पंजाब। फरीदकोट में सोमवार को घर में घुसकर एक महिला की गला रेतकर हत्या कर दी गई। वारदात के समय महिला घर में अकेली थी। घटना का खुलासा उस समय हुआ जब उसका पति स्कूल से ड्यूटी कर घर लौटा और उसके खटखटाने पर दरवाजा नहीं खुला। जब पति ने अपनी भाभी को आवाज लगाकर दरवाजा खुलवाया तो बेडरूम में पलंग के पास पड़ी पत्नी की लहूलुहान लाश देखी। शव के निचले हिस्से पर कोई कपड़ा भी नहीं था। इसके बाद उसने पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। DSP का कहना है कि फिलहाल हत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। मृतका की पहचान नीतू कालड़ा (43) के रूप में हुई है, जो शहर के बीचोबीच स्थित मोहल्ला जानिया में रहती थीं। बताया जा रहा है कि नीतू दिव्यांग थीं। उनके पति प्रदीप कालड़ा सरकारी टीचर हैं। मृतका के पति प्रदीप कालड़ा ने पुलिस को बताया है कि वह आज करीब सवा 2 बजे स्कूल से आए। उन्होंने आते ही दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने आवाज भी लगाई। फिर भी अंदर से कोई आवाज नहीं आई।
पड़ोसियों से स्कूटर खड़ा करवाया
प्रदीप ने बताया- वह (नीतू) रोजाना आवाज सुनते ही बाहर आती थी और मेरा स्कूल का सामान पकड़ती थी, लेकिन आज आवाज सुनकर बाहर नहीं आई। मैंने पड़ोसियों को कहा कि मेरा स्कूटर खड़ा कर दो तो उन्होंने मेरा स्कूटर खड़ा कर दिया। मृतका के पति बताते हैं- इसके बाद मैंने पड़ोस में रहने वाली अपनी भाभी को आवाज मारी। भाभी ने आवाज सुनी और वह बाहर आईं। उन्होंने कहा कि मैं अदर जाकर देखती हूं। जब भाभी अंदर गईं तो उन्हें खून के निशान मिले। इस पर भाभी दौड़कर वापस मेरे पास आईं और कहा कि अंदर चल।
लाश पर नीचे कोई कपड़ा नहीं था
प्रदीप कालड़ा ने कहा- इसके बाद मैं अंदर गया। वहां पत्नी खून से लथपथ पड़ी थी। उसके गले और हाथों पर तेजधार हथियार के गहरे घाव थे। शव के निचले हिस्से पर कोई कपड़ा भी नहीं था। मैंने उसके ऊपर कपड़ा डाला और पुलिस को सूचना दी। प्रदीप ने बताया- उस समय मैं और दोनों बच्चे स्कूल में थे। मैं स्कूल में टीचर हूं। पत्नी हाउस वाइफ थी। पत्नी मेरी तरह हैंडीकैप थी। मेरी किसी के साथ कोई रंजिश नहीं है। अगर कोई मुझे कहे तो मैं हाथ जोड़ देता हूं। मुझे किसी से कुछ लेना-देना नहीं है। चोर भी आए होंगे तो चोरी करने के लिए भी घर में कुछ नहीं था।
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Yashpal Sharma (Editor)