यशपाल शर्मा, लुधियाना
होली के बाद मोगा में होने जा रही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की विशाल रैली प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की दिशा तैयार करती दिखाई दे सकती है। इस रैली को कामयाब बनाने के लिए भाजपा की ओर से 117 हल्का इंचार्ज की सूची भी जारी कर दी गई है। इस रैली में हल्का वॉइस पंजाब भर से बीजेपी समर्थक पहुंचे, इसके लिए हल्का इंचार्जों को बड़ा जिम्मा सौंपा गया है। चाहे कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी सभी की नजर फिलहाल इस बात पर टिकी हुई है कि पंजाब में भाजपा अकेले चुनाव लड़ती है या शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन बना इस बार चुनाव मैदान में उतरती है। वही इस बार के विधानसभा चुनाव में डेरा बाबा ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों किस भूमिका में रहते हैं, इसको लेकर भी कई तरह की चर्चाएं पंजाब की राजनीति में शुरू हो चुकी है। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह की रैली इन सभी चर्चाओं पर से कुछ-कुछ पर्दा हटाती जरूर दिखाई दे सकती है।
डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों का शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को दो बार जेल में मिलने जाना और इसके बाद फिरोजपुर में नशे विरुद्ध निकली गई रैली में पंजाब के गवर्नर के साथ डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों का दिखाई देना पंजाब की राजनीति में नया तड़के जैसा दिखाई दे रहा है।
पंजाब की सत्ता पाने को दलित और सिख वोट पर भाजपा की नजर
आपको बता दें कि पंजाब में की सत्ता हासिल करने को भारतीय जनता पार्टी की नजर दलित और सिख वोट पर केंद्रित करने की कोशिश की जा रही है संत गुरु रविदास जी की 649 जयंती दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जालंधर में डेरा सचखंड बल्लां में पहुंच माथा टेका, तो वहीं संत निरंजन जी का आशीर्वाद लिया। राजनीतिक शब्दों में सीधे-सीधे दलित वोट को लुभाने जैसा है। वहीं दूसरी ओर राधा स्वामी डेरा ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों का भी भारतीय जनता पार्टी के साथ कदम दर कदम दिखाई देने में भी कहीं ना कहीं सिख वोट की बड़ी काठ की तरह आंकलन किया जा रहा है। आपको बता दे की गुरिंदर सिंह ढिल्लों डेरा ब्यास की गाड़ी छोड़ चुके हैं और अब जगदीप सिंह गिल गद्दी नशीन है। लेकिन गुरिंदर सिंह ढिल्लों की लगातार राजनीति में एंट्री कहीं ना कहीं बड़े बदलाव की ओर इशारा करती दिखाई दे रही है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी तोड़ने की कोशिश में कांग्रेस
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ईडी की ओर से कैप्टन अमरिंदर सिंह को समन भेजे गए थे, जिसके चलते एक बार फिर से राजनीतिक माहौल गरमाता दिखाई दिया है। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह को समन भेजने वाले ईडी अफसर का पंजाब से तबादला कर दिया गया है लेकिन कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। इसका बड़ा कारण है कि कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी को कमजोर करने में कोई कमी छोड़ना नहीं चाहती। जबकि कैप्टन के नजदीकी कहीं जाने वाले अरविंद खन्ना जो कि भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर थे, ने रविवार को भाजपा छोड़ शिरोमणि अकाली दल में जॉइनिंग कर ली। अरविंद खन्ना संगरूर से लोकसभा और इसके बाद विधायक चुनाव भाजपा की टिकट से लड़ चुके हैं लेकिन दोनों बार उन्हें इन चुनाव में मात खानी पड़ी।
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Yashpal Sharma (Editor)