June 13, 2026 13:01:36

ब्रेकिंग न्यूज - सीटी यूनिवर्सिटी के तीन स्टूडेंट्स को 10 साल कैद, आतंकी गतिविधियों में थे शामिल, एके-47 और एक किलो विस्फोटक मिला था

Jun4,2026 | Enews Team | Punjab

पंजाब। आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) से जुड़े जालंधर की सीटी यूनिवर्सिटी के तीन स्टूडेंट्स  के खिलाफ आतंकी साजिश रचने के मामले में मोहाली स्थित एनआईए अदालत ने दस दस साल कैद की सजा सुनाई है। 1.10 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। दोषी जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट्ट और मोहम्मद इदरीस शाह को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सजा सुनाई गई। इनमें जाहिद गुलजार आतंकी जाकिर मूसा का चचेरा भाई बताया जाता है। एक अन्य आरोपित सुहैल अहमद भट्ट को अदालत ने बरी कर दिया है। यह मामला वर्ष 2018 का है, जब पुलिस को सूचना मिली थी कि जालंधर के एक काॅलेज में पढ़ रहे कुछ कश्मीरी छात्र आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं। 10 अक्टूबर 2018 को हाॅस्टल में छापेमारी कर तीनों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उनके कब्जे से एक एके-47 राइफल, माउजर पिस्तौल, दर्जनों कारतूस और लगभग एक किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। प्रारंभिक जांच में आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से संबंधों के संकेत मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया। एजेंसी ने विस्तृत जांच के दौरान मोबाइल फॉरेंसिक डाटा, काल डिटेल रिकॉर्ड , टेलीग्राम चैट, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए। जांच में सामने आया कि आरोपितों के बीच संपर्क और गतिविधियों का संचालन ऑनलाइन माध्यमों से किया जा रहा था।

62 गवाह हुए पेश

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 62 गवाह पेश किए। इनमें जांच अधिकारी, फाॅरेंसिक विशेषज्ञ, काॅलेज प्रशासन से जुड़े लोग और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल थे। हालांकि, सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपने पुराने बयानों से मुकर गए, लेकिन अदालत ने उपलब्ध वैज्ञानिक और भौतिक साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए तीनों आरोपितों को दोषी ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि तीनों आरोपित प्रतिबंधित आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य थे और हथियारों तथा विस्फोटक सामग्री के जरिए देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। अदालत ने बरामद हथियारों, डिजिटल रिकाॅर्ड और अन्य साक्ष्यों को मामले में महत्वपूर्ण माना। इसी अदालत पर सजा का फैसला सुनाया। 

जाकिर मूसा से रिश्तेदारी बनी चर्चा का विषय

इस मामले में यासिर रफीक भट्ट का नाम मामले में सबसे अधिक चर्चा में रहा। जांच में सामने आया था कि वह अंसार गजवत-उल-हिंद के प्रमुख रहे आतंकी जाकिर मूसा का चचेरा भाई है। उसके मोबाइल फोन से संगठन से जुड़ी सामग्री, हथियारों की तस्वीरें और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए थे। उसके कमरे से लोडेड एके-47 राइफल और कारतूस मिलने का भी दावा किया गया था।

डिजिटल साक्ष्यों ने मजबूत किया मामला

नआईए की जांच में मोबाइल फारेंसिक डाटा, काॅल डिटेल रिकार्ड, टेलीग्राम चैट और ईमेल रिकाॅर्ड अहम भूमिका में रहे। एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपितों की गतिविधियों और आपसी संपर्कों के संबंध में मिले डिजिटल साक्ष्यों ने पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों को अदालत ने दोषसिद्धि के प्रमुख आधारों में शामिल किया।

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