मोहाली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमालयन मार्ग प्लॉट नंबर-18 पर मंगलवार को सेक्टर-17 स्थित पंजाब उद्योग भवन में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) के मुख्यालय समेत 12 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। दिल्ली इकाई की तीन सदस्यीय टीम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के साथ सुबह करीब 10 बजे उद्योग भवन पहुंची और देर शाम 4:30 बजे तक रिकॉर्ड की जांच करती रही। सूत्रों के अनुसार ईडी ने इस दौरान विभिन्न कार्यालयों से 22 फाइलें और कई अहम सरकारी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। वरिष्ठ अधिकारियों और लेखा शाखा के कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई पंजाब सरकार के पूर्व उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तथा कारोबारी संजीव अरोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले और पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) में औद्योगिक प्लॉटों के कथित फर्जी आवंटन की जांच के सिलसिले में की गई।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
जांच एजेंसी कथित तौर पर सरकारी जीरो पीरियड नीति के दुरुपयोग और औद्योगिक भूखंडों के आवंटन में हुई अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही है। सूत्रों के अनुसार पीएसआईईसी के मुख्यालय और कार्यकारी निदेशक (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर) के कार्यालय सहित कुल 12 परिसरों की तलाशी ली गई। जांच के दायरे में कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी और कथित बेनामी भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि ईडी ने जिन दस्तावेजों को जब्त किया है, उनका मिलान पहले से जुटाए गए रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन से किया जाएगा।
एफआईआर के आधार पर शुरु हुई जांच
ईडी की जांच की शुरुआत मोहाली विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 8 मार्च 2024 को दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। एफआईआर में पीएसआईईसी के कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों पर कथित रूप से मिलीभगत कर रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर महंगे औद्योगिक प्लॉट आवंटित करने का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया में फर्जी कंपनियों और काल्पनिक पतों का इस्तेमाल किया गया, जबकि अधिकारियों ने कथित रूप से इन अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।
जीरो पीरियड के जरिए किया गया खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में प्लॉटों का कब्जा निर्धारित समय पर नहीं दिया गया। साइट पर मलबा और हाई टेंशन बिजली लाइनों का हवाला देकर वर्षों तक कब्जा टाल दिया गया। इस अवधि को जीरो पीरियड मानते हुए आवंटन की प्रभावी तिथि आगे बढ़ा दी गई, जिससे आवंटियों को बिना ब्याज के भुगतान की सुविधा मिलती रही। बाद में इन प्लॉटों को बाजार मूल्य पर दूसरे खरीदारों को बेच दिया गया, जबकि पीएसआईईसी के रिकॉर्ड में उनका हस्तांतरण मूल आवंटन मूल्य पर दिखाया गया। सूत्रों का दावा है कि बाजार मूल्य और रिकॉर्ड में दर्ज कीमत के अंतर की राशि नकद में वसूली गई, जिससे कथित रूप से अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई। ईडी की जांच में मोहाली फोकल प्वाइंट स्थित सीपी-01 औद्योगिक प्लॉट भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि मैसर्स आइकॉनिक स्पेस क्रिएटर को लाभ पहुंचाने के लिए नीलामी की शर्तों में बदलाव किया गया था।