पंजाब में अकाली और भाजपा गठबंधन की घोषणा अगले महीने:सीट शेयरिंग पर सुखबीर की भाजपा चुनाव इंचार्ज से मीटिंग; अध्यक्ष नवीन ने भी फीडबैक लिया
Aug28,2026
| Enews Team | Punjab
पंजाब। पंजाब चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल में गठबंधन तय हो गया है। अगले महीने यानी सितंबर में इसका ऐलान हो सकता है। फिलहाल सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा चल रही है। भाजपा इस बार अकाली दल से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जिसको लेकर सीट शेयरिंग फाइनल होनी बाकी है। भाजपा से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक इस गठबंधन को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्वॉल्व हैं। गठबंधन को लेकर हो रही हलचल के बारे में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ-साथ PM मोदी को भी अपडेट दिए जा रहे हैं। इसी बीच अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने भाजपा के पंजाब चुनाव इंचार्ज केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच गठबंधन के रोडमैप पर चर्चा की।
BJP के केंद्रीय नेृतत्व की भी मीटिंग हुई
इससे पहले भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी पंजाब को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। जिसमें पंजाब के संगठन प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया भी शामिल हुए। इस दौरान संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पंजाब दौरे की रिपोर्ट भी उनके सामने रखी। किसान आंदोलन के दौरान करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन टूटने के बाद अब दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फिर साथ आने की तैयारी में हैं।
PM पाटिल और बिट्टू से मुलाकात कर चुके
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सीआर पाटिल और रवनीत बिट्टू के साथ पंजाब को लेकर बैठक की थी। पीएम से मीटिंग के बाद सुखबीर बादल के साथ सीआर पाटिल ने बैठक की। इससे साफ है कि सीआर पाटिल ने सुखबीर बादल को पीएम मोदी की प्लानिंग से अवगत करा दिया है। पंजाब में गठबंधन को लेकर पूरा रोडमैप हाईकमान के स्तर पर तैयार किया जा रहा है।
सुखबीर बादल फॉर्मूले पर राजी
अकाली दल और भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला भी तय हो गया है। भाजपा इस बार बड़े भाई की भूमिका में रहेगी यह भी तय हो गया है। कौन किस सीट पर लड़ेगा अब इस बात को लेकर दोनों दलों में मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर बादल भी सीट बंटवारे के फॉर्मूले को लेकर राजी हो गए हैं। जल्दी ही सीआर पाटिल और सुखबीर बादल की एक और बैठक हो सकती है।
दोनों की एक सोच, अलग लड़ने से वोट विरोधियों को मिल रहे
राज्य में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के मुकाबले खुद को मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने के लिए दोनों दलों को एक-दूसरे के कैडर और वोट बैंक के तालमेल की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद दोनों पार्टियों को यह महसूस हुआ है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने पर उनका वोट बंट जाता है। इसका फायदा दूसरे विरोधी दलों को मिलता है। यही वजह है कि अब दोनों पार्टियां दोबारा साथ आने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम कर रही हैं।
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