यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना में प्रॉपर्टी डीलर पलविंदर सिंह उर्फ रिंपी अनेजा सुसाइड़ मामले के तार लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में एक प्लॉट स्कैंडल से भी जुडे़ बताए जा रहे हैं। बताया जाता है कि बीते अगस्त महीने यानि अगस्त 2025 में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में शहीद भगत सिंह नगर के प्लॉट नंबर 35 C की ट्रांसफर में बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया। जिसको लेकर भी सुसाइड करने वाले रिंपी अनेजा की ओर से चंडीगढ़ लोकल गर्वमेंट आफिस व पंजाब के मुख्यमंत्री तक शिकायतें की गई, लेकिन इस मामले को अंदरखाते दबा लिया गया। बताया जाता है कि ये प्लाॅट अलॉटी व अटार्नी होल्डर की हाजरी के बिना ही ट्रांसफर कर दिया गया, जो सीधे सीधे बड़ा स्कैम हैं। वहीं इसका बकाया जमा करवाने में भी सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया।
जिसमें लाखों रुपए का लेनदेन सुपरिटेंडेंट हरप्रीत सिंह और सेल ब्रांच के स्टाफ की ओर से किया जाने की चर्चा जोरों पर हैं। आपको बता दें कि इस प्लॉट के खरीददार का नाम भी इस एफआईआर में शामिल है। आपको बता दें कि मरने से पहले रिंपी अनेजा की ओर से जो वीड़ियों बनाई गई हैं, उसमें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सुपरिटेंडेंट व ईओ के पीए हरप्रीत सिंह का नाम लिया गया है, इसके अलावा जिन अन्य लोगों के नाम पुलिस एफआईआर में दर्ज किए गए हैं, सभी करोड़ों पति व हाई लिंक लोग बताए जाते हैं, जो सीधे सीधे हरप्रीत सिंह के लिंक में थे।
पुलिस एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें राजेश बंसल, विनोद स्याल, हरप्रीत सिंह (इंप्रूवमेंट ट्रस्ट सुपरिटेंडेंट व पीए ईओ) पंकज गुप्ता, खुशवंत सिंह, प्रापर्टी डीलर रिश्मजीत सिंह गाबा, प्रॉपर्टी अजीत सिंह स्वराज, संजू गोयल , अनिल कुमार, रनवीर कौर गिल, और तरुण गोयल के नाम शामिल हैं।
इनमें राजेश बंसल लोहा कारोबारी है और पंकज गुप्ता होटल कीज के मालिक है। इसके अलावा विनोद स्याल एक बडे़ शेयर ब्रोकर हैं, वहीं खुशवंत सिंह सम्राट फर्नीचर के मालिक बताए जाते हैं, वहीं संजू गोयल भी बसंत सिटी कालोनी के पार्टनर बताए जाते हैं।
जबकि प्रॉपर्टी डीलर रिश्मजीत गाबा व अजीत सिंह स्वराज भी शहीद भगत सिंह नगर व बीआरएस नगर के नामी प्रॉपर्टी डीलर्स में शुमार हैं। एफआईआर में एक महिला जिसका नाम रनवीर कौर गिल है, वो अमृतसर मजीठा रोड की रहने वाली है, उसकी ओर से रिंपी अनेजा से संबंधित किसी प्लाट पर लुधियाना में कब्जा किया गया है।
आपको बता दें एसबीएस नगर के प्लॉट नंबर 35 सी प्लॉट ट्रांसफर का पूरा स्कैम मौजूदा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर के कार्यकाल में अंजाम दिया गया और हरप्रीत सिंह पर चेयरमैन भिंडर का खास आशीर्वाद बताया जाता है। यही कारण है कि इस पूरे स्कैंडल को अंदर ही अंदर दबा लिया लिए गए नाम में कईं करोड़ पति लोगों के नाम शामिल हैं। आपको बता दें पंजाब सरकार का एक मौजूदा मंत्री (अब इस्तीफा दे चुका) ऐसे ही एक सरकारी अफसर को सुसाइड के लिए मजबूर करने के केस में जेल में बंद हैं।
11 साल पहले अलॉट प्लाॅट की बकाया अदायगी में न सरकार से मंजूरी और न कोई रेज्यूलेशन
आपको बात दें 35 सी प्लॉट अगस्त 2013 में स्टेट कंज्यूमर डिस्पयूटर रिड्रेसल कमेटी पंजाब की हिदायतों पर एक ट्रांसपोर्ट नगर की एक एलडीपी (लैंड डिस्पेलस्ड पर्सन) के तहत इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने अलॉट किया था और इसकी अलॉटमेंट में अलॉटी को 36 लाख 12 हजार रुपए जमा करवाने थे, इस रकम का बड़ा हिस्सा की जमा नहीं करवाए गए। लेकिन मोटी ब्याज की धारा के चलते ये बकाया करोड़ों में पहुंच गया था। नियमों के तहत इस बकाया राशि को जमा करवाने के लिए पहले पंजाब सरकार के लोकल गर्वमेंट डिपार्टमेंट से मंजूरी या फिर सरकार को एक रेज्यूलेशन भेजा जाना होता है। लेकिन लाखों रुपए के लेनदेन के चलते इस केस में ऐसा कुछ नहीं हुआ और अंदरखाते अपने नजदीकियों को ये प्लाट देने को हरप्रीत सिंह ने ऐसे ही ये बकाया जमा करवा लिया। जो सीधे सीधे बड़ा स्कैम व फ्राॅड की श्रेणाी में है।
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट सैल ब्रांच में मची भगदड़
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में सुबह करीब 11 बजे ही रिंपी अनेजा सुसाइड करने का मामला चर्चा में आ गया था। इसके बाद करीब 12 बजे जैसे ही इस सुसाइड में एक वीड़ियो जिसमें दस लोगों के चलते सुसाइड करने की बात सामने आई तो उसके तुरंत बाद सुपरिटेंडेंट हरप्रीत सिंह आफिस से निकल लिये। इसके बाद दिन भर ट्रस्ट की सेल ब्रांच में तैनात र्क्लकों व अन्य स्टाफ के चेहरों से हवाईयां उड़ी रही, लेकिन शाम में जैसे ही पुलिस एफआईआर में हरप्रीत सिंह का नाम आने की बात फैली तो 4 बजे के बाद क्लर्क संजीव कुमार, क्लर्क रमाशंकर, क्लर्क कुलदीप सिंह और कंप्यूटर आपरेटर सुखदेव सिंह आफिस से खिसक लिये।
आपको बता दें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की स्कीमें देख रहे चार क्लर्कों में तीन क्लर्क चुतुर्थ श्रेणी से प्रमोट होकर दो तीन सालों में क्लर्क बने हैं। ऐसे में उनके पास अधिक जानकारी न होने का फायदा कहीं न कहीं हरप्रीत सिंह को मिलता रहता था। जहां कहीं टेक्नीकल तौर पर ये अंजान क्लर्क रिपोर्ट करने में फंसते थे, वहां हरप्रीत सिंह अपने हिसाब से इन क्लर्कों से रिपोर्ट करवा लेता था। यही कारण है कि इन क्लर्कों के अधिक पढे लिखे न होने का हरप्रीत सिंह की ओर से पूरा फायदा कईं मालदार फाइलों की रिपोर्ट में लिया गया।
इतना ही नहीं ट्रस्ट के प्लाटों की रजिस्ट्री में भी स्वीफट करने में घूमने वाले एक प्राइवेट व्यक्ति की भी बड़ी भूमिका रही है। असल में ये प्राइवेट व्यक्ति ही ट्रस्ट की रजिस्ट्री करवाने को जाने वाले स्टाफ को अपनी स्वीफट कार में बिठाकर ले जाता है और इसके बाद छोड़ने की जिम्मेदारी भी इसी व्यक्ति की रहती है। ये प्राइवेट व्यक्ति पहले एक पटवारी के साथ रहा है और इसके चलते तहसील आफिस में ट्रस्ट की रजिस्ट्री करवाने में स्टाफ इसकी मदद लेता रहा है। पहले रजिस्ट्री को सुखदेव सिंह ट्रस्ट की ओर से जाते थे और वहीं अब ये काम क्लर्क रमा शंकर को दिया गया है।
पत्नी बोली, काफी दिन से मेरे पति आरोपियों के ताने से थे परेशान
पत्नी जसलीन कौर ने बताया कि पति काफी दिन से परेशान थे। जब उन्हें पूछा तो उन्होंने बताया कि लोग उनके पैसे नहीं दे रहे हैं। मेरे पति ने इनसे करोड़ों रुपए लेने हैं। वो कह रहे थे कि ये पैसे नहीं दे रहे हैं, जिसकी वजह से मैं मानसिक तौर पर परेशान हो गया हूं। ये लोग मुझे बहुत दुखी और जलील करते हैं। पत्नी ने कहा कि सभी आरोपी मेरे पति काे कहते थे कि तू मर जा। हमने तेरे कोई पैसे नहीं देने। 6 मई शाम 4:38 बजे मेरे पति का फोन आया कि मैंने अपनी गाड़ी में सल्फाश की गोलियां खा ली हैं। मैं अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहा हूं। रिश्तेदार चरणजीत सिंह पति को अपनी गाड़ी में पहले दीपक अस्पताल ले गए और फिर वहां से फिर डीएमसी ले गए। डीएमसी में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जसलीन ने कहा कि मेरे पति की मौत के जिम्मेदार उक्त सभी आरोपी हें। मेरे पति ने मरने से पहले चरणजीत सिंह को फोन करके कहा कि मैंने सल्फाश खाली ली है। मैं अपनी जिंदगी नहीं जीना चाहता हूं। क्योंकि इन लोगों ने मुझे मरने के लिए मजबूर कर दिया है। मैंने अपने फोन में वीडियो बनाया है। वो वीडियो मेरे पति के फोन में अब भी है।
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Yashpal Sharma (Editor)