यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर पलविंदर सिंह उर्फ रिंपी अनेजा सुसाइड मामले में 10 दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इस मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में हुए कथित प्लॉट स्कैंडल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2025 में शहीद भगत सिंह नगर स्थित प्लॉट नंबर 35-C की ट्रांसफर में कथित तौर पर बड़ा घोटाला किया गया था। आरोप है कि प्लॉट को अलॉटी और अटॉर्नी होल्डर की मौजूदगी के बिना ही ट्रांसफर कर दिया गया। इतना ही नहीं, प्लॉट का बकाया जमा करवाने में भी नियमों की अनदेखी की गई। इस मामले को लेकर रिंपी अनेजा ने चंडीगढ़ स्थित लोकल गवर्नमेंट ऑफिस और पंजाब सरकार तक शिकायतें भेजी थीं, लेकिन कथित तौर पर मामले को दबा दिया गया।
इस पूरे विवाद में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सुपरिंटेंडेंट एवं एडमिनिस्ट्रेटर ऑफिसर के पीए हरप्रीत सिंह का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल है। सूत्रों के अनुसार हरप्रीत सिंह पिछले करीब 10 दिनों से ड्यूटी से गायब हैं और फिलहाल परिवार सहित फरार बताए जा रहे हैं। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि अभी तक पंजाब सरकार के लोकल गवर्नमेंट विभाग की ओर से उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि प्लॉट ट्रांसफर और बकाया राशि जमा करवाने के मामले में लाखों रुपये के लेनदेन की चर्चा भी सामने आई है, जिसमें सेल ब्रांच के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
मृतक रिंपी अनेजा द्वारा सुसाइड से पहले बनाई गई वीडियो में भी हरप्रीत सिंह का नाम लिया गया था। इसके अलावा एफआईआर में शामिल अन्य आरोपियों को भी हाई-प्रोफाइल कारोबारी और प्रभावशाली लोग बताया जा रहा है।
दुगरी थाना पुलिस ने इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नामजद आरोपियों में राजेश बंसल, विनोद स्याल, हरप्रीत सिंह, पंकज गुप्ता, खुशवंत सिंह, रिश्मजीत सिंह गाबा, अजीत सिंह स्वराज, संजू गोयल, अनिल कुमार, रनवीर कौर गिल और तरुण गोयल शामिल हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद रिंपी अनेजा के परिवार और समर्थकों द्वारा इंसाफ की मांग को लेकर कैंडल मार्च भी निकाला गया था। परिवार ने रिंपी अनेजा का अंतिम संस्कार कर दिया है, लेकिन अब भी न्याय की मांग को लेकर कभी थाने तो कभी पुलिस कमिश्नर कार्यालय के चक्कर काट रहा है।
परिजनों का आरोप है कि मामले में प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण पुलिस कार्रवाई धीमी चल रही है। वहीं, शहर में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
लुधियाना के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर पलविंदर सिंह उर्फ रिंपी अनेजा सुसाइड मामले में 10 दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इस मामले में पुलिस जांच के साथ-साथ लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में हुए कथित प्लॉट स्कैंडल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2025 में शहीद भगत सिंह नगर स्थित प्लॉट नंबर 35-C की ट्रांसफर में कथित तौर पर बड़ा घोटाला किया गया था। आरोप है कि प्लॉट को अलॉटी और अटॉर्नी होल्डर की मौजूदगी के बिना ही ट्रांसफर कर दिया गया। इतना ही नहीं, प्लॉट का बकाया जमा करवाने में भी नियमों की अनदेखी की गई। इस मामले को लेकर रिंपी अनेजा ने चंडीगढ़ स्थित लोकल गवर्नमेंट ऑफिस और पंजाब सरकार तक शिकायतें भेजी थीं, लेकिन कथित तौर पर मामले को दबा दिया गया।
इस पूरे विवाद में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सुपरिंटेंडेंट एवं एडमिनिस्ट्रेटर ऑफिसर के पीए हरप्रीत सिंह का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल है। सूत्रों के अनुसार हरप्रीत सिंह पिछले करीब 10 दिनों से ड्यूटी से गायब हैं और फिलहाल परिवार सहित फरार बताए जा रहे हैं। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि अभी तक पंजाब सरकार के लोकल गवर्नमेंट विभाग की ओर से उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि प्लॉट ट्रांसफर और बकाया राशि जमा करवाने के मामले में लाखों रुपये के लेनदेन की चर्चा भी सामने आई है, जिसमें सेल ब्रांच के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
मृतक रिंपी अनेजा द्वारा सुसाइड से पहले बनाई गई वीडियो में भी हरप्रीत सिंह का नाम लिया गया था। इसके अलावा एफआईआर में शामिल अन्य आरोपियों को भी हाई-प्रोफाइल कारोबारी और प्रभावशाली लोग बताया जा रहा है।
दुगरी थाना पुलिस ने इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नामजद आरोपियों में राजेश बंसल, विनोद स्याल, हरप्रीत सिंह, पंकज गुप्ता, खुशवंत सिंह, रिश्मजीत सिंह गाबा, अजीत सिंह स्वराज, संजू गोयल, अनिल कुमार, रनवीर कौर गिल और तरुण गोयल शामिल हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद रिंपी अनेजा के परिवार और समर्थकों द्वारा इंसाफ की मांग को लेकर कैंडल मार्च भी निकाला गया था। परिवार ने रिंपी अनेजा का अंतिम संस्कार कर दिया है, लेकिन अब भी न्याय की मांग को लेकर कभी थाने तो कभी पुलिस कमिश्नर कार्यालय के चक्कर काट रहा है।
परिजनों का आरोप है कि मामले में प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण पुलिस कार्रवाई धीमी चल रही है। वहीं, शहर में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
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Yashpal Sharma (Editor)