यशपाल शर्मा, लुधियाना। लुधियाना हलका वेस्ट के उपचुनाव में के सोमवार नतीजे सामने आने के बाद एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा पैदा कर दी है। बात करें भाजपा की तो भाजपा की लोकल लीडरशिप की और से लोकल और पुराना पार्टी वर्कर उम्मीदवार बनने का दावा पेश किया गया था। जिसके चलते जीवन गुप्ता को बतौर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा गया। लेकिन जीवन गुप्ता बीजेपी के लिए जीरो साबित हुए। इस चुनाव से हल्का वेस्ट में बीजेपी का ग्राफ तो गिरा ही है साथ में जीवन गुप्ता का क़द भी गिर गया है। वही दूसरी तरफ़ आप के संजीव अरोड़ा के लिए यह चुनाव काफ़ी अहम थे। उनकी और से चुनाव में हासिल की रिकॉर्ड तोड़ जीत के साथ ख़ुद को हीरो साबित किया है। वही बात करें भाजपा की तो भाजपा की लोकल लीडरशिप की और से बाहर से भाजपा में आए लीडरों को टिकट देने का विरोध किया जा रहा था। जिसमे राशि अग्रवाल समैत कई अहम चेहरे शामिल थे। हालाकि इन लीडरों की पब्लिक में अलग पहचान थी। लेकिन लोकल पार्टी लीडरो द्वारा लंबे समय से पार्टी की सेवा करने वालो को आगे आने का मौक़ा देने की बात कही गई थी। जिसके चलते करीब 25 सालों से पार्टी में शामिल जीवन गुप्ता को टिकट मिली थी। लेकिन लोकल लीडरशिप की डिमांड पूरी तरह फेल साबित हुई। वहीं अगर बात करें हल्का वेस्ट के पिछले विधानसभा चुनाव की तो तब भाजपा के उम्मीदवार एडवोकेट बिक्रम सिंह सिद्धू को करीब 28000 वोट मिले थे। लेकिन इस बार जीवन गुप्ता को मेहज़ 20323 वोट मिले। यानी की क़रीब आठ हज़ार वोट मार्जन और कम हो गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है की जीवन गुप्ता को इस बार तो बीजेपी कैडर की भी वोट पूरी नहीं पड़ सकी।
बीजेपी लीडरों के बड़े दावे, सभी निकले फेल
बीजेपी की लोकल लीडरशिप द्वारा बड़े बड़े दावे किया जा रहे थे की हल्का वेस्ट में उनकी काफ़ी भारी संख्या में वोट है। लीडरो का दावा था की उनकी सिर्फ़ बीजेपी कैडर की ही 22-23000 वोट है। लेकिन नतीजे सामने आने के बाद पता चला की उन्हें इतनी वोट भी नहीं पड़ सकी। जबकि हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता और राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू समेत कई लीडरों ने यहाँ आकर प्रचार किया। यहाँ तक के गुजरात के पूर्व सीएम स्वर्गीय विजय रूपानी ने भी प्रचार किया था। लेकिन फिर भी बीजेपी अपना वोट बैंक भी हासिल नहीं कर सकी। जबकि लोकसभा चुनाव में लुधियाना से बीजेपी को पड़ी रिकॉर्ड तोड़ वोट के बाद पार्टी लीडरो को घमंड था की उनके इस बार भी लोगो द्वारा जमकर वोट किया जाएगा। लेकिन लोगों ने उनका यह घमंड भी तोड़ दिया है।
भाजपा लीडरों के इलेक्शन नतीजे पलटने के दावे भी हुए फेल
भाजपा के लोकल लीडरों द्वारा इस बार चुनावी नतीजे पलटने के दावे किया जा रहे थे। सूत्रों के अनुसार जीवन गुप्ता को चुनाव में उतारने के पीछे एक अहम कारण यह भी था कि लीडरों को लगता था कि जीवन गुप्ता को बानियाँ बारादरी की वोट भी पड़ेगी। लेकिन जीवन गुप्ता को बानियाँ बारादरी की वोट भी नहीं पड़ी और ना ही जीवन गुप्ता को अपनी पर्सनल वोट पड़ सकी।हालाकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है की जीवन गुप्ता को अगर 20000 वोट पड़े है तो वह भी सिर्फ बीजेपी के नाम पर ही पड़े है। जो लोग बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद करते है उन्होंने ही यह वोट डाली है। वही चर्चा यह भी है कि अगर यही एडवोकेट बिक्रम सिद्धू को टिकट दी जाती तो वह बेहतर टक्कर दे सकते थे।
आशु का ग्राफ लगातार गिरा
वही बात करें कांग्रेस के भारत भूषण आशु की तो उनका ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। जहाँ निगम चुनाव में उनकी पत्नी ममता आशु और भाई नरेंद्र काला को हार देखनी पड़ी थी। जबकी विधानसभा 2022 की बात करें तो आशु को 32931 वोट मिलें थे। जबकी इस बार वह मार्जन भी कम हो गया और आशु को 24542 वोट मिले। जिसे देख पता चलता है की आशु का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। जो की एह चिंता का विषय है। वही कांग्रेस लीडर सनी भल्ला का वार्ड 69 एक ऐसा वार्ड था, जहाँ पर कांग्रेस और बीजेपी में टक्कर थी। जहाँ आप का होल्ड ही नहीं था। लेकिन वहाँ पर सनी भल्ला तो कांग्रेस को अपनी तरफ़ से वोट दिला पाए लेकिन बीजेपी का प्रदर्शन जीरो रहा। नतीजों से पता चलता है की बीजेपी वहाँ पर अपना होल्ड गवा चुकी है।
संजीव अरोड़ा ने तोड़ी बीजेपी और अकाली दल की वोट
वही बता दे की आप के संजीव अरोड़ा इस चुनाव नें क़रीब 10637 वोट मार्जन से आगे थे। राजनीतिक ग्राफ़ देखे तो आप ने बीजेपी और अकाली दल की वोट तोड़ी है। क्युकी विधानसभा 2022 में जहाँ अकाली दल के महेशइन्द्र सिंह ग्रेवाल को 10072 वोट मिले थे। वही इस बार परोपकार सिंह घुम्मन इससे भी नीचे 8000 तक पहुँच गए। हालाकि जब 2022 चुनाव में स्वर्गीय गुरप्रीत गोगी ने जीत हासिल की थी तो तब आप की पंजाब में अंधेरी थी। लेकिन इस बार भी कोई लहर ना होने के बावजूद लोगों द्वारा संजीव अरोड़ा पर भरोसा रखते हुए जीत दिलाई है। हल्का वेस्ट के लोगों द्वारा संजीव अरोड़ा की जीत हासिल करवाकर डेढ़ साल दिया है। अब देखना होगा की संजीव अरोड़ा द्वारा इस समय में लोगों के कैसे कम करवाए जाएँगे। हालाकि संजीव अरोड़ा को जीत हासिल करने के बाद पंजाब कैबिनेट का पद मिलना तह माना जा रहा है। लेकिन यह भी कयास लगाये जा रहे की एक हिंदू चेहरा होने के चलते संजीव अरोड़ा को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। क्यूंकि संजीव अरोड़ा एक हिंदू चेहरा है और देखना होगा की क्या पार्टी उन्हें डिप्टी सीएम बनाती है या नहीं।
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Yashpal Sharma (Editor)