यशपाल शर्मा, लुधियाना
झूला कारोबारी वरिंदर कपूर की बाथ कैसल मैरिज पैलेस में शादी दौरान ताबड़तोड़ चली गोलीकांड में कारोबारी जे के डाबर की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। बताया जाता है कि सत्ताधारी पार्टी के कुछ एक नेता जे के डाबर को बचाने की कोशिश में जुटे हुए है, लेकिन यह गोली कांड इतना राजनीतिक रंगत ले चुका है कि अब पुलिस कमिश्नर को भी इस मामले में फूंक फूंक के कदम रखने पड़ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि शादी दौरान ताबड़तोड़ किए गए फायर में जे के डाबर की भी पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था। सूत्र बताते हैं कि शुभम मोटा को तो वरिंदर कपूर की ओर से शादी में इनवाइट किया गया था लेकिन वही अंकुर को शादी का निमंत्रण नहीं था। वह कारोबारी जेके डाबर के साथ इस शादी में शामिल हुआ था । बताया जाता है कि अंकुर के साथ उसके दो-तीन साथी भी जेके डाबर के साथ ही इस शादी में पहुंचे थे । शादी में जब अंकुर और शुभम मोटा का आमना-सामना हुआ तो दोनों में खूब एक दूसरे को घूरने का खेल चला। जिसके चलते अंकुर ने भांप लिया कि शुभम मोटा और उसके साथी हथियारों से लैस है और ऐसे मौके में उसका कोई नुकसान ना हो जाए। सूत्र बताते हैं कि यह बात अंकुर की ओर से जेके डाबर को भी कही गई जिसके चलते डाबर ने परवाह न करने की बात कहते हुए अपनी पिस्तौल अंकुर को दे दी। सूत्र बताते हैं कि जब अंकुर को माहौल बिगड़ दिखा तो उसकी ओर से अपने कुछ और साथियों को फोन कर शादी में बुला लिया गया। जैसे ही उसके साथी शादी में पहुंचे तो अंकुर ने पहले हवाई फायर जेके डाबर की ही पिस्टल से किया जब दूसरी ओर से गोलियां चली तो बताया जाता है कि जे के डाबर की ही पिस्टल से फायर किए गए। बताया जाता है कि कुछ राजनेता लुधियाना के पुलिस कमिश्नर के पास भी जे के डाबर को इस FIR से बाहर निकालने की कोशिश में है और जब कि उनको पुलिस कमिश्नर ने कोरा जवाब भी दे दिया गया है। वहीं इस शादी के दुल्हे राजा वरिंदर कपूर भी फरार बताए जा रहे हैं और उनकी ओर से भी अपने बचाव को कई अफसर व नेताओं से पुलिस के आला अफसर को सिफारिशी फोन भी करवाए जा रहे हैं । दूसरी ओर शुभम मोटा भी पुलिस एनकाउंटर के डर से जयपुर फरार होने की भी बातें निकलकर सामने आ रही हैं हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक बाथ कैसल के संचालकों का नाम FIR में दर्ज करने की बजाय मौके पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स पर करवाई कर बीच बचाव की बातें भी निकाल कर सामने आ रही है । पुलिस कमिश्नर के लिए भी अब यह पूरा मामला बेहद संघीन बनता दिखाई दे रहा है क्योंकि उनकी ओर से इन दोनों गुटों को गलियों के यूथ की लड़ाई कहकर मीडिया को सफाई दी गई थी। लेकिन अब यह पूरा मामला राजनीतिक रंगत लेता दिखाई दे रहा है । इसका बड़ा कारण है कि शुभम और अंकुर पर पहले से एक दर्जन से अधिक पुलिस केस दर्ज है जिनमें कुछ मामले धारा 307 के तहत दर्ज किए गए हैं। ऐसे में इतने बड़े दो गैंग की लड़ाई और इस लड़ाई में दो लोगों की मौत ने इस मामले को बेहद पेचीदा बना दिया है।
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Yashpal Sharma (Editor)