हैं। लेकिन बायो मेडिकल वेस्ट कंसेंट के ये बॉडी कैसे कालेज में आती है और कैसे कालेज से बाहर जाती है, इस पर सभी चुप्पी साधे हुए हैं। अब ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि जहां पीपीसीबी पर्यावरण की संभाल व कडे़ एक्शन के तौर पर छोटी छोटी इंडस्ट्री पर लाखों रुपए की इंवायरमेंट कंपनसेशन लगा देता है और अधिकतर मामलों में बैंक गारंटी के जरिए भी उन्हें दंडित किया जाता है, लेकिन डीएमसी का ये पूरा खेल सामने आने के बावजूद अभी तक पीपीसीबी की ओर से किसी तरह का सख्त एक्शन क्यों नहीं लिया गया है। जबकि नियमों के तहत इतने साल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए डीएमसी मेडिकल कालेज से इंवायरमेंट कंपनसेशन वसूली जानी बनती है, जो की अभी तक नहीं हो पाया है। जबकि इस पूरे विवाद को मैनेज करने के लिए हास्पिटल के सीनियर डाक्टर तक पीपीसीबी के चक्कर काट रहे हैं।
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अब इंवायरमेंट क्लीयरेंस के विवाद को भी दबाने की कोशिशें शुरु
आपको बता दें कि दयानंद मेडिकल कालेज में छह छह मंजिल पांच ब्लाॅक पिछले कुछ सालों में बनकर तैयार हुए हैं और इनकी कंस्ट्रक्शन में भी इंवायरमेंट क्लीयरेंस का ध्यान नहीं रखा गया। सूत्र बताते है कि ये कंस्ट्रक्शन 20 हजार स्कवेयर मीटर से अधिक है। यही कारण है कि डीएमसी मैनेजमेंट अभी इस पूरे विवाद को सैटल करने में जुटी हुई है और यही कारण है कि पीपीसीबी के नोटिस के बावजूद अभी तक इस संबंधी अहम दस्तावेज बोर्ड को नहीं पेश किए गए हैं। असल में जब तक ये दस्तावेज पीपीसीबी में जमा नहीं होते तब तक उक्त मेडिकल कालेज को वॉटर व एयर की कंसेंट तक हासिल नहीं हो सकती है। ऐसे में डीएमसी मैनेजमेंट की मुश्किलें अब बढ़ती दिखाई दे रही हैं और वे अब पीपीसीबी से समय मांग कर स्कैम को दबाने की कोशिश में हैं।
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वहीं इस बारे में पीपीसीबी के मैंबर सेक्रेटरी जीएस मजीठिया से जब ये सवाल पूछा गया कि जब बोर्ड पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली छोटी छोटी इंडस्ट्री पर पर्यावरण कंपनसेशन जैसा सख्त एक्शन लेने में गुरेज नहीं करता तो अभी तक दयानंद मेडिकल कॉलेज पर इस तरह का एक्शन क्यों नहीं लिया गया तो उन्होंने कहा कि ये मामला मेरे भी नोटिस में है और इसका मौजूद स्टेटस क्या है, इसे मैं व्यक्तिगत तौर पर देखता हूं और नियमों के तहत जो एक्शन बनता है, उसमें कोई गुरेज नहीं किया जाएगा।
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Yashpal Sharma (Editor)