कौंसलर, विधायक व मंत्री की लिस्टों की क्रास वेरिफिकेशन बिना बांट दिए 42 करोड़ के चैक, करोड़ों के स्कैम में फंसे निगम अफसर

Jan 14, 2022 / /

यशपाल शर्मा, लुधियाना
पंजाब निर्माण योजना के तहत बांटे गए करोड़ों के चैक नगर निगम व जिला प्रशासन के लिए बड़ी आफत बनता दिख रहा है, क्यों कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपए का घाेटाला सामने आ सकता है। इस पूरे मामले में नगर निगम के जेई से लेकर एक्सईन स्तर के अफसरों की नौकरियां तक खतरे में आती दिखाई दे रही है। इस योजना के तहत ये फंड एससी, बीसी व अति गरीब व्यक्ति को मकान रिपेयर को दिए जाने थे। मतलब ये कि ऐसे गरीब लोग जिनके पास अपने मकान तक रिपेयर करने को पैसे नहीं थे, लेकिन यहां अपने चहेतों खुश करने के लिए कौंसलर व विधायकों ने बड़ी बड़ी कोठी मालिकों को ये चैक बांट दिए। इतना ही परिवार में बाप और बेटे या दो भाईयों तक को अलग अलग चैक दे दिए गए। अधिकतर केसों में तो ऐसा भी है कि उनके घरों में कोई न कोई सदस्य पैंशन तक ले रहा है। इसका बड़ा कारण है कि नगर निगम अफसरों की ओर से बरती गई लापरवाही। असल में नगर निगम में इन चैक लेने वालों की बैरिफिकेशन को जोन वाइस कमेटियां तो बनी, लेकिन इन कमेटियाें ने बिना बैरिफिकेशन के कौंसलर, विधायक व मंत्री की सिफारिश पर चैक फाइनल करवा बंटवा दिए और इतना बड़ा गड़बड़झाला हो गया कि फिल्लौर व लुधियाना के आसपास रहने वालों तक को ये चैक बांट दिए गए। जानकारी मुताबिक पंजाब सरकार की ओर से पंजाब निर्माण फंड के तहत करीब 90 करोड़ रुपए नगर निगम के खाते में डाला था और इस में से करीब 42 करोड़ रुपए के चैक बनवाकर बांट दिए गए। इसके बाद इलेक्शन कोड लगने के चलते व इस संबंधी आ रही शिकायतों के बाद बीते सोमवार को इस अकाउंट से संबंधित खाते फ्रिज कर दिए गए। जिसके बाद बाकी का फंड वापिस सरकार के खाते में चला गया है। लुधियाना की छह विधानसभा सीटों के लिहाज से हर विधायक को 15 करोड़ रुपए दिया जाना था।

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नियमों के तहत कौंसलर व विधायकों की ओर से जो लिस्टें बनाकर नगर निगम के अफसरों को भेजी गई, उनकी जेई या एसडीओ स्तर के अफसरों ने घर जाकर बैरिफिकेशन करनी थी, लेकिन कौंसलर व विधायकों की ओर से जल्द चैक बनवाने के दबाव में इन लिस्ट की कोई क्रास बैरिफकेशन नहीं करवाई गई और नगर निगम में बनी कमेटी की मंजूरी से ये लिस्टें मंजूर कर डीसी आफिस में एडीसी के पास भेज दी गई। निगम की कमेटी में बीएंडआर के जेई, एसडीओ, एक्सईन के अलावा जोनल कमिश्नर व ज्वाइंट कमिश्नर तक शामिल थे। असल में इन लिस्टों की बैरिफिकेशन का पूरा जिम्मा नगर निगम के अफसरों को करना था, जो उन्होंने नहीं की। अब इसमें कईं तरह के फ्राॅड सामने आ रहे हैं और जिससे साफ हो गया है कि सरकारी खजाने में इन चैकों के जरिए बड़ी सेंधमारी को अंजाम दे दिया गया। बड़ी बात है कि इस मामले में बीते दिनों भाजपा नेता अनिल सरीन की ओर से प्रैस कांफगेस भी की गई थी और इसमें भी कईं तरह के घोटाले की बात कही गई थी।
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फिजिकल बैरिफिकेशन तो दूर, लिस्टों तक पर भी नहीं मारी नजर
सरकारी फंड को इस योजना के तहत किस तरह से उड़ाया गया, इस बात का अंदाजा आप इस लिहाज से लगा सकते हैं कि सरकारी लिस्ट में आया एड्रेस मध्यप्रदेश, यूपी, हिमाचल, मोहाली, फिल्लौर सहित अन्य राज्यों व शहरों का था, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम पर चैक बनवा दिए गए। मतलब ये कि लिस्टों की घर जाकर इंक्वायरी कि वे आदमी कितना गरीब है, इसकी जांच तो दूर, लेकिन वे व्यक्ति उस विधानसभा तक का न होने के बावजूद उसके नाम पर भी चैक बनवा दिए गए। लेकिन अब जब इस मामले की परतें खुलनी शुरु हो गई हैं तो नगर निगम अफसरों की दिक्कतें बढ़नी शुरु हो गई हैं। इस पूरे मामले में नगर निगम के जोनल कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर, निगम कमिश्नर तो सीधे सीधे जिम्मेदार दिखाई ही दे रहे हैं, वहीं जिला प्रशासन के अधिकारियों की भी इस मामले में जबावदेही बनती दिखाई दे रही है।
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हालांकि इस मामले में नगर निगम के कमिश्नर प्रदीप सभ्रवाल से बात करने की कोशिश की गई तो वे इस मामले को देख रहे हैं कि बात कहकर मामले की टालते हुए दिखे।


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