नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच अप्रैल में शुरू हुई बातचीत के दौरान अमेरिका को डर था कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। इसी वजह से अमेरिका ने मिडिल-ईस्ट के कुछ सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भिजवाया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को डर था कि अगर दोनों वार्ताकारों की हत्या हुई तो युद्धविराम और शांति प्रक्रिया टूट जाएगी। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली एक बैठक से पहले भी ईरान को हमले का खतरा था। इसी कारण पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को फाइटर जेट की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। लौटते समय भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई और डेलिगेशन सड़क के जरिए तेहरान पहुंचा।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख खामेनेई के अंतिम संस्कार में पहुंचे
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं। वह ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। तेहरान पहुंचने पर ईरान के रक्षा मंत्री माजिद इब्न रजा और गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी ने उनका स्वागत किया। इसके अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।
ईरान बोला- समझौता टूटा तो फिर जवाबी कार्रवाई होगी
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजराइल युद्ध खत्म करने से जुड़े अंतरिम समझौते का पालन नहीं करते, तो ईरान फिर से जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान की ISNA न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका सैन्य ताकत के दम पर ईरान का मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि युद्ध में अमेरिका और इजराइल अपने किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सके।
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Yashpal Sharma (Editor)