लुधियाना। विधानसभा उत्तरी के भाजपा प्रभारी परवीन बंसल ने लुधियाना के मौजूदा विधायक और मेयर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी नासमझी के कारण शहर के करीब 2000 करोड़ रुपये के विकास कार्य ठप हो गए हैं। यह रोक माननीय हाईकोर्ट के आदेश के बाद लगी है। प्रवीन बंसल ने कहा कि नगर निगम के गठन के समय से ही गलत नीतियों के कारण इस संस्था पर ग्रहण लग गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सीनियर डिप्टी मेयर को छोड़कर चार-चार बार के अनुभवी पार्षदों को दरकिनार कर दिया गया। विधायक ने अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए जानबूझकर नए और अनुभवहीन पार्षदों के हाथों में लुधियाना की बागडोर सौंप दी। इसी कारण मैनचेस्टर ऑफ इंडिया कहे जाने वाला लुधियाना आज अपना मान-सम्मान खो बैठा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम एक्ट 1976 के अनुसार फाइनेंस कमेटी के दो सदस्य पूरा हाउस चुनता है और परंपरा के अनुसार एक सदस्य विपक्ष से भी लिया जाता है। लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर विधायक ने अपने पुत्रों को ही फाइनेंस कमेटी का सदस्य नियुक्त कर दिया।
खुद ही विधायक, खुद कानूनी सलाहकार और खुद ही फाइनेंस कमेटी मेंबर बन बैठे
परवीन बंसल ने कहा कि विधायक खुद ही विधायक है, आप ही कानूनी सलाहकार और आप ही फाइनेंस कमेटी है। कार्यालयों में डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की तस्वीर लगाने वाले आज उनके संविधान का ही मजाक उड़ा रहे हैं। दाल में काला सुना था, अब तो पूरी दाल ही काली हो गई है। कट्टर ईमानदारी का दावा हवा हो गया। अंत में उन्होंने कहा कि नगर निगम अब कारपोरेशन नहीं बल्कि “करप्शन का अड्डा” बनती जा रही है। शहर की बेहतरी के लिए जनता को इनके खिलाफ आवाज बुलंद करनी होगी क्योंकि अच्छे शहर और अच्छे समाज के लिए अच्छे प्रतिनिधियों की जरूरत है।