लुधियाना। लुधियाना शहर में कूड़ा प्रबंधन के हालात खस्ता है। जिसे लेकर पिछले लंबे समय से न तो निगम ने कोई हल किया और न ही पंजाब प्रदूषण बोर्ड ने इस पर एक्शन लिया। लेकिन अब मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में विचाराधीन है। केस की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) के अफसरों से रिपोर्ट तलब की। पीपीसीबी के अफसरों ने जवाब दायर करने से ठीक पहले नगर निगम लुधियाना 1.54 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोक दिया। पीपीसीबी ने नगर निगम पर दो साल से कूड़ा प्रबंधन करने में बरती गई लापरवाही को लेकर यह जुर्माना लगाया है। निगम की लापरवाही से पर्यावरण को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए निगम से यह राशि वसूल की जाएगी। हालांकि एनजीटी में याचिका दायर करने वाले इंजीनियर कपिल अरोड़ा और कुलदीप खैहरा जुर्माने की राशि से संतुष्ट नहीं हैं। पब्लिक एक्शन कमेटी के सदस्यों इंजीनियर कपिल अरोड़ा और कुलदीप सिंह खैहरा ने शहर में कूड़ा प्रबंधन न होने और कूड़े को आग लगाए जाने के मामले में NGT में याचिका दायर की थी। NGT ने डीसी व निगम कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी तो उससे याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं हुए। उसके बाद NGT ने कोर्ट कमिश्नर को भेजकर रिपोर्ट मांगी। कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद NGT ने पीपीसीबी के अफसरों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी तो अफसरों ने आनन फानन में नगर निगम को जुर्माना लगा दिया। कपिल अरोड़ा ने कहा कि पीपीसीबी ने उस डेट से जुर्माना लगाया है जिस जब कोर्ट कमिश्नर लुधियाना आए थे जबकि यह जुर्माना उस दिन से लगना चाहिए था जब शिकायत दर्ज की गई थी।
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Yashpal Sharma (Editor)