यशपाल शर्मा, लुधियाना
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता Bikram Singh Majithia ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दावा किया है कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच अब PSPCL और GMADA से आगे बढ़कर पंजाब RERA तक पहुंच चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब RERA में पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान बड़े स्तर पर कथित भ्रष्टाचार हुआ और अब केंद्रीय एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
मजीठिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में दिल्ली से एक सेवानिवृत्त अधिकारी को लाकर RERA का प्रमुख नियुक्त किया गया था। इसके बाद पीआर विभाग से जुड़े एक IAS अधिकारी को भी RERA प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई, जो अब रिटायर हो चुका है। अकाली नेता का आरोप है कि इन अधिकारियों ने कथित तौर पर दिल्ली के नेताओं के साथ मिलकर अवैध और अयोग्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरियां और लाइसेंस दिलवाए।
उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि एक पूर्व अधिकारी द्वारा कथित तौर पर रखी गई “हिसाब-किताब की डायरी” का भी अब हिसाब होने का समय आ गया है। मजीठिया के अनुसार, RERA कमेटी द्वारा जिन प्रोजेक्ट्स पर पहले आपत्ति जताई गई थी या जिन्हें रद्द कर दिया गया था, उन्हें बाद में “बैक डोर” तरीके से दोबारा विचार कर मंजूरी दी गई।
अकाली नेता ने आरोप लगाया कि पंजाब RERA पिछले कुछ वर्षों में कथित भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया, जहां रद्द किए गए लाइसेंस दोबारा जारी कर कारोबारियों को भारी फायदा पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि नियमों को दरकिनार कर रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े पैमाने पर मुनाफाखोरी की गई और कथित तौर पर अवैध परियोजनाओं को लाइसेंस देकर बाद में ऊंची कीमतों पर बेचा गया।
मजीठिया ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे नेटवर्क में चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक बड़े पैमाने पर काले धन का लेन-देन हुआ। उन्होंने कहा कि जमीन, लाइसेंस और रियल एस्टेट से जुड़ा यह कथित भ्रष्टाचार अब केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर है।
हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक Bhagwant Mann सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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Yashpal Sharma (Editor)