यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना से दो बार सांसद रहे रवनीत सिंह बिट्टू का बतौर मिनिस्टर ऑफ स्टेट का हनीमून पीरियड अगले महीने 21 जून को खत्म होने जा रहा है, इस कार्यकाल के खत्म होने के बाद वे आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर होने वाले दंगल की तैयारी में लुधियाना में जुट सकते हैं। लुधियाना में वे आखिर किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, इसको लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि रवनीत सिंह बिट्टू लुधियाना सेंट्रल या लुधियाना नार्थ विधानसभा से विधायक टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि रवनीत सिंह बिट्टू की लुधियाना वापसी में आखिर भाजपा के किस हल्का इंचार्ज की टिकट कटेगी। लुधियाना नार्थ से भाजपा के सीनियर नेता प्रवीण बंसल तीन बार लगातार चुनाव लड़ते आ रहे हैं और वही गुरुदेव शर्मा देवी लुधियाना सेंट्रल से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन इन दोनों ही नेता अभी तक जीत स्वाद नहीं चख सके है। इस बार भी यह दोनों ही नेता दोबारा से अपनी अपनी विधानसभा में चुनाव लड़ने के लिए तैयारी में जुटे हुए हैं। हालांकि चर्चा ये अधिक है कि बिट्टू लुधियाना सेंट्रल से भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं । इसका बड़ा कारण यह भी है कि लुधियाना सेंट्रल से सतपाल गोसाईं दो बार विधायक का चुनाव जीते थे लेकिन उनके जाने के बाद जब से गुरुदेव शर्मा देबी को भाजपा की कमान मिली, वे लगातार दो बार यह चुनाव जीतने में फैल रहे।
रवनीत बिट्टू बतौर स्टेट ऑफ़ मिनिस्टर नहीं कुछ ला पाए लुधियाना के लिये
बात करें पिछले करीब चार सालों के रवनीत सिंह बिट्टू के बतौर मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट जिसके तहत उन्हें रेल मंत्रालय और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय का जिम्मा था, में रहकर वे लुधियाना के लिए कुछ अधिक नहीं कर पाए। भले ही उनके कार्यकाल में पंजाब में वंदे भारत ट्रेन चलाई गई, लेकिन यह उनकी उपलब्धियां में शुमार नहीं है, क्योंकि वंदे भारत को देश के कई मुख्य राज्यों से जोड़ने की प्लानिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी। इतना ही नहीं रवनीत सिंह बिट्टू के पास फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय का भी अहम जिम्म था लेकिन इसके तहत भी वह पंजाब में कोई बड़ा प्रोजेक्ट केंद्र से नहीं ला पाए। हैरानी इस बात की है कि उनके पास भले ही जिम्मा रेल मंत्रालय का था, लेकिन वह लुधियाना में मुल्लापुर एयरपोर्ट शुरू होने में अपनी पीठ थपथपाते दिखाई दिए हैं।
डेवलपमेंट प्रोजेक्ट नहीं बयान बाजी से खुद को रख रहे हैं पंजाब में जिंदा
बात करें रवनीत सिंह बिट्टू के पंजाब में पिछले 4 साल के कार्यकाल की तो वह पंजाबी या खासकर लुधियाना के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट केंद्र से नहीं ला पाए और केवल बयान बाजी के जरिए ही वे पंजाब की राजनीति में लगातार एक्टिव रहे हैं। लुधियाना वासियों के साथ-साथ भाजपा के वर्करों में भी इस बात को लेकर बड़ा विरोध है कि रवनीत सिंह बिट्टू उनका मोबाइल तक नहीं उठाते है। पिछले 4 साल से वे केंद्र में थे और लुधियाना के भाजपा नेताओं और वर्करों को यह उम्मीद थी कि केंद्र से संबंधित उनके काम रवनीत सिंह बिट्टू के रहते निकल पाएंगे लेकिन यह भी संभव नहीं हो पाया।
----- भाग्य के धनी रहे हैं रवनीत सिंह बिट्टू
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू के पास अपने दादा की ऐसी राजनैतिक धरोहर है, जिसके बलबूते ही लुधियाना एमपी चुनाव भाजपा की टिकट से हार गए लेकिन फिर भी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री का पद दिया गया। इतना ही नहीं भले ही लोगों की जुबान पर रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर विरोधी सुर बरसते रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे कांग्रेस की टिकट पर 2 बार लोकसभा चुनाव जीते और वहीं भाजपा की टिकट पर लड़े गए लोकसभा चुनाव में भी वह लुधियाना की शहरी सीटों पर रिकॉर्ड तोड़ वोट से अपने प्रतिद्वंदियों से आगे रहे।
लुधियाना नार्थ से भाजपा के कई नेता विधायक बनने की दौड़ में
लुधियाना नॉर्थ विधानसभा इस बार एक ऐसी विधानसभा है जहां से भाजपा के कई नेता चुनाव जीतकर विधायक बनने की दौड़ में है। इसका बड़ा कारण है कि प्रवीण बंसल इस विधानसभा सीट से तीन बार चुनाव हार चुके हैं और इसी संभावना के बीच में उनकी टिकट काटने की भी बातें चर्चा में है। जबकि विधायक बनने की दौड़ में इस बार यहां से सीनियर प्रदेश नेता अनिल सरीन, राशि अग्रवाल, भाजपा के जिला महामंत्री नरेंद्र मल्ली, रोहित सिक्का, सुमन वर्मा के नाम शामिल है।
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Yashpal Sharma (Editor)