यशपाल शर्मा, लुधियाना
31 मार्च से पहले नगर निगम की रिकवरी पिछले साल के मुकाबले न पिछडे़ इसके लिए नगर निगम कमिश्नर नीरु कत्याल गुप्ता खुद बिल्डिंग ब्रांच के अफसरों की मीटिंगें लेती दिखी और उनमें रिकवरी का दबाव बनाए रखी। लेकिन वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष के नेता ही निगम के सरकारी खजाने में डाका मारने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे और इसी का नतीजा है कि शहर में रिहायशी व कार्मशियल नक्शा पास करवाए बिना इल्लीगल कंस्ट्रक्शनें की जा रही हैं। ऐसा ही अब कुछ मामला आर्य कॉलेज फॉर बॉयज की बैक साइड में न्यू दीपनगर में बन रही कार्मशियल बिल्डिंग निर्माण में सामने आया है। जहां पर एक मकान को गिरकर इसमें कमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण धड़ल्ले से पिछले दो महीनें से जारी है। मिली जानकारी मुताबिक मौके पर अब तक दो मंजिलें डाली जा चुकी है और अगले सप्ताह न कंपाउंड होने वाली तीसरी मंजिल भी इस पर खड़ी कर दी जाएगी। बताया जाता है कि जोन डी से एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर की ओर से उक्त बिल्डिंग की सीएलयू फीस व अन्य खर्च सहित 6 लाख रुपए जमा करवाने के लिए बिल्डिंग मालिक को कहा गया था। जहां पहले उक्त बिल्डिंग मालिक चंडीगढ़ से किसी नेता का मोबाइल करवा रहा था और अब इसी विधानसभा के एक नेता ने उक्त बिल्डिंग की सिफारिश नगर निगम अफसरों को करनी शुरु कर दी है। इसका नतीजा है कि निगम की ओर से रुकवाए इस काम की सरकारी फीस लिए बिना मौके पर भी से बंद करवाए काम को शुरू कर दिया गया है। आपको बता दें कि नगर निगम से बिल्डिंग ब्रांच से इस बिल्डिंग का कोई लेआउट प्लान मंजूर करवाए बिना दो का लेंटर डाला जा चुका है और अब तीसरी मंजिल का लेंटर डालने की तैयारी है।
निगम के खजाने को लग रहा छह लाख का चूना
आपको बता दें की नई दीपनगर में जो यह कमर्शियल बिल्डिंग इलीगल ढंग से तैयार करवाई जा रही है, इसमें नगर निगम को करीब 6 लाख रुपए से अधिक का चूना लगाया जा रहा है । नए सरकारी रेट मुताबिक कोई भी कमर्शियल बिल्डिंग तैयार करने को प्रति ग़ज़ ₹3850 के करीब सीएलयू चार्ज अदा करने होते हैं और इसलिए दो मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग निर्माण में करीब ₹6 लाख तक की सरकारी फीस नगर निगम को अदा करनी पड़ती है और वहीं अगर अब इस बिल्डिंग पर तीसरा लेंटर भी डाल दिया जाता है तो ये हिस्सा नॉन कंपाउंड ऐबल कहा जाएगा, जिसकी फीस निगम नहीं ले सकता और नियमों के लिहाज से इस हिस्से को गिराना बनता है। लेकिन सिफारिश और राजनीतिक दबाव के कारण सीधे-सीधे नगर निगम के सरकारी खजाने को चूना लगाते हुए इलीगल बिल्डिंग में खड़ी की जा रही है।
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Yashpal Sharma (Editor)