चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा को लेकर पंजाब सरकार को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि, मजीठिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान चेतावनी दी कि, यदि मजीठिया की सुरक्षा व्यवस्था में कोई भी चूक पाई गई, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी एडीजीपी (जेल) और नाभा जेल के अधीक्षक की होगी। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि हिरासत में जेल में बंद किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा केवल एक औपचारिक प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह कानून के शासन का मूल तत्व है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि सुरक्षा में लापरवाही को न केवल प्रशासनिक विफलता माना जाएगा, बल्कि यह हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में भी आ सकती है।
सुरक्षा इंतजामों की नियमित समीक्षा के निर्देश
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए कि, मजीठिया की सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजामों की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें जेल के भीतर या बाहर किसी भी प्रकार का खतरा न हो। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई कि वह इन निर्देशों को गंभीरता से लेगी और भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ेगी।
जेल के भीतर आतंकी खतरे की आशंका
सुनवाई के दौरान मजीठिया के वकील ने हाईकोर्ट को अवगत कराया कि एडीजीपी इंटेलिजेंस की ओर से हाल ही में एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें खुलासा किया गया है कि मजीठिया को जेल के भीतर भी एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन से खतरा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, बब्बर खालसा इंटरनेशनल की ओर से संभावित खतरे की आशंका जताई गई है। वकील ने कहा कि इस नए और ठोस खुफिया इनपुट को देखते हुए मजीठिया की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा और आवश्यक बदलाव किए जाने की जरूरत है।
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Yashpal Sharma (Editor)