पंजाब। पंजाब के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रिटायर्ड IAS अफसर वीके जंजुआ पर भ्रष्टाचार का केस चलेगा। 2 लाख रुपए के रिश्वत के मामले में केंद्र सरकार ने उन पर केस चलाने की मंजूरी दे दी है। यह मामला 2009 का है। उस वक्त वह इंडस्ट्री एवं कॉमर्स विभाग के डायरेक्टर कम सेक्रेटरी के पद पर थे। इस दौरान उन्हें रिश्वत लेते पकड़ा गया था। विजिलेंस ने IAS अधिकारी होने की वजह से उनके केस में आगे पैरवी से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में केंद्र से इसको लेकर मंजूरी मांगी गई। मंजूरी के बाद अब इस मामले में अब स्पेशल कोर्ट में सुनवाई होगी। बता दें कि साल 2022 में जब पंजाब के आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार आई तो अनिरुद्ध तिवारी को हटाकर वीके जंजुआ को चीफ सेक्रेटरी बनाया गया था। उस वक्त वह पंजाब के 41वें चीफ सेक्रेटरी बनाए गए थे। जानकारी के अनुसार डिपार्टमेंट ऑफ परसोनल एंड ट्रेनिंग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मुकदमा चलाने की मंजरी दी है। आदेश में कहा गया है कि जांच में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मिले हैं। केंद्र सरकार ने यह मंजूरी पंजाब सरकार की सिफारिश, केंद्रीय सतर्कता आयोग की सलाह और जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दी है। शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी। याचिका में अभियोजन की मंजूरी न देने पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
जंजुआ के खिलाफ ऐसे चला मामला
• 2009 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ।
• 2010 में पंजाब गवर्नर ने प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन दिया, लेकिन 2015 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया, क्योंकि सैंक्शन केंद्र सरकार से होना चाहिए था क्योंकि वे IAS अधिकारी थे।
• 2016 में शिकायतकर्ता (तुलसी राम मिश्रा) ने हाईकोर्ट में अपील की। 2018 में पंजाब सरकार ने केंद्र से सेंक्शन की रिक्वेस्ट वापस ले ली।
• 2023 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि सभी दस्तावेज केंद्र को भेजें, और केंद्र को 3 महीने में फैसला करने को कहा था।
• 2025 में हाईकोर्ट ने देरी के लिए पंजाब सरकार पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और एक महीने में फाइल भेजने का आदेश दिया। ये फाइल 28 नवंबर 2025 को भेजी गई। जिस पर अब फैसला आया।
जंजुआ के खिलाफ क्या था पूरा मामला
यह मामला अकाली-भाजपा सरकार के टाइम 9 नवंबर 2009 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो, मोहाली में दर्ज एफआईआर नंबर 9 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता, लुधियाना निवासी तुलसी राम मिश्रा ने आरोप लगाया था कि उनके प्लॉट के साथ लगती खाली जमीन के आवंटन के लिए 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई। शिकायतकर्ता का कहना था कि वे वर्ष 2001 से जमीन आवंटन के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन हर बार यह कहकर मना कर दिया जाता था कि जमीन उपलब्ध नहीं है। शिकायत की जांच के दौरान विजिलेंस ने ट्रैप की योजना बनाई। 9 नवंबर 2009 को शिकायतकर्ता ने फीनॉलफ्थेलिन पाउडर लगे 2 लाख रुपए आरोपी को दिए। छापेमारी के दौरान जब उनके हाथ धुलवाए गए तो घोल का रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। टीम ने मौके से नकदी, संबंधित फाइलें और गाड़ी की लॉगबुक भी जब्त की थी। अब केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस मामले में अदालत में नियमित सुनवाई शुरू होगी।
हमारा पहला उदेश्य आप तक सबसे पहले और सही खबर पहुंचाना। हमारे आसपास क्या हो रहा है, इसके बारे में आपकी नॉलेज को दुरुस्त करना। वहीं समाज की बुराईयों व गलत गतिविधियों संबंधी आगाह करना भी हमारे लक्ष्य में हैं।
Yashpal Sharma (Editor)