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ब्रेकिंग- दयानंद मेडिकल कॉलेज का फंसा पेच- पीपीसीबी ने जारी किया शोकाज नोटिस, हियरिंग में देना होगा जवाब

Jan3,2025 | Yashpal Sharma | Ludhiana

दयानंद मेडिकल कॉलेज में नियमों की उड़ाई जारी धज्जियों को लेकर पीपीसीबी की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया है। इस नोटिस के जरिए डीएमसी मैनेजमेंट को हियरिंग में पूरा पक्ष रखने को कहा गया है। गौर हो कि मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद डीएमसी की ओर से पीपीसीबी से किसी तरह की कंसेंट नहीं ली गई है।और कंसेंट फीस के तौर पर बोर्ड का करोड़ों रुपया दबा कर रखा गया है। इतना ही नहीं इस मेडिकल कॉलेज की ओर से नई बिल्डिंग निर्माण में एनवायरमेंट क्लीयरेंस ना लिए जाना भी सवालों के घेरे में है। गौर हो कि 20000 स्क्वायर मीटर से ऊपर की कंस्ट्रक्शन पर नियमों के तहत एनवायरमेंट क्लियरेंस लेनी जरूरी होती है, लेकिन इस निर्माण में सब कुछ दरकिनार कर दिया गया। अगर दयानंद मेडिकल कॉलेज पीपीसीबी की इंस्पेक्शन में एनवायरमेंट क्लीयरेंस के घेरे में आया तो इनके लिए बोर्ड से कंसेंट तक लेना तक मुश्किल हो जाएगा क्योंकि बोर्ड से कंसेंट लेने के लिए एनवायरमेंट क्लीयरेंस का स्टेप क्लियर करना बहुत जरूरी है।  पीपीसीबी के चीफ इंजीनियर लुधियाना आर के रतड़ा से इस संबंधी बात की गई तो उन्होंने बताया कि दयानंद मेडिकल कॉलेज को बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है और उन्हें हियरिंग के लिए तलब किया गया है ताकि वह अपना पक्ष रख सके। इसके बाद बोर्ड अगली कार्रवाई करेगा । बड़ी बात है कि अभी तक डीएमसी मैनेजमेंट इसे एजुकेशन इंस्टीटयूट का नाम देकर अपना बचाव करती रही है, लेकिन अब इस मामले की पूरी पोल खुलने के बाद अब मैनेजमेंट को बोर्ड के सभी नियम कायदे पूरा करने होंगे। गौर हो कि ई न्यूज पंजाब वेब चैनल की ओर से इस पूरे मामले को बड़ी गंभीरता से उठाया गया था, जिसके बाद पीपीसीबी की ओर से दयानंद मेडिकल कॉलेज से सैंपलिंग भी की गई थी और अब इस मामले में बोर्ड की और से नोटिस जारी किया गया है।                                                                    


कंसेंट लेने को डीएमसी करना पड़ सकता है 300 फीसदी जुर्माने का भुगतान                                   

अगर दयानंद मेडिकल कॉलेज की ओर से पीपीसीबी से किसी भी तरह की कंसेंट हासिल नहीं की गई है  और अब ये सभी कंसेंट हासिल करने को करोड़ों रुपए का भुगतान करना पड़ सकता है। दयानंद मेडिकल कॉलेज को पीपीसीबी से कंसेंट लेने को साल 1992 से लेकर मौजूदा साल तक की एयर व वाटर की कंसेंट हासिल करने को लगभग 300 फीसदी जुर्माने के साथ भुगतान करना होगा जो कि राशि लगभग 3 करोड़ से अधिक की बन सकती है । हालांकि इसके अलावा पीपीसीबी को बायो मेडिकल वेस्ट और हजार्ड वेस्ट की कंसेंट के लिए भी लाखों रुपए अदा करने होंगे। लेकिन अब सवाल खड़ा यह होता है कि जब पंजाब के अन्य हिस्सों में मेडिकल कॉलेज की ओर से पीपीसीबी से कंसेंट लेकर उन्हें चलाया जा रहा है तो अभी तक दयानंद मेडिकल कॉलेज जो कि पंजाब का काफी पुराना मेडिकल कॉलेज है, वह अब तक कैसे बिना पीपीसीबी की कंसेंट के चलाया जा रहा था।  इतना ही नहीं अगर एनवायरमेंट क्लियरेंस की जांच हुई तो डीएमसी प्रॉसीक्यूशन में भी फंस सकती है। आपको बता दें अगर ओल्ड डीएसमी के भीतर का निर्माण 20 हजार स्कवेयर फुट से अधिक पाया जाता है तो ये इंवायरमेंट क्लीयरेंस की वॉयलेशन के घेरे में आ जाएंगे और वॉयलेशन को अनदेखा किए जाने पर एक्ट के तहत मैनेजमेंट मैंबर प्रॉसीक्यूशन के घेरे में फंस सकते हैं। 

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