जहर फैलाने वाली सील डाइंग इंडस्ट्रीज से हाथ मिलने की तैयारी में पीपीसीबी !

Oct 18, 2020 / /

यशपाल शर्मा, लुधियाना


करीब एक महीने पहले पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से जिन पांच डाइंग इंडस्ट्री में सरप्राइज चेकिंग दौरान ढेरों अनियमिताएं पाई थी, अब उन डाइंग इंडस्ट्री को खोलने की अंदरखाते तैयारियां शुरु हो गई हैं। बड़ी बात है कि इन डाइंग इंडस्ट्री में जो अनियमिताएं पाई गई थी, अभी तक उन्हें दूर करने को कोई कदम तक नहीं उठाया गया, लेकिन सुनने में आ रही है कि बोर्ड के आला अफसरों की सांठगांठ से इन्हें खोलने के खेल का दांव खेला जा चुका है। गौर हो कि बीती 20 सिंतबर को पीपीसीबी लुधियाना के चीफ इंजीनियर गुलशन राय की अगुवाई में फोकल प्वाइंट फेस आठ स्थित रमल डाइंग, परफेक्ट डाइंग, बीएच साइंटिफिक डाइंग, नवदुर्गा साइंटिफिक अमर इंडस्ट्रीज सहित कुछ अन्य डाइंग इंडस्ट्रीज पर छापमारी की गई थी और इस छापामारी में रमल डाइंग व परफेक्ट डाइंग में अनट्रीटेड डिस्चार्ज का सीवरेज में सीधा डिस्चार्ज पाया गया था। जबकि अन्य डाइंग फैक्ट्रीज से भी काला व रंगदार पानी का सीवरेज में डिस्चार्ज पाया गया था। बड़ी बात ये है कि जिस लिहाज रमल डाइंग, परफेक्ट डाइंग, बीएच साइंटिफिक डाइंग का जो डिस्चार्ज पाया गया है, उस लिहाज से बोर्ड से इनकी कंसेंट नहीं ली गई। इसका बड़ा कारण है कि इन डाइंगों में बड़ी मात्रा में मशीनरी लगी हुई है और इनका डिस्चार्ज पीपीसीबी से ली कंसेंट से 50 से लेकर 80 फीसदी ज्यादा है और उस लिहाज इन सभी डाइंगों के ईटीपी अपग्रेड कर बडे़ किए जाने बनते हैं। गौर हो कि इससे पहले लुधियाना में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कुछ डाइंगों पर सख्त कार्रवाई को अंजाम दे पूरी डाइंग इंडस्ट्री के लिए चिंता खड़ी कर दी थी, लेकिन इसके उल्ट पीपीसीबी के अफसरों की सांठगाठ कहीं ओर ही इशारा कर रही हैं। इससे एक बात साफ है कि अगर पीपीसीबी अफसर आंखें मूंदकर पॉल्यूशन फैलाने वाली डाइंग इंडस्ट्री को खोलने लगेंगे तो त्रिपुर में पाल्यूशन के चलते बंद की गई डाइंग इंडस्ट्री को भी पंजाब में लगने का न्यौता दे दिया जाना चाहिए। हालांकि पीपीसीबी अफसर ऐसा कुछ भी न हाेने का दावा कर रहे हैं, लेकिन ये सच्चाई आने वाले दिनों में पूरी तरह से साफ हो जाएगी।


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पीपीसीबी की जांच में कईं तरह की गड़बड़ियां


 


बात करें पीपीसीबी की ओर से डाइंग इंडस्ट्री पर की गई छापेमारी की तो इस जांच में कईं तरह के घालमेल दिखाई दे रही हैं। बोर्ड की ओर से जिन इंडस्ट्री में बिना ट्रीटमेंट के सीधे जमीन में या सीवरेज में डिस्चार्ज पाया गया, उन जिम्मेवार डाइंग इंडस्ट्री पर एफआईआर क्यों नहीं दर्ज करवाई गई। इन डाइंगों में ये मिलान क्यों नहीं किया गया कि जितनी बोर्ड से डिस्चार्ज की कंसेंट ली है, उससे अधिक कितनी मशीनरी इनके भीतर चल रही है। अभी तक अनियमिताओं के बीच चलने वाली इन डाइंगों पर एक महीने के करीब गुजरने के बावजूद जुर्माना क्यों नहीं तय किया गया। बड़ी बात ये भी है कि ये जांच क्यों नहीं की गई कि इन डाइंगों को आंखें बंद कर चलाने वाले अफसरों की कोई सूची तैयार की गई।


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अभी किसी भी डाइंग इंडस्ट्री को नहीं खोला गया है। इंडस्ट्री की ओर से रिकवेस्ट आई है, लेकिन जब तक इनमें अनियमिताएं दूर नहीं होंगी तब तक इंडस्ट्री नहीं खोली जाएगी।


गुलशन राय, चीफ इंजीनियर, पीपीसीबी


 


हमारे ऊपर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है। जब तक कमियां दूर नहीं होती तब तक सील इंडस्ट्री नहीं खोली जाएगी और इन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। जहां तक बात है कि इनका डिस्चार्ज कंसेंट से अधिक है, इसको आडिट करवा लिया जाएगा। उन्होंने माना कि कुछ डाइंग में डिस्चार्ज को बाइपास किया जा रहा था और उन पर कार्रवाई भी पीपीसीबी की ओर से की जाएगी। जहां तक एफआईआर की बात है, वो एक्शन नगर निगम की ओर से लिया जाना बनता है।


करुणेश गर्ग, मेंबर सेक्रेटरी पीपीसीबी


 


डिस्चार्ज के लिए परमानेंट या टैंपरेरी बाइपास रखने वाली इंडस्ट्री के लिए एक पब्लिक नोटिस देकर उन्हें टाइम बाउंड समय में बंद करने की हिदायत दी जा रही है और इसके बाद जिस भी इंडस्ट्री में चेकिंग दौरान अनट्रीटेड डिस्चार्ज का बायपास पाया गया वो इंडस्ट्री सीधे क्लोज कर दी जाएगी। हमारे पर किसी भी डाइंग को खोलने का दबाव नहीं है और कमियां दूर होने के बाद ही इन इंडस्ट्री को खोला जाएगा और इन पर इंवायरमेंट कंपनशेसएन के तहत जुर्माना भी लगाया जाएगा।


डा. एसएस मरवाहा, चेयरमैन पीपीसीबी


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