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मैरिज पैलेस बना गैंगलैंड- लुधियाना बाय इलेक्शन में सिफारशियो को बांटे गए थे सैकड़ो असला लाइसेंस

Nov30,2025 | Yashpal Sharma | Ludhiana

  यशपाल शर्मा, लुधियाना                                           पक्खोवाल रोड पर बाठ कैसल मैरिज पैलेस में शादी समारोह दौरान दो गुटों के बीच चली ताबड़तोड़ गोलियों के बाद लुधियाना पुलिस सवालों के घेरे में आती दिखाई दे रही है । भले ही लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा इस वारदात को गलियों के लड़कों की लड़ाई की बात कहकर मामले को इतना तूल नहीं दे रहे, लेकिन वहीं दूसरी ओर करीब 3 महीने पहले लुधियाना वेस्ट विधानसभा बाय इलेक्शन दौरान पुलिस कमिश्नर ऑफिस की ओर से बांटे गए असला लाइसेंस भी अब सवालों के घेरे में आता दिखाई दे रहा है। बताया जाता है कि इस दौरान 500 से अधिक असला लाइसेंस राजनेताओं की सिफारिश पर बांटे गए। इन राजनेताओं में काउंसलर से लेकर विधायकों तक का नाम है जिनकी सिफारिश पर ये लाइसेंस जारी कर दिए गए । आपको बता दें कि इन्हीं लाइसेंस के चलते गैंगों का पनपना अहम वजह बनता रहा है। तब इन असला लाइसेंस का बांटने का अहम कारण नाराजगी न लेकर वोट बैंक जुटाना था लेकिन अब ऐसी वारदातें कहीं ना कहीं सरकार, प्रशासन और पुलिस की कारगुजारी पर भी सवाल खड़ा करती है । भले ही पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा की ओर से प्रेस वार्ता दौरान यह कहकर मामले को महत्वता नहीं दी गई कि शादी समारोह में जिनकी और से ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई है वह ना तो बदमाश है और ना ही कोई गैंग का हिस्सा है, बल्कि ये गलियों के लड़कों की आपसी रंजिश है। लेकिन अब सवाल खड़ा यह होता है कि अगर यह गलियों के लड़कों की रंजिश है तो उनके पास इतने बड़े स्तर पर लाइसेंसी या गैर लाइसेंसी हथियार कहां से आए। सूत्र बताते हैं कि इस विवाह समारोह दौरान दोनों गुटों में 50 से अधिक फायर किए गए इसका मतलब यह हुआ कि दोनों ही गुटों के पास 6 से अधिक पिस्टल या रिवाल्वर रहे होंगे, जिनसे ये फायर किए गए। पुलिस कमिश्नर की कारगुजारी पर सवाल इसलिए भी खड़े होते हैं कि अंकुर गैंग के अंकुर और रूबल पर पहले से एक दर्जन से अधिक FIr दर्ज है और इसके बावजूद उनके असला लाइसेंस कैंसिल नहीं किए गए वहीं दूसरी ओर शुभम अग्रवाल मोटा का असला लाइसेंस नहीं बना तो उनके गैंग के पास कौन से हथियार थे जिसे उन्होंने गोलियां चलाई। हालांकि शुभम अग्रवाल पर भी कहीं मामलों में एफआईआर दर्ज है और दोनों ही ग्रुपों पर धारा 307 के तहत कई मामले दर्ज पुलिस कर चुकी है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि कुछ समय पहले कोतवाली थाने के बाहर भी इन दोनों गुटों के बीच गोलियां चली थी और इसमें भी पुलिस की ओर से FIR दर्ज की गई थी। इस वारदात में एक कारोबारी जेके डाबर को भी गोली लगी है और वही अंकुर गैंग की ओर से सरेंडर करने की भी बातें कही जा रही हैं।                                सही असला लाइसेंस बनता नहीं और गैंगस्टर का लाइसेंस 5 दिन में होता है तैयार                                बता दे कि अगर किसी सही और जेनुइन वजह से किसी की ओर से अपना असला लाइसेंस बनवाना हो तो उस पर सबसे पहले मुंशी की ही रिपोर्ट नहीं हो पाती और कई चक्कर लगने के बाद आवेदक लाइसेंस बनाने का ख्याल छोड़ जाता है और वहीं अगर लाइसेंस किसी गैंगस्टर का हो तो पुलिस उसे पर दर्ज मामलों का कोई ब्यौरा तक नहीं जुटती और एजेंट मिलीभगत से  यह लाइसेंस 5 दिन में बनाकर दे दिया जाता है।

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