भाजपा ने जारी की प्रदेश कार्यकारिणी की सूची, लुधियाना के आधा दर्जन से अधिक नेता शामिल

May 21, 2020 / /

यशपाल शर्मा, लुधियाना
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की ओर से एक दिन पहले जिला भाजपा की कमान पुष्पिंदर सिंगल थमाने के बाद आज प्रदेश कार्यकारणी सदस्यों की सूची जारी कर दी है। पहली बार है कि इस सूची में लुधियाना से एक दर्जन से अधिक नेताओं को जगह दी गई है और जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं। नए प्रदेश कार्यकारणी सदस्यों में लुधियाना से हरिंदर खालसा, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन व सीनियर भाजपा नेता मदन मोहन व्यास, केंद्रीय रेलवे बोर्ड सदस्य अरुणेश मिश्र, पूर्व कौंसलर संतोष कालड़ा, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर सुनीता अग्रवाल, पूर्व जिला प्रधान रजीव कतना, कमल चेटली, पूर्व जिला प्रधान जतिंदर मित्तल, पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रेणु थापर,पूर्व काैंसलर हरबंस फेंटा, पूर्व कौंसलर सुनीता शर्मा, रीना धवन, अशोक लूंबा, पूर्व जिला प्रधान व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सुभाष वर्मा के नाम शामिल हैं। गौर हो कि एक दिन पहले ही जिले की कमान पुष्पिंदर सिंगल को थमाई गई हैं, लेकिन इसमें बड़ी बात ये है कि जो कुर्सी सिंगल को मिली है, उस कुर्सी के लिए उनका नाम कहीं पर भी नहीं था। इस दौड़ में कमल चेतली, रजनीश धीमान, आरड़ी शर्मा, राजीव कतना का नाम लिया जा रहा था, लेकिन भाजपा के प्रदेश महामंत्री जीवन गुप्ता की महिमा पुष्पिंदर सिंगल की इस कुर्सी के लिए लॉटरी निकल आई। भले ही जीवन गुप्ता ने बाकी नेताओं में कोई न कोई कमी भांपते और गुटबाजी से बचने को पुष्पिंदर सिंगल को इस कुर्सी पर बिठवा दिया, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि करीब आधा दर्जन से अधिक बार जिला भाजपा में वाइस प्रधान सहित कईं अन्य पदों पर रहने वाले पुष्पिंदर सिंगल आखिर इतने सालों में जिला प्रधान क्यों नहीं बन पाए। जबकि वे सीनियर भाजपा नेता व पूर्व प्रदेश प्रधान प्रो. राजिंदर भंड़ारी के सबसे अधिक खासमखास में थे। अगर वे इतने सालों में जिला प्रधान नहीं बन पाए तो कहीं न कहीं कोई न कोई बात ऐसी जरुर होगी, जो पुष्पिंदर सिंगल को प्रधान बनने से रोकती रही है। बात करें जिला लुधियाना में भाजपा की तो इस समय स्थिति अन्य सालों के मुकाबले बेहद खराब है, भाजपा जिले में दूर की बात अपनी तीन विधानसभा सीटों में बुरी तरह से बिखरी पड़ी है। ऐसे में पुष्पिंदर सिंगल के चेहरे की बदौलत जीवन गुप्ता लुधियाना में भाजपा को खड़ा कर पाएंगे, जबकि उन्हीं की पार्टी के पूर्व प्रधान जतिंदर मित्तल जिन्हें आरएसएस का बेहद नजदीकी व जिले की टीम का पूरा अुनभवी कहा जाता था, वे पार्टी की गुटबाजी को दूर करने के चक्कर में बुरी तरह से फलाप हो कर रह गए। ऐसे में सिंगल शहर की इस असमतल पिच पर किस तरह से बेहतर बैटिंग कर पाएंगे, ये सवाल अभी से सबके जहन में उठने लगा है। भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है, जिसमें विधानसभा चुनाव जिले की कुशल नेतृत्व में रहकर ही जीते जा सकते हैंऔर ठीक दो साल बाद होने वाले 2022 विधानसभा चुनाव की रणनीति अभी से तय करनी होगी।


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