चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ में तैनात एक जज की वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उन्हें हरियाणा के रोहतक ट्रांसफर कर दिया गया है। चीफ जस्टिस की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि, जज ने खुद को ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे। जज ने पुलिस को शिकायत दी थी कि कुछ समय पहले उनका मोबाइल खो गया था और किसी ने मॉर्फ्ड वीडियो डाली है। उनकी शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने केस भी दर्ज कर रोहतक के वकील को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें अब जमानत मिल गई है। उधर, हाईकोर्ट के जीफ जस्टिस के ऑर्डर के मुताबिक, हरियाणा सिविल सर्विसेज (पनिशमेंट एंड अपील) रूल्स, 2016 के रूल 4(b) के साथ संविधान के आर्टिकल 235 के तहत हाई कोर्ट के डिसिप्लिनरी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए सस्पेंशन का ऑर्डर दिया गया है। चीफ जस्टिस और दूसरे जजों वाली फुल बेंच ने यह भी निर्देश दिया है कि सस्पेंशन पीरियड के दौरान ऑफिसर का हेडक्वार्टर हरियाणा में होगा।
छवि खराब करने की कोशिश
यह मामला चंडीगढ़ जिला अदालत के जज की शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार, 18 फरवरी को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आई। इसके बाद व्हाट्सएप पर मैसेज भेजे गए, जिनमें उनकी मार्फ्ड और आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाई गईं। फिर दूसरे नंबर से कॉल कर 1.5 करोड़ रुपए की मांग की गई और पैसे न देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई और अब छवि खराब की जा रही है।
जज बोले- मोबाइल चोरी हो चुका
जज ने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी कि कुछ समय पहले उनका मोबाइल खो गया था और किसी ने उसी से मॉर्फ्ड वीडियो डाली है। ये “आपत्तिजनक” वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
अब जानिए पूरा मामला और HC की कार्रवाई का कारण…
• जज ने खुद दर्ज कराया था केसः जज ने खुद शिकायत दर्ज कराई थी कि इस वीडियो के जरिए उनसे ₹1.5 करोड़ की रंगदारी मांगी जा रही थी और उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था। इस मामले में एक वकील को गिरफ्तार भी किया गया था, जिसे हाल ही में रिपोर्ट के अनुसार जमानत मिल गई है।
• न्यायिक गरिमा का उल्लंघन हुआः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच ने अनुशासन बनाए रखने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों (अनुच्छेद 235) का उपयोग करते हुए जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित करने का फैसला किया। कोर्ट के अनुसार, ये न्यायिक गरिमा और अनुशासन का उल्लंघन है।
• इस कारण सस्पेंड किया गयाः ऑर्डर के अनुसार, सस्पेंशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चल रही विभागीय और पुलिस जांच के दौरान पद का कोई दुरुपयोग न हो और सच्चाई सामने आ सके। सस्पेंशन के दौरान जज का मुख्यालय चंडीगढ़ से बदलकर हरियाणा के रोहतक कर दिया गया है।
फिलहाल आरोपी को हिरासत में रखने की जरूरत नहीं
कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि कोई रकम वसूली गई थी, इसलिए एक्सटॉर्शन (रंगदारी) का पूरा मामला नहीं बनता। इसी आधार पर वकील को जमानत दी गई। कोर्ट ने यह भी माना कि डराने-धमकाने का मामला अलग अपराध हो सकता है, लेकिन फिलहाल आरोपी को हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।
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Yashpal Sharma (Editor)