यशपाल शर्मा, लुधियाना
नगर निगम कमिश्नर डॉक्टर नीरू कत्याल गुप्ता की ओर से भले ही चारों जोन की बिल्डिंग ब्रांच में पक्के एटीपी तैनात कर दिए गए हैं, लेकिन इल्लीगल बिल्डिंगें बनवा कर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले कुछ मुलाजिम अभी भी कार्रवाई के दायरे से बाहर दिखाई दे रहे है। नगर निगम कमिश्नर की ओर से जारी बिल्डिंग ब्रांच संबंधित आदेशों में नगर निगम जोन ए में बतौर झोलाछाप एटीपी ड्यूटी करने वाले गुरविंदर सिंह लक्की को बिल्डिंग ब्रांच के किसी भी जोन में जगह नहीं दी गई है, लेकिन यह मुलाजिम शुक्रवार को भी बिल्डिंग इंस्पेक्टर लगने को पूरे हाथ पैर मारता दिखाई दिया। लक्की के खिलाफ लगातार आ रही शिकायतों के चलते ही नगर निगम कमिश्नर की ओर से उन्हें बिल्डिंग ब्रांच में किए गए बड़े स्तर के तबादलों में कहीं भी जगह नहीं दी। जबकि भी अभी विधायक की सिफारिश कर दोबारा से बिल्डिंग ब्रांच में एंट्री की पूरी कोशिश में है।
हाउस लेन के साथ-साथ रोड वाइंडिंग भी निगल गई बहुमंजिला इल्लीगल इमारतें
बात करें नगर निगम ए जोन की तो इसमें आते ब्लॉक 32 एक ऐसा ब्लॉक है, जहां पर मोटी रिश्वत के चक्कर में बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां उड़ा दी गई। यहां पर रिश्वत के खेल में हाउस लेन के साथ-साथ रोड वाइंडिंग भी बहु मंजिला इलीगल इमारत के निर्माण में निग़ल डाली गई। कई 20 फुट की गलियों में तो 5 से 6 मंजिला बिल्डिंगे तक अवैध ढंग से खड़ी करवा दी गई। किसी भी इंडस्ट्रियल इमारत के निर्माण में जहां 10 से 15 फुट हाउस लेने एरिया छोड़ना जरूरी तो होता ही है, तो वहीं दूसरी ओर सड़क की चौड़ाई भी कम से कम 40 फुट होनी अनिवार्य है। अगर मौके पर सड़क 20 फुट की है तो वहां पर दोनों साइड के प्रॉपर्टी मालिकों को अपने प्लॉट का 10-10 फुट हिस्सा छोड़कर अपनी बिल्डिंग बनानी होती है ताकि सड़क की चौड़ाई 40 फुट हो सके। लेकिन यहां पर पिछले 6 महीने में बनी 200 से अधिक इल्लीगल बिल्डिंगों में ना तो बिल्डिंग लेआउट प्लान पास करवाया गया और बिल्डिंग नियमों का पालन किया गया। इस इलीगल निर्माण में जहां तत्कालीन एटीपी की गुरविंदर सिंह लकी और महिला बिल्डिंग इंस्पेक्टर कशिश की अहम भूमिका रही। गुरविंदर सिंह लकी को बिल्डिंग ब्रांच से बाहर कर दिया गया है लेकिन महिला बिल्डिंग इंस्पेक्टर कशिश अभी भी नगर निगम जोन ए तैनात है। बताया जाता है कि बिल्डिंग इंस्पेक्टर कशिश ने भी इस पूरे घोटाले से बचने को आजकल इलीगल बिल्डिंग की कंपाउंडिंग करने पर जोर दिया हुआ है। यह वही बिल्डिंग है जिन्हें पहले आशीर्वाद देकर बनवाया गया और अब इसे रिकवरी कर अपनी खाल बचाने की कोशिश की जा रही है।
जोन सी में भी झोलाछाप एटीपी रुखसत, बिल्डिंग इंस्पेक्टर कार्रवाई से बेखौफ
वहीं दूसरी ओर नगर निगम जोन सी में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला जहां पर नवनीत सिंह खोखर जो की नियमों से तो बिल्डिंग इंस्पेक्टर है लेकिन विधायक की सिफारिश के चलते उन्हें जोन सी का एटीपी का सीडीसी चार्ज दे दिया गया था। सजा के तौर पर उन्हें भी लुधियाना से रुखसत करते हुए अब अबोहर नगर निगम में बिल्डिंग इंस्पेक्टर का चार्ज दे दिया गया, लेकिन ऐसे विवादित मुलाजिम को केवल लुधियाना से बदल देना ही ना काफी दिखाई देता है। नगर निगम कमिश्नर से लेकर चंडीगढ़ बैठे आल्हा अधिकारियों को के पास नवनीत सिंह खोखर की ओर से इलीगल बिल्डिंग को आशीर्वाद देने की शिकायतें पहुंच रही थी। इसके बाद इंटरनल इंक्वारी में सामने आया कि बहुत सी कमर्शियल बिल्डिंगों को रिहायशी नक्शे पर बनवा दिया गया और कहीं बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री को भी बिना नक्शा प्लान के बनवा डाला गया। इतना ही नहीं जोन सी में धड़ल्ले से इलीगल कालोनियां भी काटने में कोई गुरेज नहीं किया गया। यहां भी रिश्वत के खेल में हाउस लेन के साथ-साथ रोड वाइंडिंग भी बहु मंजिला इलीगल इमारत के निर्माण में निग़ल डाली गई । ऐसे में केवल नवनीत खोखर का लुधियाना से तबादला होना ही काफी नहीं है, उनके खिलाफ सरकारी खजाने को चूना लगाने के मामले में ऑफिशियल इंक्वारी के साथ-साथ अन्य सख्त कार्रवाई होनी अनिवार्य है ताकि कोई दूसरा बिल्डिंग इंस्पेक्टर और एटीपी इलीगल बिल्डिंग बनवाने की हिम्मत ना कर सके। जोन सी में खोखर के इस पूरे अभियान में उनके साथ देने में सबसे आगे बिल्डिंग इंस्पेक्टर कमल धीर रहे। कमल धीर को लेकर रिश्वत मांगने जैसे आरोपों वाली वीडियो भी वायरल हुई थी। जिसे खुद पूर्व नगर निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल की ओर से बिल्डिंग ब्रांच के व्हाट्सएप ग्रुप पर डाला था। बताया जाता है कि इस समय कमल धीर इलाका विधायक राजिंदर पाल कौर छीना के नजदीकियों में है। यही कारण है कि वह इस समय इलीगल कॉलोनी को बनवाने तक में कोई परवाह नहीं कर रहे। लुधियाना में नगर निगम जोन सी एक ऐसा जोन है, जहां पर पिछले 1 साल में सबसे अधिक इलीगल कालोनियां काटने की शिकायतें निगम के पास पहुंची है।
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Yashpal Sharma (Editor)