मोहाली में सरकारी जमीन आवंटन में बड़ा खेल: गमाडा ने 7 साल तक पुरानी दरों पर बांटे प्लॉट, सरकार को 400 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
Oct24,2026
| Enews Team | Chandigarh
पंजाब में सरकारी जमीन के आवंटन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। ईडी की जांच के अनुसार, गमाडा ने करीब सात साल तक विस्थापितों को प्लॉट की बढ़ी हुई कीमत के बजाय पुराने रेट पर ही आवंटन किए। इससे पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। जांच में सामने आया कि 2018 में 25 हजार रुपए प्रति वर्ग गज तय की गई दर पर 2025-26 तक भी प्लॉटों के आवंटन पत्र जारी होते रहे, जबकि दर बढ़कर 65 हजार रुपए प्रति वर्ग गज हो चुकी थी। ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के बीच मोहाली की आईटी सिटी में सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में विस्थापितों के कोटे के तहत कुल 441 प्लॉट आवंटित किए गए। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 100 और सेक्टर-66 बीटा के 341 प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा 169 आवेदन अभी लंबित हैं। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस अवधि में जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई, लेकिन विस्थापितों को प्लॉट देने के दौरान नई दरों को लागू नहीं किया गया। इससे सरकारी जमीन के आवंटन में नियमों के पालन और दरें तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। गमाडा ने समय-समय पर प्लॉटों की दरों में बढ़ोतरी की। वर्ष 2018-19 और 2019-20 में दर 25 हजार रुपए प्रति वर्ग गज थी। इसके बाद दरें बढ़ती रहीं, लेकिन विस्थापितों के कोटे में पुराने रेट पर आवंटन पत्र जारी किए जाते रहे।
ईडी की जांच में इसी अंतर को सरकारी खजाने को हुए नुकसान की अहम वजह माना गया है। एजेंसी के अनुसार, यदि बढ़ी हुई दरों पर आवंटन किया जाता तो सरकार को अधिक राजस्व मिल सकता था। इस मामले में करीब 400 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान जताया गया है।
कमेटी की बैठक में दरों पर चर्चा
जांच में जून 2020 में हुई एक कमेटी की बैठक का भी जिक्र है। इस बैठक में गमाडा और पुडा के वरिष्ठ अधिकारियों, एस्टेट ऑफिसर (प्लॉट्स) और कानूनी सलाहकार ने विस्थापितों के कोटे के तहत प्लॉट आवंटित करने की दरों पर चर्चा की थी। इसके बावजूद बाद के वर्षों में आवंटन के दौरान संशोधित दरें लागू नहीं किए जाने का मामला जांच के दायरे में आया है। ईडी की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि गमाडा ने दरें बढ़ने के बावजूद विस्थापितों को पुराने रेट पर प्लॉट क्यों दिए। जून 2020 में कमेटी की बैठक में नई दरों पर चर्चा होने के बाद भी उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया।
Major-Irregularities-In-Government-Land-Allotment-In-Mohali-Gmada-Distributed-Plots-At-Old-Rates-For-7-Years-Causing-A-Loss-Of-Over-400-Crore-To-The-Government