यशपाल शर्मा | लुधियाना | 6 जून 2026 लुधियाना इंडस्ट्रियल एरिया में दीप टूल्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में सीवरेज लाइन की मैनुअल सफाई (मैनुअल स्कैवेंजिंग) के दौरान जहरीली गैस चढ़ने से तीन मजदूरों की मौत और दो अन्य के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा को नोटिस जारी कर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। NHRC ने कहा कि यदि मीडिया में प्रकाशित खबरें सही हैं तो यह मामला मानव जीवन के साथ गंभीर लापरवाही और मानवाधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक है। आयोग ने घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा है। तीन अहम बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट आयोग ने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है: 🔹 जांच की वर्तमान स्थिति फैक्ट्री प्रबंधन और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है? एफआईआर की स्थिति क्या है और जांच कहां तक पहुंची है? 🔹 घायलों की स्वास्थ्य स्थिति घटना में गंभीर रूप से घायल हुए दोनों मजदूरों का इलाज किस प्रकार किया जा रहा है और उनकी वर्तमान हालत क्या है? 🔹 मुआवजा और राहत मृतक और घायल मजदूरों के परिवारों को सरकार या प्रशासन की ओर से कोई आर्थिक सहायता, मुआवजा या राहत प्रदान की गई है या नहीं? 14 दिन में देना होगा जवाब NHRC ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और बिंदुवार रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मुख्य बातें ✅ लुधियाना गैस कांड पर NHRC ने स्वतः संज्ञान लिया। ✅ 3 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर रूप से घायल हुए थे। ✅ पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी। ✅ 14 दिन में विस्तृत रिपोर्ट तलब। ✅ जांच, घायलों की स्थिति और मुआवजे पर मांगा जवाब। ✅ आयोग ने मामले को संभावित मानवाधिकार उल्लंघन बताया। -------- ना सरकार से मुआवजा और मजिस्ट्रेट इंक्वारी के नाम पर रही लीपा पोती इस पूरे हादसे में जहां तीन लोगों की जान चली गई तो वहीं दूसरी ओर पंजाब सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों के लिए कोई मुआवजा तक नहीं ऐलान किया गया। इसके साथ-साथ इस पूरे घटनाक्रम में साफ-साफ दिखाई दे रहे फैक्ट्री मालिक की लापरवाही के बिंदुओं को पर पर्दा डाल दिया गया। पुलिस मिलीभगत का नतीजा है कि यह हादसा सोमवार रात करीब 2 से 3 बजे के बीच पेश आया और पुलिस सुबह 10 बजे के बाद इस मामले में एंट्री करती दिखाई दी। ऐसे में पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद कार्रवाई क्यों नहीं की और अगर पुलिस को इस घटना की जानकारी नहीं थी तो इस पूरे मामले को छिपाने के लिए जिम्मेदार अस्पताल और फैक्ट्री मालिक पर क्यों नहीं करवाई की । यह सवाल ऐसे हैं, जिसका जवाब अभी तक पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया। वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले की लीपापोती को जांच के नाम पर मजिस्ट्रेट इंक्वारी लगा दी गई। आपको बता दें कि ग्यासपुर गैस कांड में भी ऐसे ही मजिस्ट्रेट इंक्वारी लगाकर मामले को पूरी तरह से रफा दफा कर दिया गया था । कई महीनो बाद आई मजिस्ट्रेट रिपोर्ट में जिम्मेदार सभी विभागों को क्लीन चिट दे दी गई थी। बताया जाता है कि अंदर खाते अब इस हादसे में मारे गए बाप बेटे के परिवार और एक अन्य मृतक फैक्ट्री मुलाजिम को फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मुआवजा देकर सभी का मुंह बंद कर दिया गया है।
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Yashpal Sharma (Editor)