लुधियाना की सफल महिला बिजनेसमैन रजनी बैक्टर पदमश्री आवार्ड से सम्मानित

Nov 9, 2021 / /

 यशपाल शर्मा, लुधियाना
करीब एक साल पहले मिसेज बैक्टर्स फूड नाम से आईपीओ की दुनिया में कदम रखने वाले लुधियाना के मशहूर क्रीमिका ब्रांड की फाउंडर रजनी बैक्टर को आज दिल्ली में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा। करीब 42 साल पहले रजनी बैक्टर ने 300 रुपए में ओवन खरीद कर अपने घर से बिस्कुट व केक बनाने का काम शुरु किया, उन्हीं का ये शौक व जनून आज इस कंपनी को 2500 करोड़ की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में तबदील कर चुका है। श्रीमति बैक्टर ने शौकिया तौर पर अपने घर से कारोबार शुरु कर एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में कदम रखा था, जो आज पूरे विश्व में एक मिसाल बन गई हैं और आज उनके क्रीमिका ब्रांड के बिस्कुट, कुकीज आज देश-विदेश में लोगों की पसंद बने हुए हैं।पद्मश्री सम्मान पाने के बाद रजनी बेक्टर काफी खुश थी। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत पूरी तरह से सफल हो गई है। इस सम्मान के साथ अब जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि और भी शिद्दत के साथ काम किया जाए। रजनी मानती हैं कि सभी को जीवन लक्ष्य साध कर आगे बढ़ना चाहिए, सफलता अवश्य मिलती है। रजनी अपनी कारोबारी जिम्मेदारियों के साथ समाज कल्याण के कामों में में अहम योगदान करती हैं और अपनी इस कामयाबी में उनके पति के सहयोग को एक बड़ा कारण मानती हैं। 
56 देशों में निर्यात हो रहे क्रीमिका ब्रांड के उत्पाद
क्रीमिका के बने बिस्किट, ब्रेड एवं आइसक्रीम विश्व के पचास से अधिक देशों में बखूबी निर्यात किए जा रहे हैं। अगर कंपनी की कामयाबी का बड़ा कारण माने तो रजनी बैक्टर की ओर से लगातार नए नए इंवोशन करना व क्वालिटी से किसी तरह का कोई समझौता न करना रहा। क्रीमिका ग्राहकों की नब्ज को पहचान कर ही बाजार में खाद्य उत्पादों को लांच करती हैं, तभी तो ग्रुप को सफलता मिल रही है। क्रीमिका ग्रुप का वर्तमान समय में करीब  करोड़ का सालाना टर्नओवर है। उनके बेटे अनूप और अक्षय बेक्टर कंपनियों का संचालन कर रहे हैं। । कंपनी इस समय क्रिमिका ब्रांड से बिस्किट, ब्रैड और आइसक्रीम दुनिया के 56 देशों में निर्यात करती है।

किस तरह से लुधियाना से देश में और विदेशों में मची क्रीमिका प्रोडेक्ट की धूम

कराची में जन्मी रजनी बेक्टर्स बंटवारे के वक्त पंजाब के लुधियाना आ गईं। वह शहर में पली-बढ़ी और 17 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई। तीन बेटों की परवरिश करने के बाद उन्हें पढ़ने को बोर्डिंग स्कूल भेज दिया और खुद पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में बेकरी का कोर्स करने में जुट गई।  शुरू से ही एक सफल कुक, उत्साही रसोइया रही। बेकर, आइसक्रीम और केक के लिए बेक्टर की रेसिपी जल्द ही उसके दोस्तों और सहयोगियों के बीच लोकप्रिय हो गई, जिससे उसे ओवन खरीदने के लिए 300 रुपये उधार लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया और इसी 300 रुपए के ओवन से सबसे पहले बिस्किट ब्रांड की शुरुआत हुई। 1978 में, जब बेक्टर की बेकरी ने भारी मात्रा में ध्यान आकर्षित करना शुरू किया, तो बेक्टर के परिवार ने उसे एक आइसक्रीम यूनिट स्थापित करने के लिए 20,000 रुपये का ऋण दिया। श्रीमती बेक्टर ने हिंदी शब्द 'क्रीम का' को अपना ब्रांड का हिस्सा बनाया और इसे 'क्रेमिका' नाम दिया। 90 के दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का खुलना अगला बड़ा बदलाव था जिसने क्रेमिका को और आगे बढ़ने में मदद की, जिससे श्रीमती बेक्टर की छोटी बेकरी को देश भर नई पहचान का रास्ता खुल गया। 90 के दशक तक, कंपनी ने बन, बिस्कुट, ब्रेड और सॉस का निर्माण शुरू कर दिया था। हालाँकि, इसका बड़ा ब्रेक 1995 में आया, जब इसने फास्ट-फूड चेन मैकडॉनल्ड्स को बन्स की सप्लाई का सौदा हासिल किया। भारत में फास्ट-फूड श्रृंखला के आक्रामक विस्तार ने श्रीमती बेक्टर की क्रेमिका को भी बढ़ने में मदद की। 2006 में मिसेज बेक्टर्स क्रेमिका ने 100 करोड़ रुपये कमाए। 2011-12 तक यह सालाना बिक्री में 650 करोड़ रुपये कमा रही थी। आज, लुधियाना स्थित कंपनी बर्गर किंग, पिज्जा हट, पापा जॉन के साथ-साथ भारतीय रेलवे जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए ब्रेड, पिज्जा बेस, सॉस और अन्य मसालों और कन्फेक्शनरी वस्तुओं की भारतीय आपूर्तिकर्ता है। श्रीमती बेक्टर की सफलता भारत में उन अनगिनत महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपना खुद का खाद्य व्यवसाय शुरू करने का सपना देखती हैं।


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