अमृतसर। बेअदबी कानून की विवादित धाराओं में संशोधन के लिए पंजाब सरकार को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दी गई एक महीने की समय-सीमा 28 जुलाई को पूरी हो गई है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे पर श्री अकाल तख्त साहिब से दोबारा कोई संपर्क न साधने पर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सरकार की इस चुप्पी को "शासकों का अहंकार" करार देते हुए कहा कि यह रवैया सिख भावनाओं के प्रति सरकार की गंभीरता की कमी को साफ उजागर करता है।
मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने स्पष्ट किया कि सिख कौम के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सर्वोच्च महत्ता, गुरु की गोलक और सिखी के मूल सिद्धांत सर्वोपरि हैं। इन पवित्र सिद्धांतों को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी कानूनी व्यवस्था को सिख पंथ कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गुरु की गोलक, सिख संस्थाओं और सिखी के सिद्धांतों को चुनौती देने वाले "गुरु-द्रोही और पंथ विरोधी" तत्वों को सिख कौम कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि वह सिख भावनाओं का सम्मान करते हुए बेअदबी कानून की विवादित धाराओं में तुरंत संशोधन करे और श्री अकाल तख्त साहिब से संपर्क कर इस मसले का समाधान निकाले।
अकाल तख्त साहिब किसी सरकार के प्रभाव में नहीं: एडवोकेट धामी
• मार्च के धर्मकोट (मोगा) स्थित गुरुद्वारा पातशाही पहली डेरा कार सेवा से गुरुद्वारा तख्तूपुरा साहिब के लिए रवाना होने से पूर्व शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी विचार व्यक्त किए। एडवोकेट धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख कौम की सर्वोच्च संस्था है, जो किसी सरकार या समय के दबाव में काम नहीं करती।
• उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कुछ पंथ विरोधी ताकतें श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि कमेटी की गरिमा को ठेस पहुँचाने और पंथक एकता को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस मीरी-पीरी खालसा मार्च का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को गुरु साहिब के पावन संदेश से जोड़ना और पंथक एकता को मजबूत करना है।
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Yashpal Sharma (Editor)