यशपाल शर्मा, लुधियाना
लुधियाना के कारोबारी जतिंदर सचदेवा उर्फ हीरा इंफोरसमेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की छापामारी के बाद चर्चा में आए हुए हैं। करीब दस दिन पहले ईडी ने हीरा सचदेवा के ठिकानों पर करीब 36 घंटे दबिश दे रखी थी। भले ही लुधियाना में हीरा सचदेवा ईडी की छापेमारी के बाद चर्चा में आए हों, लेकिन वे अपने नजदीकी दोस्तों के बीच पिछले करीब पांच सालों में चर्चा में आए हुए थे। लुधियाना के अच्छे अच्छे बिजनेसमैन अपने कारोबार में खून पसीना बहाकर भी तीन चार सालों में नई कोठी, डिफेंडर जैसी लग्जरी गाड़ियां खरीदने के शौक के बारे में सोच तक नहीं पाते, लेकिन हीरा सचदेवा की कहानी तो कुछ ओर ही थी। करीब छह साल पहले कोरोना काल में यही हीरा एक लाख रुपए दस परसेंट इंट्रेस्ट पर लेने को लोगों के पास चक्कर काट रहा था, तो वहीं अगले छह साल में यही व्यक्ति करीब एक एकड़ में बनी आलीशान कोठी में रह रहा होता है। करीब दो साल पहले जनपथ में करीब 900 गज की कोठी ये कहकर 9 करोड़ में बेच डाली, कि थोड़ी छोटी हो गई थी। गाड़ियां तो हर तीन चार महीनें में चेंज कर दी जाती थी और करीब तीन महीने पहले दो डिफेंडर गाड़ियां भी हीरा व उसके बेटे के पास देखी गई, जिनसें वे शहर के सबसे चर्चित क्लब में आते थे। इतना ही नहीं कुछ दिनों के लिए तो उनके बेटे की गाड़ी के आगे पीछे पुलिस स्कॉयड भी देखी गई। ऐसे में सबके जहन में ये सवाल तो उठना वाजिब ही है कि हीरा सचदेवा ऐसा कौन सा कारोबार करते थे, जहां से उन्हें करोड़ों रुपए की आमदन हर महीने आ रही थी। हैरानी की बात है कि चीमा चौक में जो उनकी फैक्ट्री है, वो भी दो साल पहले ही उनकी ओर से खरीदी गई है। बताया जाता है कि हीरा के दो बेटे हैं, जिनमें एक विदेश में है तो दूसरा लुधियाना में ही उनके कारोबार को अपनी गाड़ी में ही बैठकर हैंडल करता है।
ऐसे में उनका कोई ऐसा कोई लंबा चौड़ा बिजनेस भी नहीं था कि जिससे करोड़ों रुपए से आलीशान कोठी नुमा फार्म हाउस, लग्जरी गाड़ियां और रेंटल प्रॉपर्टियां खरीदी जा सकें। यही कारण था कि उनके बैंक खातों में रोजाना होने वाले करोड़ों रुपए की ट्रांसजेक्शन ईडी को लुधियाना खींच लाई। आज ई न्यूज पंजाब की ओर से हीरा सचदेवा की चर्चा करने का बड़ा कारण ये है कि आखिर ईडी की रेड के बाद हुआ क्या। ईडी तो वापिस चली गई, लेकिन इसके पीछे कईं सवाल जरुर छोड़ गई। क्यों कि जिस दिन ईडी की रेड खत्म हुई उस दिन शाम को हीरा शहर के चर्चित क्लब में सामान्य दिनों की तरह आए और रम्मी रुम में गेम खेली। लेकिन एक असामान्य बात ये भी रही कि रम्मी रुम से बाहर आने के बाद वे क्लब के बाॅर में गए। जहां उन्होंने महंगी शराब के दो पैग भी अपने दाेस्तों के साथ लगाए। उन्हें ये बताते भी हिचकिचाहट नहीं हुई कि उनके ईडी की छापामारी हुई थी। लेकिन अब सवाल ये है कि हीरा ने ईडी के समक्ष सरेंडर कर दिया या इस पूरे मामले की पड़ताल को उसे ईडी सम्मन देकर बुलाएगी।
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बैटिंग एप का गेटवे अकाउंट तो कोई बता रहा बोगस बिलिंग का धंधा
सामान्य तौर पर ईडी की छापामारी के बाद डिपार्टमेंट प्रेस नोट के जरिए अपनी छापामारी का ब्यौरा देती है, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसका कारण है कि ये मामला किसी बैटिंग एप को लेकर ईडी की ओर से दर्ज किए मामले में से ही संबंधित है और उसी की जांच को ईडी ने हीरा पर दबिश दी। जिसमें जांलधर के एक कारोबारी चंद्र अग्रवाल और लुधियाना के एक कारोबारी का नाम चर्चा में है। लेकिन इस चर्चा से भी भी इंकार नहीं किया जा सकता कि शहर के कईं नाम एक्सपोटर्स भी हीरा सचदेवा से बिल लेकर अपनी एंट्रियां घुमाते थे। इतना ही नहीं अगर किसी को 5 से 10 करोड रुपए की कैश एंट्री चाहिए होती है वह भी ये अरेंज करते थे। हीरा सचदेवा के पास ही कुछ बड़ी बैटिंग अप का गेटवे था और भारतीय पे एप के जरिए यह पेमेंट उनके खातों तक पहुंचती थी। आज की ईडी जांच का यह पूरा मामला बेटिंग एप से जुड़ा बताया जा रहा है। हीरा के पास आना वाला करोड़ों रुपए कैसे कच्चा पक्का होता था और इसके दुबई से कैसे तार जुडे़ हुए थे, इसको लेकर ईडी सुराग खंगाल रही बताई जा रही है। ईडी इंडस्ट्री एरिया स्थित उनकी फैक्ट्री और मोती नगर स्थित उनके ऑफिस से कंप्यूटर लैपटॉप में अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट अपने साथ लेकर गए हैं।
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सवाल ये भी क्या ईडी के बाद अब आएगी इंकम टैक्स
जिस लिहाज से हीरा सचदेवा की पिछले छह सालों की कहानी है कि वे मात्र पांच छह सालों में लग्जरी मैन बन गए, उससे अब ये भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या ईडी के बाद अब कभी भी इंकम टैक्स डिपार्टमेंट भी उन पर दबिश दे सकता है। लेकिन उनका जितना बड़ा नेटवर्क है, उससे लगता है कि कहीं न कहीं किताबों में भी इसे मैनेज करने में कोई कमी नहीं छोड़ी होगी।
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Yashpal Sharma (Editor)