चंडीगढ़। पंजाब में 10 जून को सरकारी बसों के पहिए रुक गए। अपनी लंबित मांगों के चलते पनबस के बाद पंजाब रोडवेज के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी दोपहर 12 बजे से चक्का जाम कर दिया हैं। पनबस कॉन्ट्रैक्ट कर्मी 9 जून से ही हड़ताल पर चले रहे हैं। उन्होंने बसें काउंटरों से हटा ली हैं। इससे सभी 23 जिलों के हजारों लोगों को आज आने-जाने में दिक्कत उठानी पड़ रही है। इस दौरान प्रदेश में इंटरस्टेट रूट समेत एक हजार से ज्यादा रूट प्रभावित हो सकते हैं। अब केवल रेगुलर कर्मी ही सिर्फ पीआरटीसी की बसें चला रहे हैं। मुलाजिमों का कहना है कि बसों के पहिए पूरी तरह से रोक दिए गए हैं। अगर लोगों को दिक्कत आती है, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। हालांकि, सरकार की तरफ से इस संघर्ष को टालने के प्रयास किए जा रहे हैं। बता दें कि प्रदेश में कुल 3 हजार के करीब PRTC और 1600 के करीब पनबस की बसें हैं। इन्हें चलाने के लिए करीब 5500 कॉन्ट्रैक्ट कर्मी और 4500 रेगुलर कर्मी हैं। अगर कॉन्ट्रैक्ट कर्मी पूरी तरह काम बंद करते हैं तो आधे से ज्यादा सरकारी बसें सड़कों पर दिखाई नहीं देंगी।
बसों का बड़ा असर कहां
वैसे तो इस हड़ताल का असर पूरे राज्य में पड़ेगा। क्योंकि इस समय पंजाब में गर्मी का सीजन पीक पर है। स्कूलों में छुट्टियां हैं। ऐसे में अधिकतर परिवार घूमने के लिए निकल रहे हैं। इस वजह से उन्हें प्राइवेट बसों पर निर्भर रहना होगा। दूसरी तरफ कुछ जगह कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट्स को भी मुश्किल उठानी पड़ सकती है। इस समय एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल जाने वाले मरीज भी प्रभावित होंगे। सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर पड़ेगा। क्योंकि वहां बसों के रूट सीमित हैं। जबकि पीजीआई जैसे बड़े संस्थानों में माहिर डॉक्टर दिनों के हिसाब से बैठते है। ऐसे ये बसें वहां लाइफलाइन का काम करती हैं। इसके अलावा महिला वर्ग, जिन्हें फ्री में सफर की सुविधा है, उन्हें भी परेशानी उठानी पड़ेगी।
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Yashpal Sharma (Editor)