सीएम चन्नी के खिलाफ सिद्धू ने खोला फिर से बड़ा मोर्चा, 90 दिन की चन्नी सरकार और 45 दिन में बेअदबी व नशे पर क्या किया

Nov 5, 2021 / /

बाबा बर्फानी केदरनाथ धाम में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ माथा टेकने के बाद दोबारा से राजनीति में सक्रिय हुए पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं और कहा कि आज वे अपना इस्तीफा तो वापस ले रहे हैं, लेकिन पंजाब प्रदेश अध्यक्ष का चार्ज उसी दिन संभालेंगे, जिस दिन राज्य को नया एजी मिलेगा। सिद्धू के इस हमले के बाद ये भी साफ हो गया कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को अगले दो महीने में किसी विपक्षी पार्टी से नहीं, ब्लकि अपनी ही पार्टी के प्रदेश प्रधान के साथ राजनीतिक लड़ाई लड़नी पड़ सकती है। सिद्धू ने आज अपनी प्रेसवार्ता में पत्रकारों से सवाल पूछते कहा कि वे बताएं इस 90 दिन की सरकार ने बीते 45 दिन में बेअदबी व नशे के मुददे पर क्या किया। गौर हो कि चन्नी के सीएम बनने के कुछ दिन बाद ही पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से सिद्धू ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने उनका इस्तीफा नहीं स्वीकार किया था। उन्होंने यह भी कहा कि “जब आप सच्चाई के रास्ते पर होते हैं तो पोस्ट या पद मायने नहीं रखते।” सिद्धू ने इस प्रेसवार्ता दौरान साफ किया कि बेअदबी व ड्रग के मुददे पर एक सीएम को उतारा गया। उन्होंने साफ किया जब तक साधन नहीं तब तो इन दोनों मुददो को हल नहीं किया जा सकता और इन दोनों ही मुददों को हल करने में सबसे तगड़े साधन पंजाब के डीजीपी व एडवोकेट जरनल हैं। इन्हीं दाेनों साधनों को बीते अकाली भाजपा सरकार व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में बेअदबी व नशे के मुददों के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया गया। सिद्धू ने पंजाब के डीजीपी इकबाल प्रीत सहोता के घेरते कहा कि जब ये मामला सामने आया तब तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने एक एसआईटी बनाई थी और इस एसआईटी का चीफ मौजूदा डीजीपी इकबाल प्रीत सहोता (जो सुमेध सिंह सैनी का सबसे चहेता अफसर था) को लगाया गया। उन्होंने कहा कि तब इन्हीं डीजीपी सहोता ने तत्कालीन सुखबीर सिंह बादल के साथ बैठ कहा था कि इन्हें क्लीनचिट दी जाती है। उन्होंने कहा कि अब वहीं अफसर पंजाब का डीजीपी हैं, तो ऐसे सुरक्षा कवच पहनने वाले कार्रवाई कैसे करेंगे। वहीं जिस एडवोकेट जरनल नगर उन्हाोंने कहा कि इस मुददे को हर गली गली में चर्चा है और ऐसे में इन मुददों को हल किए बिना पंजाब के 12 हजार गांवों में कैसे घूमा जाएगा। इससे तीन करोड़ पंजाबियों के विश्वास पर चोट पहुंचती है। सिद्धू का यह फैसला एडवोकेट जनरल एपीएस देओल के अपने पद से इस्तीफा देने और पंजाब सरकार द्वारा पुलिस महानिदेशक के पद पर नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग को 10 नामों की सूची भेजे जाने के बाद आया है। सिद्धू 19 जुलाई को पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नियुक्त किए गए थे। इनकी ताजपोशी, कैप्टन-सिद्धू विवाद को खत्म करने के लिए की गई थी, हालांकि इसके बाद भी विवाद जारी रहा और कुछ दिन बाद ही कैप्टन ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया था। चन्नी के सीएम बनने के बाद कुछ दिनों तक तो सिद्धू ठीक रहे, फिर उनका चरणजीत सिंह चन्नी के साथ भी विवाद हो गया। बताया जाता है कि नई सरकार में मंत्रियों को विभागों के आवंटन से सिद्धू नाराज थे, इसलिए उन्होंने इसके बाद ही इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने त्याग पत्र में सिद्धू ने लिखा- “मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब के कल्याण के एजेंडे से कभी समझौता नहीं कर सकता। इसलिए मैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा।” सिद्धू के इस्तीफे के पीछे एक कारण यह भी था कि कांग्रेस सरकार वरिष्ठ अधिवक्ता एपीएस देओल को अपना महाधिवक्ता नियुक्त कर दी थी। इसके चलते सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई, क्योंकि देओल हाल तक प्रदर्शनकारियों पर बेअदबी और पुलिस फायरिंग की घटनाओं के दौरान पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के वकील रह चुके थे।


 


 


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