लुधियाना। पिछले एक साल से जालंधर बाइपास स्थित दाना मंडी का पार्किट और यूजर चार्ज का ठेका विवादों में रहा। कभी ठेकेदार पर ओवरचार्जिंग के आरोप लगे तो कभी मार्किट कमेटी पर मिलीभगत के आरोप लगे। मगर ना तो कभी ठेकेदार ने जनता की तरफ़ ध्यान दिया और ना ही कमेटी अधिकारियों ने उनकी सार ली। लेकिन अब दोनों पक्षों में विवाद हुआ तो एक दूसरे के कच्चे चिट्ठे खोलने शुरू कर दिए। इस दौरान जब अपने ऊपर बात आयी तो मार्किट कमेटी ने ओवरचार्जिंग से परेशान लोग भी ढूंढ़ लिए और उनकी शिकायत लेकर जाँच कर ठेकेदार पर एक्शन भी ले डाला। यहाँ तक के उसे 15 लाख का जुर्माना भी कर दिया। वही दूसरी तरफ़ पहले तो कभी ठेकेदार राजू ने कुछ बोला नहीं। मगर अब आरोप लगा रहे है की वह ओवरचार्जिंग अफसरों के कहने पर करते थे। जिसके लिए कमेटी सेक्रेट्री हरिंदर सिंह गिल को हर महीने रिश्वत भी जाती थी। अब यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा की मंडी बोर्ड मामले में क्या एक्शन लेती है।
मार्किट कमेटी पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
लोगों नें चर्चा है की पहले मार्किट कमेटी और ठेकेदार राजू की आपसी मिलीभगत थी। इसी के चलते कभी भी अफसरों की और से लोगों को प्रेशानी आने पर भी एक्शन नहीं लिया। लेकिन अब अफसरों पर बात आयी तो अब अपने बचाव के लिए ठेकेदार पर करवाही भी हो गई। या यू कह लें की अब जाकर अफसरों को पता चला के ठेकेदार द्वारा अवैध वसूली की जा रही थी। पहले ठेकेदार के कारिंदों द्वारा मल्टीपल एंट्री के चार्ज लिए जाते थे, जो कि गैरकानूनी थे। इसके अलावे वाहन चालकों और आढ़तियों व रेहड़ी फड़ी वालों द्वारा ओवरचार्जिंग के आरोप लगाए गए। कई बार विवाद हुआ और कई शिकायतें मार्किट कमेटी के पास पहुंची। आए दिन मारपीट हुई। लेकिन तब कमेटी ने कोई एक्शन लेने की जरुरत नहीं समझी। तब न तो अधिकारियों को ठेके में कुछ गलत लगा और न ही उन्होंने जनता का दर्द समझने की कोशिश की। तब अधिकारी मामले में संज्ञान लेकर एक्शन लेते तो भी ठेका कैंसिल हो जाता। मगर अधिकारी तब क्यों चुप थे, वह चर्चा का विषय है।
सेक्रेटरी लेता था हर महीने तीन लाख रिश्वत
वहीं ठेकेदार राजू का कहना है कि उनकी तरफ से पहले 2023-24 को ठेका लिया। तब सेक्रेटरी हरविंदर सिंह गिल ने उनसे 8 लाख प्रति महीना रिश्वत मांगी। इसकी शिकायत बोर्ड सचिव को की तो आरोप सही पाए जाने पर सेक्रेटरी का तबादला हो गया। अब फिर उन्हें 2025 को ठेका मिला। सितंबर 2025 में सेक्रेटरी गिल का तबादला फिर कमेटी में हो गया। राजू का आरोप है कि सेक्रेटरी ने रंजिश के चलते जबरन रेहड़ियां कब्जे में लेनी शुरु कर दी। फिर उसने तीन लाख रुपए प्रति महीना रिश्वत लेनी शुरु की। अब नए ठेके के टेंडर में मिंकी ट्रेडर्ज नामक फर्म ने भी टेंडर डाला। शर्तें पूरे न करने के बावजूद सेक्रेटरी ने गलत तरीके से उसे ठेका देने की कोशिश की, उन्होंने विरोध जताया तो 15 लाख रिश्वत की मांग की। पैसे न देने पर टैक्निकल बिड के कुछ समय बाद ही फाइनेंशियल बिड खोलकर मिकी ट्रेडर्ज को ठेका दे दिया।
खुद पर बात आई तो सेक्रेटरी को याद आया एक्शन
खुद पर गाज गिरती देख मार्किट कमेटी द्वारा इतनी तेजी से एक्शन लिया गया कि उसे देख सभी हैरान हैं। दरअसल, 31 मार्च 2026 को ठेकेदार राजू का ठेका खत्म हुया और मंडी बोर्ड द्वारा टेंडर लगाया गया है। इस दौरान गलत तरीके से दूसरी कंपनी मिकी ट्रेडर्ज को ठेका अलॉट करने का आरोप लगा ठेकेदार राजू हाईकोर्ट पहुंचे और अदालत ने 28 अप्रैल तक ठेका पहले की तरह चलने देने के ऑर्डर दिए। ठेकेदार राजू ने सेक्रेटरी हरिंदर सिंह गिल पर 15 लाख रिश्वत मांगने के आरोप लगाए। सेक्रेटरी ने खुद पर गाज गिरती देख ओवरचार्जिंग के आरोप लगाने की शिकायत ली और उस पर जांच कर आरोप सही पाए जाने पर ठेकेदार को 15 लाख जुर्माना लगाया। जुर्माना होते ही ठेकेदार राजू ने कमेटी को ईमेल भेजकर 11 अप्रैल से ठेका छोड़ दिया और शनिवार को ही प्रैस कांफ्रेस कर अफसरों पर संगीन आरोप लगा डाले।
शर्तों मुताबिक लगाया जुर्माना
वहीं मार्किट कमेटी के सेक्रेटरी हरिंदर सिंह गिल का कहना है कि ठेकेदार राजू द्वारा झूठे व बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। ठेका देना पंजाब मंडी बोर्ड के हाथ में होता है। उन्हें आढ़ती एसोसिएशन की ओवरचार्जिंग की शिकायतें मिली थी। उन शिकायतों के आधार पर रेहड़ी फड़ी वालों के बयान लेकर जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए। डीएनआईटी की शर्तों के मुताबिक जुर्माना लगा है।
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Yashpal Sharma (Editor)