यशपाल शर्मा | लुधियाना
लुधियाना नगर निगम के रिकॉर्ड रूम में हुई एक रहस्यमयी घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दस दिन पहले रिकॉर्ड रूम का पुराना ताला तोड़कर वहां से महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज कथित रूप से गायब कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि चोरी के बाद दरवाजे पर नया ताला लगा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम से आशंका जताई जा रही है कि यह किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं, बल्कि निगम के भीतर के किसी कर्मचारी या अधिकारी का काम हो सकता है, जिसे रिकॉर्ड रूम और वहां रखे दस्तावेजों की पूरी जानकारी थी। जानकारों का कहना है कि रिकॉर्ड रूम में नकदी या कीमती सामान नहीं, बल्कि वर्षों पुराने लेखा-जोखा, वाउचर, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज रखे जाते हैं। ऐसे में केवल दस्तावेजों को निशाना बनाया जाना इस घटना को और अधिक संदिग्ध बनाता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-कौन से रिकॉर्ड गायब हुए हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि किसी संभावित वित्तीय अनियमितता या घोटाले से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई हो।
निगम कमिश्नर के रिकॉर्ड मिलान के आदेश के बाद बढ़ी हलचल
सूत्रों के अनुसार नगर निगम आयुक्त ओजस्वी अलंकार ने हाल ही में निगम के विभिन्न खातों और रिकॉर्ड का मिलान कराने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो कई पुराने वित्तीय मामलों और अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। ऐसे में रिकॉर्ड रूम में हुई यह कथित चोरी कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि नगर निगम प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि रिकॉर्ड रूम से कौन-कौन से दस्तावेज या फाइलें गायब हुई हैं।
अकाउंट्स शाखा पहले भी विवादों में रही
नगर निगम की अकाउंट्स शाखा पहले भी विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रही है। आरोप लगते रहे हैं कि अलग-अलग मदों के धन का अन्य कार्यों में उपयोग, भुगतान संबंधी गड़बड़ियां, एक ही स्वीकृति के आधार पर कई बार भुगतान, अग्रिम भुगतान और ठेकेदारों से जुड़े वित्तीय लेन-देन जैसे मामलों में सवाल उठते रहे हैं। इन सभी मामलों से जुड़े रिकॉर्ड और वाउचर रिकॉर्ड रूम में ही सुरक्षित रखे जाते हैं।
एक अकाउंटेंट का लुधियाना नगर निगम का मोह, साल में तीन-चार बार तबादले के बाद फिर से कर गए वापसी
लुधियाना नगर निगम में तैनात मौजूदा ग्रेड 2- अकाउंटेंट रविंद्र वालिया एक ऐसे अक्सर है जिनका लुधियाना नगर निगम से मोह नहीं छुट रहा। डीसीएफए की कमी के चलते रविंद्र वालिया कई बार लुधियाना नगर निगम में डीसीएफए का चार्ज देखते रहे हैं। इसी कुर्सी का फायदा उठाते हुए उन पर इल्जाम है कि उन्होंने निगम के अकाउंट में आई विभिन्न ग्रांट के फंड को कमीशन के खेल में इधर-उधर घुमा दिया। इनका पिछले एक डेढ साल में करीब 3 से 4 बार तबादला हुआ और वह एक महीने के भीतर दोबारा से लुधियाना नगर निगम में अपनी वापसी करवाने में कामयाब हो गए। इसका एक बड़ा कारण है कि या तो उन्हें किसी अपने बड़े घोटाले का खुलने का डर रहता है या लुधियाना निगम में उनकी मोटी चांदी लगी हुई है, जो उन्हें दोबारा यहां खींच लाती है। बीते कुछ माह पहले भी उनका नाम काऊ सेस के खाते से कमीशन के चक्कर में अपने चेहते ठेकेदारों को पेमेंट कर डाली थी। इतना ही नहीं रविंद्र वालिया चिट फंड को लेकर भी बड़े चर्चा में है। बताया जाता है कि चीट फंड की यह कंपनी उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर खोली और इसमें कई नगर निगम के अफसर, मुलाजिमों और पत्रकारों तक का पैसा इसमें लगवाया और उन्हें हर महीने 4 से 5 फ़ीसदी आमदन का प्रलोभन दिया गया । बताया जाता है कि चार-पांच महीने तक तो यह कमाई इन्वेस्टमेंट करने वालों को आई लेकिन उसके बाद यह कंपनी गायब हो गई इसके बाद अब कई रिटायर्ड एसई और पत्रकार अपनी इन्वेस्टमेंट वापस लेने को चक्कर काट रहे हैं।
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Yashpal Sharma (Editor)