फर्जी रिफंड घोटाले में इंकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से बडे़ स्तर पर छापामारी का दौर जारी है।यह कार्रवाई प्रिंसिपल डायरेक्टर आशीष अबरोल के निर्देशन में इनकम टैक्स विभाग (इन्वेस्टीगेशन विंग) जालंधर के एडिशनल डायरेक्टर धर्मेंद्र पूनिया और डिप्टी डायरेक्टर शिविन गोयल की अगुवाई में को पंजाब, जम्मू, दिल्ली और उत्तर प्रदेश स्थित विभिन्न ठिकानों पर ये छापामारी जारी है। ये एक्शन उन प्रमुख व्यक्तियों के खिलाफ किया जा रहा है, जो कथित रूप से फर्जी रिफंड प्राप्त करने के लिए आयकर रिटर्न दाखिल कर रहे थे। आयकर विभाग की टीमें इन ठिकानों पर मौजूद दस्तावेज़ों, डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य उपकरणों की गहन जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग ने टैक्स चोरी के बड़े मामलों का खुलासा किया है, जिसमें करदाताओं द्वारा फर्जी छूट और कटौतियों का दावा किया गया था।
फर्जी रिफंड घोटाले का तरीका:
जांच में सामने आया है कि ये धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति करदाताओं के आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए अलग-अलग ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों का उपयोग कर रहे थे। वे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 और 80 के तहत भारी कटौतियों और छूटों का दावा करके फर्जी रिफंड प्राप्त कर रहे थे, जबकि इसके समर्थन में कोई वैध दस्तावेज या प्रमाण उपलब्ध नहीं था।
दो दिनों तक चली इस व्यापक छापेमारी में आरोपियों के घरों की तलाशी ली गई। पता चला है कि ये लोग रिफंड की राशि का पांच से दस प्रतिशत तक कमीशन वसूलते थे, जिसे बैंकिंग चैनल या नकद के माध्यम से प्राप्त किया जाता था। अधिकांश मामलों में, पूरी कटौती टीडीएस पर आधारित थी, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा था। जांच के दौरान ऐसे फर्जी आयकर रिटर्न की संख्या एक लाख से अधिक पाई गई है और यह संख्या अभी भी बढ़ रही है।आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर अनुपालन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी सख्ती जारी रहेगी, ताकि सरकारी खजाने को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो और ईमानदार करदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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Yashpal Sharma (Editor)