पंजाब। पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर राज्य सरकार के नए अध्यादेश के खिलाफ स्कूल संचालक हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। 'फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब' ने इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई दो जजों की बैंच ने शुरू कर दी है। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब की ओर से वीरवार को एडवोकेट राजीव आत्माराम और बृजेश भोंसला कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 25 जुलाई 2026 से सरकार स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है। स्कूल संचालकों ने कोर्ट से अपील की कि मामले की सुनवाई 25 जुलाई से पहले की जाए। इस पर दो जजों की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया है। स्कूल संचालकों ने 21 जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी याचिका दायर की थी। स्कूल वालों का कहना है कि साल में सिर्फ 5% फीस बढ़ाने की छूट बहुत कम है। इससे टीचरों की सैलरी बढ़ाना, नए कमरे-बेंच बनवाना और स्कूल का खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट में तो 8 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की अनुमति स्कूल मैनेजमेंट को मिली है।
पुराना पैसा वापस करने का नियम
स्कूल संचालकों को सबसे बड़ा एतराजा पुरानी फीस वापस करने पर है। उनका कहना है कि सरकार कह रही है कि जिन्होंने पिछले 3 सालों में 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई है, वे पैसा अभिभावकों को वापस करें या आगे की फीस में काटें। स्कूल वालों का कहना है कि यह पैसा तो पहले ही खर्च हो चुका है, अब इसे वापस लौटाना मुमकिन नहीं है।
हर तरह के चार्ज को फीस मानना
स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार कह रही है कि हर तरह के चार्जेज को फीस माना जाएगा। उनका कहना है कि बस का किराया, कंप्यूटर फीस, खेलकूद और डेवलपमेंट का पैसा भी फीस में जोड़ देने से स्कूलों का कामकाज ठप पड़ जाएगा। स्कूल संचालकों ने कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि सरकार ने थोड़ी सी भी गलती होने पर भारी जुर्माना लगाने और स्कूल की मान्यता रद्द करने की धमकी दी है। जिससे स्कूल मालिक डरे हुए हैं।
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Yashpal Sharma (Editor)