नई दिल्ली। अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अब अवैध घोषित हो गया है। दरअसल, ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए IEEPA कानून का इस्तेमाल कर अप्रैल 2025 में दुनिया के करीब 100 देशों से पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। कोर्ट के इस फैसले के 3 घंटे के बाद ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दुनियाभर के देशों पर नए कानून (सेक्शन-122) का इस्तेमाल कर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
24 फरवरी से लागू होगा 10% टैरिफ
ट्रम्प ने एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनियाभर के देशों पर 10% का टैरिफ लगा दिया है। यह टैरिफ 24 फरवरी से लागू हो जाएगा। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय यूनियन समेत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले देशों को अब 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यानी कि भारत पर अब टैरिफ 18% की जगह घटकर 10% रह जाएगा। उन्होंने टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा- मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रम्प ने कहा कि, इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं।
सेक्शन 122 के जरिए नया टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प
सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं। इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है। NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा। कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे।
निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ
साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी।
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Yashpal Sharma (Editor)