लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री एक सप्ताह के लिए बंद, ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी कच्चे माल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किलें
14 से 20 सितंबर तक शहर की सभी डाइंग यूनिटें रहेंगी बंद, पॉलिएस्टर पर 10 और कॉटन पर 20 रुपये प्रति किलो बढ़ेंगी डाइंग दरें
Sep8,2026
| Enews Team | Ludhiana
यशपाल शर्मा
लुधियाना। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अब लुधियाना की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर सीधे दिखाई देने लगा है। धागे, डाई-केमिकल, पेट्रोलियम आधारित उत्पादों और अन्य कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से परेशान लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री ने 14 से 20 सितंबर तक एक सप्ताह के लिए सभी डाइंग यूनिटें बंद रखने का फैसला किया है। शहर की विभिन्न डाइंग एसोसिएशनों की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए पॉलिएस्टर की डाइंग दर में 10 रुपये प्रति किलो और कॉटन की डाइंग दर में 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की जाएगी।
धागे के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ने का दावा
डाइंग कारोबारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए तनाव का असर पेट्रोलियम और उससे जुड़े कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव सिंथेटिक यार्न, डाई-केमिकल और अन्य औद्योगिक इनपुट पर पड़ रहा है। कारोबारियों का दावा है कि कुछ किस्म के धागे के दाम करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। एसोसिएशनों का कहना है कि दूसरी ओर कच्चे माल की उपलब्धता भी सामान्य नहीं है। बाजार में कई आवश्यक सामग्री की कमी बनी हुई है और सीमित उपलब्धता के कारण उनके दाम सामान्य स्तर से काफी ऊपर चल रहे हैं। ऐसे हालात में मौजूदा डाइंग रेट पर उत्पादन करना उद्योग के लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
पहले गैस संकट ने छीनी लेबर, अब कच्चे माल की महंगाई
डाइंग उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने कहा कि उद्योग पहले ही कई तरह की मुश्किलों से गुजर रहा है। गैस की किल्लत के दौरान काम प्रभावित होने से बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांवों और दूसरे राज्यों की ओर चले गए थे। इसके बाद से उद्योग को लगातार कुशल और सामान्य लेबर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि, धागे के महंगे होने और डाई-केमिकल समेत अन्य कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है। कारोबारियों के अनुसार, एक तरफ लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ बाजार में तैयार माल की कीमतों को उसी अनुपात में बढ़ाना संभव नहीं है। इससे डाइंग यूनिटों के लिए कामकाज चलाना मुश्किल हो रहा है।
सभी प्रमुख डाइंग एसोसिएशन एक मंच पर
बैठक में लुधियाना की विभिन्न डाइंग एसोसिएशनों और सीईटीपी से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 50 एमएलडी, 40 एमएलडी और 15 एमएलडी सीईटीपी प्लांटों, इंडस्ट्रियल एरिया तथा राहों रोड क्षेत्र की डाइंग यूनिटों से जुड़े प्रतिनिधियों ने बंद के फैसले पर सहमति जताई। एसोसिएशनों का कहना है कि यह फैसला किसी एक क्षेत्र या एसोसिएशन का नहीं बल्कि लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री की सामूहिक सहमति से लिया गया है। कारोबारियों का मानना है कि एक सप्ताह के इस सामूहिक बंद से जहां कच्चे माल की मौजूदा स्थिति और बाजार की कीमतों का आकलन किया जा सकेगा, वहीं उद्योग के सामने पैदा हुए संकट की गंभीरता भी सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी।
14 से 20 सितंबर तक उत्पादन पूरी तरह रोकने का निर्णय
बैठक में तय किया गया कि 14 सितंबर से 20 सितंबर तक लुधियाना की डाइंग यूनिटों में उत्पादन बंद रहेगा। एसोसिएशनों ने उद्योग से जुड़े कारोबारियों से इस फैसले का पालन करने की अपील की है। कारोबारियों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में यूनिटें चलाने पर बिजली, गैस, लेबर, केमिकल और अन्य खर्चों के साथ उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। इसलिए कुछ समय के लिए सामूहिक रूप से उत्पादन रोकना जरूरी समझा गया है।
डाइंग रेट बढ़ाने पर भी बनी सहमति
बैठक में बढ़ती लागत को देखते हुए नई डाइंग दरों पर भी सहमति बनी। इसके तहत पॉलिएस्टर डाइंग में 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। वहीं कॉटन डाइंग में 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। एसोसिएशन प्रतिनिधियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी किसी अतिरिक्त लाभ के लिए नहीं बल्कि बढ़ी हुई उत्पादन लागत की भरपाई के लिए की जा रही है। यदि कच्चे माल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो उद्योग के लिए मौजूदा दरों पर उत्पादन जारी रखना संभव नहीं होगा।
बैठक में ये प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में लुधियाना पंजाब डायर्स एसोसिएशन की ओर से अशोक मक्कड़, बॉबी जिंदल, कमल चौहान और रजनीश गुप्ता मौजूद रहे। फोकल प्वाइंट डाइंग एसोसिएशन की ओर से राहुल वर्मा ने हिस्सा लिया। बहादुरके रोड डाइंग एसोसिएशन की ओर से सुभाष सैनी और अंकित बंसल तथा सनशाइन डाइंग से राजीव सूद सहित अन्य उद्योग प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं हुआ और कच्चे माल की कीमतें नीचे नहीं आईं तो आने वाले दिनों में टेक्सटाइल उद्योग के सामने और बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
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