February 14, 2026 20:09:04

यूनिट को जैडएलड़ी करना इंडस्ट्री की आने वाले समय में बनेगी मजबूरी और पीपीसीबी सैंपलिंग जांच में लाए पारदर्शिता- - संजीव अरोड़ा

पर्यावरण संरक्षण और व्यापार करने में आसानी साथ-साथ आगे बढ़ेंगे: रीना गुप्ता

जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने पर ज़ोर

Jan28,2026 | Yashpal Sharma | Ludhiana

यशपाल शर्मा, लुधियाना


पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी), लुधियाना द्वारा मंगलवार को हयात रीजेंसी, लुधियाना में लुधियाना के औद्योगिक समुदाय के साथ “शेपिंग ए ग्रीनर टुमॉरो” शीर्षक से एक पर्यावरण संवाद का आयोजन किया गया। इस पर्यावरण संवाद में उद्योग, वाणिज्य एवं निवेश प्रोत्साहन, स्थानीय निकाय एवं बिजली मंत्री पंजाब श्री संजीव अरोड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने की। इस अवसर पर पीपीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. लवनीत कुमार दूबे भी उपस्थित रहे। मीटिंग में इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा ने कहा कि आने वाले समय में यूनिट को जैडएलड़ी करना मजबूरी बनेगी, क्यों कि बॉयर्स पॉल्यूटिड इंडस्ट्री से माल खरीदेगा ही नहीं। उन्होंने कहा कि बायर्स केवल इंडस्ट्री से माल खरीदेगा, जो इंडस्ट्री इंवायरमेंट फ्रैंडली होगी। इस दौरान संजीव अरोड़ा ने अपने जापान दौरे के दौरान वहां की इंडस्ट्री की इंवायरमेंट फ्रैंडली खूबियां भी इंडस्ट्री से शेयर की। इस मीटिंग में संजीव अरोड़ा बखूबी रोल निभाते दिखे, जहां इस दौरान वे इंडस्ट्री में सुधार की बड़ी जरुरत पर जोर देते दिखे तो वहीं पीपीसीबी अफसरों की मनमानी को किस ढंग से सुधारा जाए, इसके लिए भी इंडस्ट्री के साथ खडे़ दिखाई दिए। इस दौरान अरोड़ा ने पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता की वर्किंग को भी खूब सराहा। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि रीना गुप्ता जो आपके लिए कर रही, वो कोई नहीं कर सकता।

पीपीसीबी से संबंधित इंडस्ट्री के कुछ अहम इश्यू थे, जिन पर संजीव अरोड़ा ने गंभीर चर्चा करते हुए इनके सोल्यूशन भी ढूंढने की कोशिश की। इंडस्ट्री से लिए जाने वाले पानी के सैंपलों की पीपीसीबी जांच के अलावा किसी अन्य लैब में भी इसकी इंडस्ट्री सैंपलिंग करवा सके, इस पर भी जोर देते दिखे। पीपीसीबी अफसरों का कहना था कि वे जांच दौरान पानी की सैपलिंग को दो हिस्सों में बांट कर इसकी जांच सरकारी पीबीटीआई लैब से करवा सकते हैं, ताकि सैपलिंग जांच में पारदर्शिता आ सके। जबकि इंडस्ट्री इस दौरान एनएबीएल लैब या किसी प्राइवेट लैब से सैंपल की जांच हो सके, इस पर भी जोर देती दिखाई दी। इस दौरान पीपीसीबी के मैंबर सेक्रेटरी लवनीत कुमार दुबे ने कहा कि किस तरह से सैंपलिंग जांच में पारर्दिशता लाई जा सके, इसके लिए जल्द हल ढूंढने का आश्वासन भी उनकी ओर से दिया गया।


जब आरओ का भी सैंपल हो गया फेल- अरोड़ा

इस मीटिंग दौरान पीपीसीबी सैंपल जांच की इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा भी एक उदाहरण के जरिए पाेल खाेलते दिखाई दिए। उन्हें इंडस्ट्री का नाम लिए बिना कहा कि उनके किसी जानकार के एक बार पीपीसीबी की सैंपल जांच टीम आई। उक्त कारोबारी ने मौके पर पीपीसीबी के अफसरों को बातों में लगा आरओ के सैंपल उन्हें भरवा दिए, लेकिन बड़ी बात है कि जांच में ये आरओ के सैंपल भी फेल हो गए। अपने संबोधन में अरोड़ा ने कारोबारियों की ओर से  शो काज नोटिसों पर उठाए गए सवाल पर कारोबारियों का पक्ष रखते कहा कि पीपीसीबी की ओर से जारी होने वाले शो काज नोटिस को इंडस्ट्री बेहद बडे़ सख्त बताती हैं और इन नोटिस से उन्हें ऐसा लगता है कि शायद उनका यूनिट बंद होने वाला है। इस नोटिस की लैंग्वेज बड़ी सख्त रहती है।   



मिलनी में  आईआईटी मद्रास के इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लीन वाटर के विशेषज्ञों ने ताज़े पानी के संसाधनों की कमी के गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला और औद्योगिक जल प्रबंधन के लिए उन्नत तकनीकों के साथ-साथ सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि किस प्रकार सतत प्रथाओं को अपनाने से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है और व्यावसायिक संभावनाओं में सुधार हो सकता है। बुड्ढा दरिया के पुनर्जीवन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति के बारे में बात करते हुए उद्योग, वाणिज्य एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री संजीव अरोड़ा ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए गठित कैबिनेट समिति का नेतृत्व करने वाले एक सुविधाकर्ता और नियामक के रूप में अपनी दोहरी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा,“पंजाब सरकार औद्योगिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ध्यान उद्योगों को समयबद्ध अनुमतियाँ और मजबूत बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करते हुए स्वच्छ ईंधन और तकनीकों को अपनाने के लिए सक्षम बनाना है। समर्पित औद्योगिक एवं विशेष औद्योगिक पार्कों तथा पूर्व-अनुमोदित नियामक ढांचे के माध्यम से हम ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहे हैं, जहाँ व्यापार करने में आसानी और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।”


पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान और स्वच्छ एवं सतत औद्योगिक प्रथाओं की ओर संक्रमण के लिए नियामक प्राधिकरणों और उद्योगों द्वारा सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए पीपीसीबी की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा,

“इस तरह के संवाद पर्यावरण और विकास को सामंजस्यपूर्ण और पूरक ढंग से एक साथ कार्य करने में सक्षम बनाते हैं। पीपीसीबी भविष्य में भी पंजाब भर के अन्य औद्योगिक समुदायों के साथ ऐसे संवाद आयोजित करता रहेगा।”


उद्योग प्रतिनिधियों ने इंटरैक्टिव सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया और स्वच्छ तकनीकों को अपनाने, नियामक सुविधा तथा वैश्विक बाज़ारों में बढ़ी प्रतिस्पर्धात्मकता के माध्यम से प्राप्त अपने अनुभव और लाभ साझा किए। उद्यमियों ने पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन में आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा की और पीपीसीबी तथा राज्य सरकार से व्यापार करने में आसानी के लिए और उपायों की मांग की। प्रमुख मांगों में एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को मान्यता देना, जल-प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए वर्षा जल संचयन की अनुमति, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं के सत्यापन हेतु अतिरिक्त विशेषज्ञ एजेंसियों — विशेष रूप से इस्पात उद्योग के लिए — को पैनल में शामिल करना तथा सीईटीपी से जुड़े रंगाई इकाइयों के विस्तार पर लगी पाबंदियों को हटाना शामिल था।


औद्योगिक संघों ने इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग के लिए एसओपी जारी करने, लुधियाना के उद्योगों को पीएनजी आपूर्ति की सुविधा तथा सहमति शुल्क संरचना को युक्तिसंगत बनाने की अपील की। इस पर चेयरपर्सन ने आश्वासन दिया कि पीपीसीबी, सीपीसीबी, एनजीटी तथा एमओईएफ एंड सीसी द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इन मांगों की समीक्षा करेगा।


रीना गुप्ता ने ज़ोर दिया कि पर्यावरण प्रबंधन केवल प्रदूषित जल और उत्सर्जन मानकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संसाधन दक्षता, अपशिष्ट उपयोग और स्रोत-स्तरीय नियंत्रणों के माध्यम से सतत विकास को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पीपीसीबी द्वारा नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, स्व-अनुपालन को प्रोत्साहित करने और कानूनी पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने में उद्योगों की सहायता हेतु की गई पहलों को रेखांकित किया।


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