यशपाल शर्मा, लुधियाना
पंजाब की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माने जाने वाले कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उनसे दूरी बनाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पहले पंजाब सरकार की ओर से उनके विभागों का बंटवारा अन्य मंत्रियों में कर दिया गया और अब उनके विधानसभा क्षेत्र लुधियाना वेस्ट में लगे बड़े-बड़े प्रचार बोर्ड और होर्डिंग भी हटाए जाने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
लोगों का कहना है कि कुछ ही सप्ताह पहले तक लुधियाना वेस्ट में संजीव अरोड़ा के यूनिपोल और प्रचार होर्डिंग्स की भरमार थी, लेकिन ED की कार्रवाई के तुरंत बाद उनका अचानक गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। लुधियाना वेस्ट से हटने लगे अरोड़ा के प्रचार बोर्ड जानकारी के अनुसार, लुधियाना वेस्ट इलाके में लगे कई प्रचार बोर्ड हटाए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि यह विज्ञापन कंपनी “लीफबैरी” उनके करीबी कारोबारी पार्टनर हेमंत सूद से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां पहले इलाके में हर तरफ संजीव अरोड़ा के फोटो वाले बोर्ड दिखाई देते थे, वहीं अब उनकी जगह पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के सरकारी विज्ञापन और योजनाओं के होर्डिंग लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि “पब्लिक इमेज मैनेजमेंट” की रणनीति भी हो सकती है। विभाग छिनने के बाद बढ़ी चर्चाएं ईडी की गिरफ्तारी के अगले ही दिन पंजाब सरकार द्वारा संजीव अरोड़ा के विभाग अन्य मंत्रियों में बांट दिए गए थे। इसी के बाद से यह चर्चा और तेज हो गई कि सरकार अब अपने ही मंत्री से सार्वजनिक दूरी बनाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल संजीव अरोड़ा सात दिन की ईडी रिमांड पूरी होने के बाद जेल में हैं। हालांकि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर चल रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भावुक वीडियो, पेशी के दौरान परिवार से गले लगकर रोते दिखे संजीव अरोड़ा
दो दिन पहले गुरुग्राम कोर्ट में पेशी के दौरान संजीव अरोड़ा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में वह अपनी बेटी और परिवार के अन्य सदस्यों से गले मिलते हुए भावुक नजर आए। यह वीडियो पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और गुरुग्राम में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों ने इसे एक “भावनात्मक और मानवीय पल” बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक दबाव और परिस्थितियों से जोड़कर देखा। पब्लिक में उठ रहे
राजनीतिक सवाल आम लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि एक बड़े कारोबारी घराने से राजनीति में आए संजीव अरोड़ा का महज एक साल का मंत्री पद का सफर आखिर इतनी बड़ी कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में कैसे बदल गया। कई लोग इसे राजनीतिक रणनीति और अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरा मामला फिलहाल जांच के दायरे में है, लेकिन सोशल मीडिया और पब्लिक चर्चाओं में कहीं न कहीं सहानुभूति का माहौल भी देखने को मिल रहा है।
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Yashpal Sharma (Editor)