नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में सेकेंड फेज की 142 सीटों पर वोटिंग खत्म हो गई है। चुनाव आयोग के शाम 7 बजे तक के आकड़ों के मुताबिक, 91.79 प्रतिशत वोटिंग हुई है। यह और बढ़ सकता है। वोटिंग के दौरान कई जगहों पर हिंसा, झड़प, लाठीचार्ज और ईवीएम से छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आईं। नॉर्थ 24 परगना के अरविंद रैली में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प हुई। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर मुक्के, लाठियों से हमले किए। भारी संख्या में सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद हालात बेकाबू दिखे। टीएमसी ने आरोप लगाया कि सीआरपीएफ के हमले से हावड़ा के उदयनारायणपुर में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि बुजुर्ग अपने बेटे के साथ वोट डालने गए थे। केंद्रीय बलों ने उन्हें धक्का दिया और मारपीट की। बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। आज जिन 142 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनमें से 123 सीटों पर टीएमसी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। पहले फेज की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93 प्रतिशत मतदान हुआ था। 4 मई को बंगाल विधानसभा की सभी 254 सीटों के रिजल्ट आएंगे।
ईवीएम में बीजेपी के बटन पर टेप लगाया
भाजपा ने आरोप लगाया कि डायमंड हार्बर के फालता में ईवीएम में बीजेपी का बटन टेप लगाकर ब्लॉक किया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि जहां भी शिकायतें सही मिलीं, वहां दोबारा चुनाव होंगे। पानीहाटी में ईवीएम पर बीजेपी के बटन पर इंक का दाग होने की शिकायत सामने आई। उसे सैनिटाइजर से साफ किया गया।
सुवेंदु के खिलाफ 'गो बैक' और ‘चोर-चोर’ के नारे: भवानीपुर में ममता के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी को घेरकर टीएमसी समर्थकों ने चोर-चोर के नारे लगाए। सुवेंदु एक पोलिंग बूथ का इंस्पेक्शन करने पहुंचे थे। सुवेंदु जब कालीघाट में ममता के आवास से करीब 100 मीटर दूर सड़क से गुजर रहे थे, तब लोगों ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए। सुवेंदु ने भी जवाब में जय श्री राम के नारे लगाए।
हावड़ा में वोट डालने आए बुजुर्ग की मौत: हावड़ा के उदयनारायणपुर में वोट डालने आए एक बुजुर्ग की मौत हो गई। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि बुजुर्ग अपने बेटे के साथ वोट डालने गए थे। केंद्रीय बलों ने उन्हें धक्का दिया और मारपीट की। बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
हावड़ा में वोटरों पर लाठीचार्ज: हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र के लिलुआ में बूथ नंबर 151, 152 और 153 पर केंद्रीय बलों ने वोटरों पर लाठीचार्ज किया। आरोप है कि ईवीएम मशीनों में खराबी के कारण वोटर लंबे समय तक लाइन में खड़े थे। बाद में उन्होंने हंगामा किया तो उनपर लाठीचार्ज हुआ।
सुरक्षाबलों और वोटरों के बीच धक्का-मुक्की: साउथ 24 परगना के कैनिंग में टीएमसी उम्मीदवार परेश राम दास ने आरोप लगाया कि एक बूथ पर पोलिंग एजेंट को सीआरपीएफ कर्मियों ने पीटा और बूथ से बाहर घसीट दिया। बूथ से आई तस्वीरों में महिलाएं सहित कई लोग सुरक्षाबलों से धक्का-मुक्की करते दिखे।
बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजहें…
1. SIR का असर: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे कुल वोटरों की संख्या घटी। लेकिन दिलचस्प यह है कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर मतदान करीब 80 प्रतिशत और 2021 विधानसभा चुनाव में 82.17 प्रतिशत रहा था। यानी मतदाता कम हुए, पर वोट डालने वालों की संख्या लगभग उतनी ही या उससे ज्यादा रही, जिससे प्रतिशत अपने आप बढ़ गया।
2. एंटी इनकंबेंसी और ध्रुवीकरण: राज्य में पिछले 15 साल से टीएमसी की सरकार है। ऐसे में नेताओं के खिलाफ नाराजगी, रोजगार, भ्रष्टाचार और घुसपैठियों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे मतदाताओं को ज्यादा संख्या में बाहर लाए। वहीं, मुस्लिम बहुल और सीमावर्ती इलाकों में SIR और NRC के डर ने भी मतदान को प्रभावित किया। दूसरी तरफ, तेज ध्रुवीकरण के चलते हिंदू वोटरों की भागीदारी भी बढ़ी मानी जा रही है।
3. प्रवासी कामगारों की वापसी: इस बार बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर सिर्फ वोट डालने के लिए दूसरे राज्यों से बंगाल लौटे। उन्हें लगा कि अगर इस बार मतदान नहीं किया, तो उनका अधिकार छिन सकता है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेनों में भर-भरकर लोगों को वोटिंग के लिए ला रही है, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में रहा।
4. निर्वाचन आयोग की सख्ती: चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती ने माहौल बदला। सुरक्षा बढ़ने से मतदाताओं में भरोसा आया और उन्होंने बिना डर के मतदान किया, जिसका असर सीधे वोटिंग प्रतिशत पर दिखा।
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Yashpal Sharma (Editor)