यशपाल शर्मा, लुधियाना
जहां एक ओर नगर निगम की ओर से इल्लीगल ढंग से भदौड़ हाउस में बने होटलों संबंधी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने से पहले बीते दिनों 17 होटलों के नॉन कंपाउंड हिस्से में पड़ते कमरों को सील कर दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर इसी भदौड़ हाउस में कुछ होटलों की ओर से सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच के अफसर इस पूरे घोटाले को दबाए हुए हैं। असल में भदौड़ हाउस में शॉप कॅम आफिसों (एससीओ) पर खडे़ किए गए होटल की बुनियाद ही बिल्डिंग बॉयलाज की उल्लंघन पर डाली गई हैं। अगर बिल्डिंग बाॅयलाज के नियमों के लिहाज से ये होटल निर्माण पूरी तरह से अवैध है। इस मार्केट में एक होटल की ओर से तो पूरा सरकारी पैसेज पर कब्जा कर इसे अपने होटल का हिस्सा बना दिया गया है, जबकि ये सरकारी पैसेज पब्लिक के इस्तेमाल के लिए खाली छोड़ा जाना चाहिए। ये कारनामा स्थाीनय मार्केट में ही आते नंदा होटल की ओर से अंजाम दिया गया है। बड़ी बात है कि बहुत सालों से पहले इस होटल को इस संबंधी नोटिस भी दिया गया था, लेकिन तब ये पूरा मामला दब कर रह गया था। लेकिन अब इस मामले में नगर निगम ए जोन के एटीपी क्या एक्शन लेते हैं, अब ये बड़ा सवाल है। मौजूदा एटीपी कपिल देव की अगुवाई में ही बीतें दिनों यहां के कुछ होटलों के नॉन कंपाउंड हिस्से में बने कमरों को सील करने की कार्रवाई की गई हैं।
आपको बता दें कि ये मार्केट लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से काटी गई थी और यहां पर एससीओ की अलॉटमेंट ट्रस्ट की ओर से की गई थी। लेकिन करीब चार दशक पहले इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने ये स्कीम नगर निगम को ट्रांसफर कर दी और इसके बाद बिल्डिंग के सभी राइटस निगम को मिलने के बाद यहां पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण कर सरकारी रसीदें काट डाली गई। अब इन्हीं सरकारी रसीदों के जरिए ये होटल मालिक अपने नाजायज हिस्सों में से कुछ हिस्से को कंपाउंड करवाने का दावा करते हैं।
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होटल नंदा ने पैसेज दबाया तो सिटी हार्ट होटल बना डाला कार्मशियल कांप्लेक्स
भदौड़ हाउस में सबसे पुराने होटल के तौर पर पहचान बनाने वाले नंदा होटल की ओर से पच्चीस फुट लंबे और आठ फुट चौडे़ पैसेज को अपने होटल का ही हिस्सा बना लिया गया है। जबकि ये आम पब्लिक के रास्ते के तौर पर इस्तेमाल होना चाहिए। लेकिन मिलीभगत और सेटिंग के चलते ये कब्जा आज तक छुड़ाया नहीं गया। इतना हीं नहीं इसी भदौड़ हाउस का सबसे महंगा व चर्चित होटल जिसे सिटी हार्ट होटल के नाम से जाना जाता था को भी पिछले कुछ सालों में एक कार्मशियल कांपलेक्स (सिटी हार्ट प्लाजा एसी मार्केट) में तबदील कर दिया गया है। इसके लिए भी सेटिंग व मोटी रिश्वत के झोल में सरकारी कागजों में कुछ भी नहीं लाया गया, लेकिन मौके पर से होटल हटा कर इसे कार्मशियल एसी मार्केट में तबदील कर दिया गया। जिसमें दर्जनों दुकानों निकाल कर पब्लिक को सील कर दी गई। अब सवाल खड़ा होता है कि जब यहां पर होटल था तो इसमें दुकानें बनाने की इजाजत नगर निगम से ली गई या नहीं। इतना ही नहीं इस होटल को इल्लीगल ढंग से मार्केट में तबदील करने के बाद इसमें बनाई गई दुकानों की रजिस्ट्री करवा कैसे आगे बेची गई। यानि इस पूरे मामले में भी बडे़ घोटाले को अंजाम दिया गया और लाखों रुपए टैक्स चोरी नगर निगम अफसरों की मिलीभगत से अंजाम दी गई।
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वहीं इस बारे में जब एमटीपी विजय कुमार से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इसकी ग्राउंड रिपोर्ट संबंधित जोन के एटीपी से ली जाएगी और अगर बिल्डिंग बॉयलाज की उल्लंघना पाई जाती है तो इस पर एक्शन लिया जाएगा।
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Yashpal Sharma (Editor)